सुषमा स्वराज का साथ क्यों नहीं दे रहे बीजेपी नेता, किससे डर रहे हैं पार्टी वाले

सुषमा स्वराज का साथ क्यों नहीं दे रहे बीजेपी नेता, किससे डर रहे हैं पार्टी वाले

कुछ बातें हैं जिनका मतलब जितनी जल्दी निकाल लिया जाए उतनी जल्दी आप 2019 के नतीज़ों का अनुमान लगाने में सक्षम हो जाएंगे. बातें कई हैं लेकिन क्या आपने सोचा कि पिछले पूरे 10 दिन से सादिया और अनस पासपोर्ट मामले में सुषमा स्वराज को ट्रोल किया जा रहा है, उन पर गंभीर हमले किए जा रहे हैं. लेकिन बीजेपी या सरकार की तरफ से उनके साथ खड़ा होने कोई क्यों नहीं आया.

 

क्या आपने सोचा है कि बाबा रामदेव नितिन गडकरी के नज़दीक आने की कोशिश क्यों कर रहे हैं. हाल ही में लंदन में दिए एक इंटरव्यू में बाबा रामदेव ने कहा कि गडकरी काम सबसे अच्छा कर रहे हैं क्यों ?

 

बीजेपी की सोशल मीडिया सेल किस शहर में है और बीजेपी का कौनसा नेता उसे संचालित करता है. इस सेल पर पार्टी का कोई अधिकार है या नहीं. क्या आपको पता है कि सुषमा स्वराज को बुरा भला कहने वाले जो ट्वीट आए उनमें इस सेल के फर्जी हैशटैग ज्यादा थे. ज्यादातर वो लोग थे जिनके 10 से ज्यादा फॉलोअर नहीं हैं.

 

खैर इन सवालों के आप जवाब ढूंढे इससे पहले एक और चीज़ बताते हैं, सुषमा स्वराज के साथ बीजेपी का एक नेता खड़ा हुआ है और ये नेता भी बीजेपी पर हुकुम चला रही एक लॉबी का मारा है. ये शख्स है गृहमंत्री राजनाथ सिंह. राजनाथ पहले हैं जिन्होंने सुषमा का साथ दिया तब साथ दिया जब पूरी पार्टी को सांप सूंघ गया है और समझ नहीं आ रहा कि अगर सुषमा का साथ दिया तो कुछ गड़बड़ न हो जाए.

 

पूरी मोदी कैबिनेट में राजनाथ सिंह अकेले ऐसे नेता कहे जा रहे हैं जिन्होंने सुषमा स्वराज से इस इस बारे में बात की और मीडिया से भी अपनी बात साझा करने में दिलचस्पी जताई. द प्रिंट की खबर के राजनाथ सिंह ने पिछले कुछ दिनों से ट्विटर पर ट्रोल हो रहीं सुषमा स्वराज से सहानुभूति जताई. द प्रिंट के मुताबिक राजनाथ सिंह ने बताया, ”पिछले हफ्ते जब उन्होंने उनके साथ किए गए दुर्रव्यहार को लेकर पहला ट्वीट किया तब उसके तुरंत बाद मैंने उनसे फोन पर बात की थी.” राजनाथ सिंह ने आगे कहा, ”जब हम मिले तो मैंने उनसे मामले के बारे में पूछा. मैंने अपनी सहानुभूति व्यक्त की.”

 

इसके बावजूद राजनाथ भी इतनी हिम्मत नहीं दिखा सके कि खुलकर सुषमा स्वराज का समर्थन कर पाते. ट्विटर पर उन्होंने भी एक भी शब्द नहीं लिखा.

 

बीजेपी वाले शांत बैठे हैं जबकि पीडीपी-बीजेपी गठबंधन में जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और कई विपक्षी नेताओं ने नैतिक धरातल पर उनका समर्थन करने की बात कही. प्रोटोकॉल से बाध्य राष्ट्रपति राम नाथ कोविंग ने भी अप्रत्यक्ष तौर पर एक दिन पहले अपना समर्थन दर्ज कराया. इस सप्ताहांत राष्ट्रपति भवन में तमाम मिशन को लीड कर रहे नेताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, मैं सुषमा स्वराज अनुकरणीय नेतृत्व के लिए की उनकी तारीफ करता हूं.

 

ट्विटर पर सुषमा स्वराज के 11.7 मिलियन फॉलोवर्स हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 43.2 मिलियन फॉलोवर्स के साथ दुनिया के टॉप तीन सबसे ज्यादा फॉलो की जाने वाली शख्सियतों में से एक हैं. विदेश मंत्री ने रविवार को ट्रोलिंग पर एक ऑनलाइन पोल भी करा लिया, जिसमें चौंकाने वाले नतीजे आए. शाम तक करीब 110,000 लोगों ने वोट किया, जिसमें 43 फीसदी लोगों ने ट्रोलिंग के पक्ष में राय दी, हालांकि 57 फीसदी लोगों ने ट्रोल न करने वाले विकल्प पर वोट किया.

बता दें कि पिछले दिनों तन्वी सेठ उर्फ सादिया अनस पासपोर्ट मामले में पासपोर्ट अधिकारी का तबादला किए जाने के बाद विदेश मंत्री को ट्रोल करना शुरू हुआ था. पिछले दिनों ने तन्वी सेठ उर्फ सादिया अनस और उनके पति मोहम्मद अनस सिद्दीकी ने आरोप लगाया था उनके अलग-अलग धर्मों से होने की वजह से पासपोर्ट अधिकारी ने पासपोर्ट जारी नहीं किया.

दंपति ने इसकी शिकायत के लिए टविटर का सहारा लिया था और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को टैग कर दिया था. ऐसा होने पर पासपोर्ट अधिकारी का तबादला कर दिया गया था और दूसरे पासपोर्ट अधिकारी ने दंपति को हाथों-हाथ पासपोर्ट सौंप दिए थे. बाद में पुलिस जांच में तन्वी सेठ उर्फ सादिया अनस के दस्तावेज गलत पाए गए थे. तन्वी सेठ के लखनऊ के पते की पुष्टि नहीं हो पाई थी. पुलिस का कहना था कि वह एक साल से नोएडा में रह रही थीं.

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