उन्हें साइकिल तक चलानी नहीं आती थी, अब 26 जनवरी पर मिलेगा सैल्यूट

उन्हें साइकिल तक चलानी नहीं आती थी, अब 26 जनवरी पर मिलेगा सैल्यूट

नई द‍िल्‍ली : जब अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा गणतंत्र दिवस परेड पर मेहमान बने थे तो राजपथ पर होने वाले मोटर साइकिल करतब देखकर दंग रह गए थे. लेकिन इस बार जो हो रहा है वो और भी हैरत अंगेज़ है. परेड में मोटर साइकिल करतब दिखाने का मोर्चा इसबार महिलाएं संभालेंगी. इनमें कई ऐसी महिलाएं भी हैं जिन्हें कभी बाइक तो क्या साइकिल तक चलानी नहीं आती थी. सीमा सुरक्षा बल यानी कि बीएसएफ की 113 महिला बाइकर्स इस बार गणतंत्र दिवस परेड में करतब दिखाने का मौका मिला है. वे 350 सीसी की 26 रॉयल एनफील्ड मोटरसाइकिलों पर सवार होकर एरोबेटिक्स और दूसरी तरह की कलाबाजी में अपने कौशल और साहस का परिचय देने वाली हैं.

जम्मू-कश्मीर के लद्दाख क्षेत्र में बीएसएफ की सब इंस्पेक्टर स्टैन्जीन नॉरयांग (28) की अगुआई में 20 से 31 वर्ष आयु वर्ग की महिला बाइकर्स की टीम की लीडर नॉरयांग जब बीएसएफ की इन साहसी महिलाओं के दल में शामिल हुई थीं तो वह बाइक चलाना बिल्कुल नहीं जानती थीं. लेकिन आज वह आत्मविश्वास के साथ न सिर्फ बाइक चला सकती हैं, बल्कि एक ही मोटरसाइकिल पर 10 दूसरे सवारों के साथ साहसिक करतब भी दिखा सकती हैं. वो खुद ही नहीं दूसरी कई लड़कियां भी हैं जो पहले बाइक चलाना नहीं जानती थीं और आज सबसे गोरवशाली प्रदर्शन का हिस्सा हैं.

नॉरयांग के मुताबिक, ‘मैंने बाइक चलाने के बारे में कभी नहीं सोचा था, क्योंकि मुझे डर लगता था. लेकिन अब मैं रॉयल एनफील्ड बुलेट पर करतब दिखा सकती हूं. मुझे अपने सीनियर्स पर गर्व है, जिन्होंने मुझे ट्रेनिंग दी और गणतंत्र दिवस के अवसर पर करतब दिखाने वाले दल की अगुआई करने के लिए चुना.’

बाइकर्स टीम 26 जनवरी के कार्यक्रम से पहले राजपथ पर अभ्यास कर रही हैं. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ-साथ इस बार बतौर विशिष्ट अतिथि 10 आसियान देशों के प्रमुख गणतंत्र दिवस परेड का निरीक्षण करेंगे.

परेड के लिए महिलाओं का दल तैयार करने का मौलिक विचार बीएसएफ के महानिदेशक के. के. शर्मा का था. उपमहानिदेशक पुष्पेंद्र राठौर ने बताया कि शर्मा पुरुषों की जगह महिलाओं को परेड में उतारना चाहते थे. राठौर इस दल के प्रभारी हैं और वह दिसंबर से दिल्ली में हैं.

डिप्टी कमांडेंट रमेश चंद्र मुख्य कोच हैं और उपनिरीक्षक के. एम. कल्याण ग्वालियर के टेकनपुर स्थित केंद्रीय मोटर परिवहन विद्यालय में बीएसएफ की स्पेशल टीम द्वारा प्रशिक्षित दल के कोच हैं.

इस टीम में लगभग सभी प्रदेशों के सदस्य शामिल हैं. सबसे ज्यादा 20 सदस्य पंजाब से हैं, उसके बाद पश्चिम बंगाल से 15 सदस्य हैं. वहीं, मध्यप्रदेश से 10, महाराष्ट्र से नौ, उत्तर प्रदेश से आठ, असम व बिहार से सात-सात, ओडिशा से छह और राजस्थान, मणिपुर व गुजराज से पांच-पांच, जम्मू एवं कश्मीर व छत्तीसगढ़ से तीन-तीन, कर्नाटक, उत्तराखंड, दिल्ली और केरल से दो-दो और मेघालय व हिमाचल प्रदेश से एक-एक सदस्य इस टीम में शामिल हैं.

चंद्रा ने बताया कि मोटरसाइकिल वाहन दल में शामिल प्रतिभागियों का चयन भारत की विविधता में एकता को ध्यान में रखकर किया गया है. दल में शामिल 15 महिलाएं विवाहित हैं, जबकि 113 अविवाहित.

कल्याण ने बताया कि दल में शामिल महिलाओं को कठिन प्रशिक्षण के दौर से गुजरना पड़ा है, जिसमें उन्हें सुबह आठ बजे से दोपहर एक बजे तक और फिर दोपहर साढ़े तीन बजे से शाम साढ़े पांच बजे तक ट्रेनिंग दी जाती थी.

यह परंपरा रही है कि बीएसएफ और सेना के बाइक सवार जांबाज हर साल बारी-बारी से गणतंत्र दिवस परेड का समापन करते हैं. इस साल बीएसएफ की बारी है, जिसमें महिलाओं का दल पिरामिड, फिश राइडिंग, शक्तिमान, बुल फाइटिंग, सीमा प्रहरी और अन्य हैरतअंगेज करतब दिखाने की तैयारी में है.