राम मंदिर पर अध्यादेश लाना संभव ही नहीं, सारी बयानबाज़ी राजनीतिक है, BBC की रिपोर्ट

संसद में राम मंदिर को लेकर अध्यादेश लाने की बात चल रही है , बार-बार इसकी मांग भी उठ रही है. लेकिन एक बड़ा सवाल अब भी बना हुआ है. सवाल ये है कि क्या ऐसा कानून लाया जा सकता है. क्या ऐसे किसी कानून की कानूनी अहमियत है. बीबीसी ने अपनी रिसर्च में ये जानने की कोशिश की. बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक उसने पूछा कि क्या इस तरह का कोई क़ानून सरकार क्या ला सकती है?

बीबीसी हिंदी ने संविधान के जानकार और मशहूर वकील सूरत सिंह ने से बात की सुरत सिंह का कहना था- “सरकार के पास अगर बहुमत हो तो उसके पास अधिकार है कि वो क़ानून बना सकती है. लेकिन उस क़ानून को संविधान की मूल भावनाओं के अनुरूप होना होगा.”

संविधान के मूल में न्याय, स्वतंत्रता, समानता और धर्मनिरपेक्षता जैसी भावनाएं निहित हैं. ये सभी संविधान की प्रस्तावना में बहुत साफ़ तौर पर दर्ज हैं.

सुप्रीम कोर्ट की मशहूर वकील इंदिरा जयसिंह तो साफ़तौर पर कहती हैं कि कोई भी क़ानून किसी भी एक धर्म के लिए नहीं तैयार किया जा सकता है.

इसके बावजूद अगर सरकार इस मुद्दे पर क़ानून ले भी आती है तो उसे सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज किया जा सकता है, और अगर अदालत को कहीं भी लगता है कि नया क़ानून संविधान की किसी भी भावना के विपरीत है तो वो उसे रद्द कर देगी.

सुप्रीम कोर्ट ने चंद महीनों पहले ही समलैंगिकता को जुर्म मानने वाले एक क़ानून को इस आधार पर रद्द कर दिया क्योंकि वो समानता के अधिकार के विपरीत था.

केरल के सबरीमाला के संबंध में भी जो फ़ैसला अदालत ने दिया था वो इसी मूल भावना पर आधारित था कि क्या लिंग के आधार पर किसी को कहीं जाने से रोका जा सकता है?

राम मंदिर पर निजी बिल

सूरत सिंह पूरे मामले को और समझाते हुए कहते हैं कि संपत्ति का अधिकार एक अहम क़ानून है लेकिन उसमें ये अधिकार शामिल नहीं कि आप पड़ोसी की संपत्ति पर क़ब्ज़ा कर लें यानी जब आप एक क़ानून किसी समुदाय या समूह विशेष के लिए बना रहे हों तो आपको ये भी ध्यान रखना होगा कि उससे दूसरे समुदाय या वर्ग के अधिकार का हनन नहीं हो रहा हो.

शायद यही वजह हो कि हाल के दिनों में तमामतर दावों के बावजूद राज्यसभा सांसद राकेश सिन्हा के राम मंदिर बिल का मामला अब तक आगे नहीं बढ़ा है.

उन्होंने दूसरे दलों जैसे कांग्रेस और वामपंथियों से ये सवाल भी किया था कि वो इस तरह के बिल का समर्थन करेंगे या नहीं, लेकिन फिर इस बारे में किसी तरह के किसी मसौदे के बारे में उनकी तरफ़ से ख़ामोशी बनी हुई है.

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1 टिप्पणी

  1. कुछ भी नहीं होगा। लोगो को सिर्फ और सिर्फ वोट के लिए गुमराह कर रहे हैं।

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