नवाज़ शरीफ को जिस केस में सज़ा हुई उसमें मोदी के कई करीबी, जांच में फंसा दिया केस

नवाज़ शरीफ को जिस केस में सज़ा हुई उसमें मोदी के कई करीबी, जांच में फंसा दिया केस

नई दिल्ली : फेसबुक पर पत्रकार गिरजेश वशिष्ठ का ये पोस्ट वायरल हो रहा है.पत्र में पनामा लीक की जानकारी भी है और ये भी बताया गया है कि पनामा मामले में भारत की सरकार पाकिस्तान से काफी पीछे दिखाई दे रही है. पढ़िए पूरा पोस्ट-

माफ कीजिएगा पाकिस्तान की तारीफ कर रहा हूं. बुरा लगे तो और माफ कर दीजिएगा. और ज्यादा लगे तो दो चार रोटी ज्यादा खा लीजिएगा लेकिन आज पकिस्तान की तारीफ का दिन है पाकिस्तान ने साबित कर दिया है कि वहां कानून का शासन है. कोई कितना भई करप्शन कहे लेकिन वहां करप्शन के मुद्दे पर माफी नहीं हैं. वहां घोटाला करके प्रधानमंत्री भी नहीं बचता लेकिन हमारे यहां प्रधानमंत्री का कृपापात्र होने भर से कई की नैया पार हो जाती है. जिस पनामा लीक केस में नवाज शरीफ की सरकार गई है उसी पनामा लीक में मोदी जी के देश के 500 नाम हैं. इंडियन एक्सप्रेस बाकायदा लिस्ट भी छाप चुका है.

नाम जानना चाहते हैं तो फिर बता देता हूं. लिस्ट में मोदी जी के सगे गौतम अडानी के बड़े भाई विनोद अडानी का नाम है. मोदी के सबसे नज़दीकी सितारे अमिताभ बच्चन का नाम है. उनकी हू ऐश्वर्या राय का नाम है. देशभक्त एक्टर अजय देवगन का नाम है.

मोदी जी आपके सगे चीफ मिनिस्टर रमन सिंह के बेटे अभिषेक सिंह का नाम भी उसी केस में है जिसमें पाकिस्तान के पीएम नवाज़ शरीफ को दोषी माना गया और उन्हें सज़ा भी होगी. बंगाल के शिशिर बजोरिया का नाम है और अनुराग केजरीवाल का भी नाम है. रमन सिंह के बेटे के पास ये दौलत कहां से आई होगी इसके लिए अलग से जानकारी देने की ज़रूरत नहीं हैं. मोदी जी सबसे समझदार पीएम हैं . अंदाज़ा आसानी से लगा सकते हैं.

चलो ये सब तो मोदी जी और उनकी पार्टी के सगे हैं. लेकिन इकबाल मिर्ची का आपकी सरकार कुछ क्यों नही बिगाड़ सकी. इंडिया बुल्स के मालिक भी पनामा में नोटों का खेल खेलकर इस मजे में हैं.

आप ईमानदारी के नाम पर बिहार की सरकार पलट देते हैं लेकिन इस मामले में कुछ नहीं कर पाते. ज़रा पाकिस्तान से सीखिए. जहां की सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ को सलाखों का रास्ता दिखा दिया . आइसलैंड से सीखिए जहां के पीएम ने इस्तीफा दे दिया. आप तो कहते थे कि मैं न खाऊंगा न खाने दूंगा लेकिन ये नोटों का अजीर्ण लिए घूम रहे नाम क्या आपने अखबार में नहीं पढ़े. क्या पनामा लीक्स के बारे में आपको कुछ नहीं पता.

खैर नहीं पता तो बता देता हूं. वैसे भी ये वो देश है जहां का टूर अभी तक आपने नहीं किया है.

पनामा मध्य अमेरिका का एक छोटा सा देश है. पनामा में विदेशी निवेश पर कोई टैक्स नहीं लगता है इसी वजह से पनामा में लगभग साढ़े तीन लाख सीक्रेट कंपनियां है. पनामा में सेक फाॅन्सेका नामक फर्म विदेशियों को पनामा में शेल कंपनी( फेक कंपनी) बनाने में मदद करती है जिसके जरिये कोई भी व्यक्ति संपत्ति अपना नाम पता बताए बगैर यहां संपत्ति खरीद सकता है.

इसी कंपनी के लीक हुऐ दस्तावेजों में दुनिया भर के बडे नेताओं प्रमुख खिलाडियों और अन्य बडी हस्त्तियों के नाम सामने आये हैं जिन्होनें अरबो डॉलर की राशि पनामा में छुपाई हुई है.

इनमें आइसलैंड और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ , यूक्रेन के राष्ट्रपति, सऊदी अरब के राजा और डेविड कैमरन के पिता का नाम प्रमुख है.

इनके अलावा लिस्ट में व्लादिमीर पुतिन के करीबियों, अभिनेता जैकी चैन और फुटबॉलर लियोनेल मेसी का नाम भी है. दुनिया भर में इन दस्तावेजों के आधार पर एक्शन हो रहे हैं. मोदी जी आप क्या कर रहे हैं. कुछ कर डालिए. आपसे देश को इतिहास में सबसे ज्यादा उम्मीदें हैं.

 

आइए जानते हैं भारत के वो कौन से नाम थे जो पनामा पेपर्स लीक मामले में सामने आए थे…

अभिनेता अमिताभ बच्चन

अभिनेत्री ऐश्वर्या राय बच्चन

अभिनेता अजय देवगन

छत्तीसगढ़ सीएम के रमन सिंह के बेटे अभिषेक सिंह

इंडियाबुल्स के समीर गहलोत

गौतम अडानी के भाई विनोद अडानी

पश्चिम बंगाल से नेता शिशिर बजोरिया

दिल्ली लोकसत्ता पार्टी के पूर्व नेता अनुराग केजरीवाल

दिवंगत इकबाल मिर्ची

गड़वारे परिवार – अशोक गड़वारे, आदित्य गड़वारे और सुषमा गड़वारे

अपोलो ग्रुप के चेयरमैन ओंकार कंवर

वकील और भारत के सॉलिसिटर जनरल रह चुके हरीष साल्वे

पूर्व आटॉर्नी जनरल सोली सोराबजी के पुत्र व बॉम्बे हॉस्पिटल में डॉक्टर जहांगीर एस सोराबजी

इंडो रामा सिंथेटिक्स के चेयरमैन मोहन लाल लोहिया

अरबपति सायरस पूनावाला के भाई जावेरे पूनावाला

पूर्व विधायक अनिल वासुदेव सालगाउकर

अमलगमेशंस ग्रुप के चेयरमैन की दिवंगत पत्नी इंदिरा सिवासेलम और उनकी बेटी मल्लिका श्रीनिवासन

कॉटेज इंडस्ट्रीज एक्सपोजीशन (सीआईई) के फाउंडर व सीईओ अब्दुल राशिद मीर व उनकी पत्नी तबस्सुम

डीएलएफ के कुशल पाल सिंह और नौ परिवार के सदस्य

मेहरासंस ज्वैलर्स अश्वनी कुमार मेहरा और परिवार के सदस्य

वरिष्ठ पत्रकार करण थापर

इन सभी पर कथित तौर पर कर चोरी और धन को दूसरे देशों में छिपाने का आरोप है.

हालांकि बाद में अमिताभ ने सफाई देते हुए कहा था कि उनका इन कंपनियों से कोई रिश्ता नहीं है. मैं खुद जानना चाहता हूं कि उन चार कंपनियों में मेरा नाम कैसा आया?

जानिए क्या है पनामा पेपर्स लीक मामला :

इंटरनेशनल कन्सॉर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (आईसीआईजे) नाम के एनजीओ ने पनामा पेपर्स के नाम से यह बड़ा खुलासा किया था.

पनामा उत्तरी व दक्षिणी अमेरिका को ज़मीन के रास्ते से जोड़ने वाला एक देश है.

यहां की एक क़ानूनी फर्म मोसेक फोंसेका के सर्वर को 2013 में हैक करने के बाद यह खुलासा किया गया था.

मोसेक फोंसेका एक लॉ कंपनी है

यह पैसे का मैनेजमेंट करने का काम करती है

सुरक्षित रूप से पैसा ठिकाने लगाने में मदद करती है

फर्जी कंपनी खोलकर उनके कागज़ों का हिसाब रखती है

पत्रकारों के एक समूह ने 1 करोड़ 10 लाख दस्तावेज़ों का इस मामले में खुलासा किया था

100 मीडिया ग्रुप्स के पत्रकारों को दस्तावेज दिखाए गए

70 देशों 370 रिपोर्टरों ने 8 महीनों तक इन दस्तावेजों की जांच की

इस बारे में आईसीआईजे ने उस समय कहा था कि निश्चित तौर पर हो सकता है कि यह पूरी तरह गैरकानूनी न हो, लेकिन यह इतना तो दिखाता ही है कि किस तरह इन हस्तियों द्वारा देश के कोष को टैक्स बचाकर नुकसान पहुंचाया गया.

क्यों हस्तियां रखती हैं देश से बाहर पैसा

बड़ी हस्तियां अपने निवास के देश से बाहर जो खाते रखते हैं, उनका मकसद कई तरह के वित्तीय और कानूनी लाभों को लेना होता है. ये विदेशी खाते अधिकतर ऐसे देशों में रखे जाते हैं, जिन्हें ‘टैक्स हैवेन’ माना जाता है. इन खातों का उपयोग पैसे को देश के बैंकिंग सिस्टम की नजर से बचाकर बाहर ले जाने और टैक्स अथॉरिटीज़ की नज़र से बचाकर टैक्स सेविंग के लिए किया जाता है.

भारत में पनामा जांच की क्या है स्थिति

पनामा पेपर्स लीक में करीब 500 भारतीयों का नाम आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए थे लेकिन पिछले साल से अब तक इसकी रिपोर्ट सामने नहीं आ सकी है.

पनामा जांच समिति के मामले में पिछले साल मल्टी एजेंसी इंवेस्टीगेशन (एमएआई) का गठन किया गया था लेकिन कोई रिपोर्ट न आने पर इसी साल जनवरी में वकील मनोहर लाल शर्मा ने पनामा जांच के खुलासे के लिए स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम की मांग की थी. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से मल्टी एजेंसी इंवेस्टीगेशन (एमएआई) द्वारा सौंपी गईं सभी छह रिपोर्ट सौंपने को कहा था.

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