संभाजी भिड़े को गुरु मानते थे मोदी, खुद मोदी की जुबानी जानिए रिश्ते का सच

संभाजी भिड़े को गुरु मानते थे मोदी, खुद मोदी की जुबानी जानिए रिश्ते का सच

नई दिल्ली : चाहे संभाजी भिड़े हों या गुरमीत राम रहीम हों या आसाराम बापू या या कोई और शख्स. नेता लोग वोट बैंक के चक्कर में  हमेशा उन्हें अहमियत दे देकर बड़ा बनाते हैं. आज जो संभाजी भिड़े महाराष्ट्र में हिंसा के लिए इतना चर्चा में हैं उनकी नेता लोग आरती गाया करते थे. खुद पीएम मोदी 2014 में लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान संभाजी भिडे से रायगढ़ किले पर जाकर मिले थे. मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री ने मंच से संभाजी भिडे की की जमकर तारीफ की. इन तारीफों का ही नतीजा था कि संभाजी भिड़े के चक्कर में नौजवान किसी से भी भिड़ जाते थे.

पीएम मोदी ने भिडे के बारे में कहा था, “मैं भिडे गुरु जी का बहुत आभारी हूं क्योंकि उन्होंने मुझे निमंत्रण नहीं दिया बल्कि उन्होंने मुझे हुक्म दिया था. कि नरेन्द्र मोदी तुम यहां आओ. मैं भिडे गुरु जी को बहुत सालों से जानता हूं. हम जब समाज जीवन के लिए कार्य करने के संस्कार प्राप्त करते थे तब हमारे सामने भिडे गुरु जी का उदाहरण प्रस्तुत किया जाता था.”

उन्होंने कहा था, “अगर कोई भिडे गुरु जी को बस पर या रेल के डिब्बे में मिल जाए तो कल्पना नहीं कर सकता कि ये कितने बड़े महापुरुष हैं, कितने बड़े तपस्वी हैं. अंदाज़ा नहीं कर सकता है.”

दलित नेता प्रकाश आंबेडकर ने आरोप लगाया कि ‘यह हिंसा दलितों के ख़िलाफ़ की गई’. जिसके बाद पुणे के पिंपरी पुलिस स्टेशन में संभाजी भिडे और मिलिंद एकबोटे के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज की गई थी.

सांगली ज़िले के रहने वाले संभाजी भिडे 80 साल के हैं और महाराष्ट्र के वरिष्ठ हिंदूवादी कार्यकर्ता हैं. संभाजी आरएसएस के बड़े कार्यकर्ता बाबाराव भिड़े के भतीजे हैं. संभाजी खुद भी आरएसएस से जुड़े थे लेकिन बाद में उन्होंने सांगली में 1984 में श्री शिव प्रतिष्ठान की स्थापना की जिसकी वेबसाइट में बताया गया है कि उनका लक्ष्य हिंदुओं को शिवाजी और संभाजी के ब्लड ग्रुप का बनाना है.