जानिए कौन हैं महाराष्ट्र को आग में झोंक देने वाला ये शख्स, एक इशारे पर जुटते हैं 5 लाख लोग

जानिए कौन हैं महाराष्ट्र को आग में झोंक देने वाला ये शख्स, एक इशारे पर जुटते हैं 5 लाख लोग

नई दिल्ली : इस तस्वीर में दिखने वाला ये सादा सा बुजुर्ग कोई आम आदमी नहीं है. ये वो शख्स है जिसने दलित और सवर्ण के नाम पर महाराष्ट्र को आग में झोक दिया. राज्य के शिव प्रतिष्ठान हिंदुस्तान के जानेमाने नेता संभाजी भिड़े और समस्त हिंदू आघाडी के मिलिंद एकबोटे के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. 85 वर्षीय भिड़े पर भीमा-कोरेगांव की लड़ाई की 200वीं वर्षगांठ के दौरान हिंसा फैलाने का आरोप लगा है. एटोमिक साइंस में स्नातक भिड़े का दिमाग भी परमाणु बम की तरह विध्वंसक है.

वह मराठा सम्राट छत्रपति शिवाजी के अनुयायी हैं और उनके भी भारी संख्या में युवा फॉलोअर्स हैं. उनकी महाराष्ट्र के कोलहापुर में शिव प्रतिष्ठान नाम की संस्था है. वह उन नेताओं में शामिल हैं, जिन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और महाराष्ट्र के कई अन्य नेता भी पसंद करते हैं. संघ परिवार में उनका सम्मान है और पीएम मोदी उनके मुरीद है. निजी मौकों पर वो कई बार भिड़े की संगठन क्षमता की तारीफ कर चुके हैं.

आपको जानकर हैरानगी होगी कि भिड़े ने प्रतिष्ठित पुणे विश्वविद्यालय से अटॉमिक साइंस में एमएससी की है. वह पुणे के फर्ग्युसन कॉलेज में प्रोफेसर भी रह चुके हैं. डिग्री पूरी होने के बाद उन्हें गोल्ड मेडल से नवाजा गया था. इतना सब होने के बावजूद भिड़े ने राजनीति का रास्ता चुना. वह हमेशा नंगे पैर रहते हैं और अब तक उन्होंने खुद का घर भी नहीं बनाया है. इसके अलावा उन्होंने अपने किसी भी फॉलोअर से फंड की मांग नहीं की और बड़ी पार्टियों से कभी फंड नहीं लिया.

सांबाजी भिड़े ने कभी कार में यात्रा नहीं की और ना ही कभी आराम करने के लिए किसी जगह पर रुके. वह हमेशा घूम-घूमकर अपने फॉलोअर्स से मिलकर मुद्दों पर बातचीत करते रहते हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक महाराष्ट्र की वर्तमान युवा जनसंख्या उन्हें अपना आदर्श मानती है और भिड़े के एक इशारा पर 4-5 लाख युवा एक जगह जमा हो सकते हैं.

भारीपा बहुजन महासंघ अध्यक्ष प्रकाश अंबेडकर ने शिवजगर प्रतिष्ठान के अध्यक्ष संभाजी भिडे गुरुजी और हिंदू जनजागृति समिति के अध्यक्ष मिलिंद एकबोटे के नामों का हवाला दिया, जिनके खिलाफ पुणे पुलिस ने शिकायत दर्ज की है. अंबेडकर ने मांग की, “उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए और याकूब मेमन के समान दंड दिया जाना चाहिए.”