यूपी पुलिस ने 10 हज़ार कॉल डिटेल्स चेक की, सीसीटीवी खंगाले, ये इमरजेंसी नहीं तो क्या है?

यूपी पुलिस ने 10 हज़ार कॉल डिटेल्स चेक की, सीसीटीवी खंगाले, ये इमरजेंसी नहीं तो क्या है?

नई दिल्ली : यूपी के किसान देश को 35 प्रतिशत आलू का उत्पादन करते हैं. इस बार काफी कीमतें न के बराबर कम हो गईं. किसानों को काफी  नुकसान उठाना पड़ा है. हालत इस कदर खराब है कि कोल्ड स्टोरेज में जमा आलू पर किसान दावा ही नहीं कर रहे हैं. क्योंकि बाजार में रेट काफी कम है, उससे ज्यादा उन्हें कोल्ड स्टोरेज में जमा आलू का किराया देना पड़ रहा है. इस नाते अब कोल्ड स्टोरेज खाली करने के लिए पुराने आलू को कई स्थानों के कोल्ड स्टोरेज ने फेंकना शुरू कर दिया है.

इस फेंकाफांकी के बाद समाजवादी पार्टी के दो कार्यकर्ताओं ने ट्रक में आलू भरे और यूपी के सबसे वीआईपी इलाके में फेंक दिए. इसके बाद दोनों कार्यकर्ता गायब हो गए. अखबारों में जबरदस्त खबरें छपीं. इसके बाद सरकार से उम्मीद की जाती थी कि वो आलू किसानों की समस्याओं पर कुछ विचार करेगी लेकिन हुआ इसका उल्टा. आगे पढ़िए कि सरकार ने कैसे इस समस्या का हल निकाला.

यूपी की योगी सरकार का रवैया कितना अहंकारी है इसका अंदाज़ा यूपी के आलूकांड से लगा सकते हैं. इस मामले के बाद यूपी के पुलिस कप्तान की जान सांसत में आ गई. पुलिस ने सारा काम छोड़कर आलू फेंकने वाले नेताओं क तलाश शुरू कर दी. सरकार की बदनाम करने वालों को निशाने पर लिया गया.

चूंकि आलू फेंकने का कार्यक्रम बिना चेतावनी के अंजाम दिया गया था तो पुलिस ने इसे अपराध की तरह लिया. पूरा पुलिस महकमा किसी सामूहिक हत्याकांड से भी ज्याद  मुस्तैदी से आलू फेंकने वाले की तलाश में जुट गया. हाई सिक्योरिटी जोन के सीसीटीवी फुटेज का एक एक पल घंटों तक देखा गया. कई पुलिस वाले इस काम में लगे रहे. 10 हजार से अधिक लोगों के फोन नंबर सर्विलांस पर लगाए गए. ये रिकॉर्ड था.

इसके बाद पुलिस ने समाजवादी पार्टी के दो कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया. आरोप लगा सरकार को बदनाम करने का . उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस में जानकारी देते हुए बताया कि पकड़े गए लोग सपा के यूथ विंग के बताए जाते हैं. इससे पता चलता है कि आलू फेंकने वाले किसान नहीं, बल्कि राजनीतिक कार्यकर्ता थे, उनके सपा कनेक्शन की जांच चल रही है.

सीसीटीवी से पता चला वाहन का नंबरः लखनऊ एसएसपी दीपक कुमार ने बताया कि जब मुख्यमंत्री आवास को जाने वाली सड़क सहित हाई सिक्योरिटी जोन के अन्य स्थलों  पर आलू फेंकने की घटना हुई, तब पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज जुटाए. सीसीटीवी से आलू फेंकने में इस्तेमालवाहन का नंबर पता चल गया. जांच करने पर यह वाहन कन्नौज के जिला पंचायत सदस्य शिल्पी चौहान के पति संजू के नाम दर्ज मिला.

पुलिस ने इन दोनों नेताओं को प्रेस कांफ्रेंस में बाकायदा काले कपड़े से मुह ढककर पेश किया जैसे किसी बड़े अपराधी या आतंकवादी को किया जाता है.

पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने आलू एक कोल्ड स्टोरेज से खरीदा था. फिर राज्य विधानसभा और मुख्यमंत्री आवास वाले रोड पर फेंकने की योजना बनाई. एक दिन पहले आरोपी राजधानी के मॉल एवेन्यू स्थित एक घर में ठहरे थे, फिर अगले दिन ही उन्होंने सड़क पर आलू फेंका. वे आलू किसानों की दुर्दशा को मुद्दा बनाकर सरकार को बदनाम करना चाहते थे. आलू फेंकने में गिरफ्तार दोनों आरोपी सपा से जुड़े बताए जाते हैं. कन्नौज के दोनों युवक समाजवादी पार्टी युवजन सभा से जुड़े बताए जाते हैं.

 

ये इस कहानी के नाम और पात्र बदल दिए जाएं तो आपको लगेगा कि पुलिस ने किसी बम ब्लास्ट को अंजाम देने वाले आतंकवादियों को गिरफ्तार किया है. लेकिन इस गिरफ्तारी से बदला क्या.