क्या मुन्ना बजरंगी को हत्या के लिए बागपत लाया गया था, जेल में पिस्टल का क्या है सस्पेंस

क्या मुन्ना बजरंगी को हत्या के लिए बागपत लाया गया था, जेल में पिस्टल का क्या है सस्पेंस

नई दिल्ली :  ये सिर्फ इत्तेफाक नहीं हो सकता कि एक कैदी की पत्नी उसकी हत्या की आशंका जताए. उसकी सुरक्षा को लेकर यूपी की पुलिस एलर्ट हो. उसके सीने में कई राज़ हों जो कई नयी हकीकतों का पर्दाफाश कर सकते हैं वो मुन्ना बजरंगी. सुरक्षा के लिए झांसी जेल से बागपत जेल लाया जाता है जहां उसका पहले से एक हत्यारा इंतज़ार कर रहा होता है. हत्यारे के पास जेल में पिस्तौल पहुंच जाती है. ये सिर्फ इत्तेफाक नहीं है कि मुन्ना बजरंगी को एक नेता से फिरौती मांगने के लिए कोर्ट में पेश होना था.

मुन्ना बजरंगी का असली नाम प्रेम प्रकाश सिंह है. बजरंगी की पत्नी सीमा सिंह ने लखनऊ में 10 दिन पहले ही प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उसकी हत्या की आशंका जताई थी. सीमा ने कहा था कि झांसी जेल में बंद माफिया मुन्ना बजरंगी का एनकाउंटर करने की साजिश हो रही है. उसका आरोप था कि एसटीएफ में तैनात एक अधिकारी के इशारे पर ऐसा हो रहा है. इस अफसर के कहने पर ही जेल में बजरंगी को खाने में जहर देने की कोशिश तक की गई.

इसके अलावा उन्होंने ढाई साल पहले विकासनगर में पुष्पजीत सिंह और गोमतीनगर में हुए तारिक हत्याकांड में शामिल शूटरों को सत्ता व पुलिस अधिकारियों का संरक्षण मिलने का आरोप भी मढ़ा था. सीमा सिंह ने मुन्ना बजरंगी को जेल से शिफ्ट करने की गुहार भी लगाई थी.

बीजेपी नेता की हत्या में था आरोपी

मुन्ना बजरंगी ने 29 नवंबर 2005 में बीजेपी नेता कृष्णानंद राय की हत्या कर दी थी. राय की हत्या के जुर्म में मुख्तार अंसारी भी जेल में बंद है. मुन्ना ने सरेआम कृष्णानंद  को लखनऊ हाईवे पर मारा था. कृष्णानंद की 2 गाड़ियों पर AK-47 से फायरिंग की गई थी. मुन्ना राजनीति में भी आना चाहता था और इसके लिए उसने दो प्रमुख दलों से टिकट हासिल करने की कोशिश की लेकिन वह इसमें ज्यादा सफल नहीं हो सका.

यही वजह है कि बिना देरी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने मुन्ना बजरंगी की हत्या की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं. योगी ने कहा, ‘जेल में हुई हत्या बहुत गंभीर मामला है. मामले की गहराई से जांच होगी. दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा.’

मुन्ना बजरंगी पर 40 हत्याओं, लूट, रंगदारी की घटनाओं में शामिल होने का केस दर्ज है. मुन्ना बजरंगी पूरे यूपी की पुलिस और एसटीएफ के लिए सिरदर्द बना हुआ था. वह लखनऊ, कानपुर और मुंबई में क्राइम करता था. सरकारी ठेकेदारों से रंगदारी और हफ्ता वसूलना का भी आरोप था.

बता दें कि मुन्ना बजरंगी का जन्म 1967 में उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के पूरेदयाल गांव में हुआ था. उसके पिता पारसनाथ सिंह उसे पढ़ा लिखाकर बड़ा आदमी बनाने का सपना संजोए थे. मगर प्रेम प्रकाश उर्फ मुन्ना बजरंगी ने पांचवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी. किशोर अवस्था तक आते आते उसे कई ऐसे शौक लग गए जो उसे जुर्म की दुनिया में ले जाने के लिए काफी थे.

जेल से पूरी की नौंवी की पढ़ाई

गाजीपुर के भाजपा विधायक कृष्णानंद राय हत्याकांड के आरोपी प्रेम प्रकाश उर्फ मुन्ना बजरंगी 10 अप्रैल 2013 को उसे गाजीपुर से सुल्तानपुर की जिला जेल में शिफ्ट किया गया था. साल 2015 में साल उसने यहीं पर रहते हुए नौंवी पास की और हाईस्कूल की परीक्षा में शामिल होने के लिए आवेदन किया था.

रामपुर के ब्लॉक प्रमुख को मारने का आरोप

मुन्ना बजरंगी पर जौनपुर के रामपुर ब्लॉक प्रमुख कैलाश दुबे की हत्या का भी आरोप है. 24 जनवरी 1996 को कैलाश दुबे की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस घटना में दुबे के साथ मौजूद दो और लोग भी मारे गए थे. पुलिस के मुताबिक, ब्लॉक प्रमुख कैलाश दुबे की लोकप्रियता बढ़ती देख उनकी हत्या भाड़े पर कराई गई थी.

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