रिटायर होने से तीन घंटे पहले सस्पेंड, ये था मामला

कर्नाटक के राज्य सड़क परिवहन निगम के अधिकारियों ने विभाग के एक चीफ मकैनिकल इंजिनियर को उनके रिटायरमेंट के महज तीन घंटे पहले सेवा से सस्पेंड कर दिया. विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई के नाम पर अधिकारियों ने 28 फरवरी को यहां कार्यरत चीफ मकैनिकल इंजिनियर बीसी गंगना गौड़ा को सस्पेंड कर दिया. सूत्रों के मुताबिक गौड़ा को सस्पेंड किए जाने की जानकारी दोपहर 2 बजे मिली और इसी दिन पर 5 बजे वह अपनी नौकरी से रिटायर होने वाले थे. गौड़ा को अब तक विभाग के एक ईमानदार अफसर के तौर पर ही जाना जाता था. 

जानकारी के मुताबिक, सस्पेंड होने के बाद बीसी गंगना गौड़ा अब रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले लाभों के फायदे के लिए दर-दर के चक्कर काट रहे हैं, वहीं परिवहन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि गौड़ा के खिलाफ जो कार्रवाई की गई उसके संबंध में जांच की जा रही है. इसके अलावा अगर गौड़ा किसी आरोप के खिलाफ अपील करना चाहते हैं तो वह विभाग की अनुशासन समिति के समक्ष इसे लेकर अपनी याचिका दे सकते हैं. बता दें कि परिवहन निगम द्वारा बसों की खरीद का जो काम शुरू हुआ था, उसके पहले एनजीटी ने बीएमटीसी से डीजल बसों के उपयोग को कम करने की बात कही थी.

विभागीय अधिकारियों ने इस कार्रवाई पर यह तर्क दिया कि गौड़ा ने जानबूझकर परिवहन निगम की कई बसों को वर्कशॉप में खड़ा रखा, जिसके कारण विभाग को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ. वहीं कुछ सूत्रों ने बताया कि विभागीय अधिकारियों और गौड़ा के बीच पिछले दिनों इलेक्ट्रॉनिक बसों की खरीद को लेकर कुछ मतभेद हुए थे. हाल में हुई इस कार्रवाई को इन मतभेदों से ही जोड़कर देखा जा रहा है. विभागीय सूत्रों का यह भी कहना है कि बसों को बेवजह वर्कशॉप में रखने का जो आरोप गौड़ा पर लगाया गया है, उसे लेकर भी संशय है क्योंकि दिसंबर महीने जिसके लिए गौड़ा पर कार्रवाई हुई उसमें सिर्फ 330 बसों को ही वर्कशॉप में रखा गया था. जबकि सितंबर 2018 में 938, अक्टूबर में 784 और नवंबर में 605 बसें ऑफ रोड थीं.

सूत्रों के मुताबिक, बेंगलुरु मेट्रो ट्रांसपोर्टे कॉर्पोरेशन के अधिकारियों ने बीते दिनों यहां इलेक्ट्रॉनिक बसों की खरीद को लेकर एक प्रस्ताव पर काम करना शुरू किया था और गौड़ा इसकी टेंडर कमिटी के सदस्य थे. इसी प्रस्ताव को लेकर अधिकारियों से उनके मतभेद भी हुए थे. हालांकि सवाल पूछे गौड़ा ने खुद इन बातों पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया.