क्या है हिंसा की आग में जलते महाराष्ट्र इनसाइड स्टोरी

क्या है हिंसा की आग में जलते महाराष्ट्र इनसाइड स्टोरी

नई दिल्ली: देश भर में सोशल पुलिसिंग करने और गुंडागर्दी फैलाने की कोशिशें इस बार महाराष्ट्र के हालात बिगड़ने की वजह बन गईं. गौरक्षकों की हिंसक गतिविधियों के बाद महाराष्ट्र के भईमा कोरेगांव की लड़ाई ने फिर दक्षिणपंथी या कहें कि हिंदूवादियों को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है.

खुद संघ परिवारी सीएम सीएम देवेन्द्र फडणवीस ने कहा कि, “भीमा-कोरेगांव की लड़ाई की 200वीं सालगिरह पर करीब तीन लाख लोग आए थे. हमने पुलिस की 6 कंपनियां तैनात की थी. कुछ लोगों ने माहौल बिगाड़ने के लिए हिंसा फैलाई. इस तरह की हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. हमने न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं. मृतक के परिवार वालों को 10 लाख के मुआवजा दिया जाएगा.”

लेकिन फडणवीस कैसे अपने ही लोगों पर कार्रवाई करेंगे ये देखने वाला होगा. खुद शरद पवार ने सीधे आरोप लगाया है कि आरएसएस के लोग वहां माहौल बिगाड़ने गए थे.दक्षिणपंथी अगर राजस्थान में मासूमों को मार रहे हैं. नोएडा में किसी इखलाक को मार देते हैं तो केरल में जाकर लगातार वामपंथियों से हिंसक कार्रवाइयोें में जुटे हैं.

आखिर क्या है भीमा कोरेगांव की लड़ाई

बता दें कि भीमा कोरेगांव की लड़ाई 1 जनवरी 1818 को पुणे स्थित कोरेगांव में भीमा नदी के पास उत्तर-पू्र्व में हुई थी. यह लड़ाई महार(दलित) और पेशवा सैनिकों के बीच लड़ी गई थी. अंग्रेजों की तरफ 500 लड़ाके, जिनमें 450 महार सैनिक थे और पेशवा बाजीराव द्वितीय के 28,000 पेशवा सैनिक थे, मात्र 500 महार सैनिकों ने पेशवा की शक्तिशाली 28 हजार मराठा फौज को हरा दिया था.

हर साल नए साल के मौके पर महाराष्ट्र और अन्य जगहों से हजारों की संख्या में पुणे के परने गांव में दलित पहुंचते हैं, यहीं वो जयस्तंभ स्थित है जिसे अंग्रेजों ने उन सैनिकों की याद में बनवाया था, जिन्होंने इस लड़ाई में अपनी जान गंवाई थी. कहा जाता है कि साल 1927 में डॉ. भीमराव अंबेडकर इस मेमोरियल पर पहुंचे थे, जिसके बाद से अंबेडकर में विश्वास रखने वाले इसे प्रेरणा स्त्रोत के तौर पर देखते हैं.

इस बार जब पता चला कि पेशवाओं की हार का जश्न मन रहा है तो हिंदूवादियों ने उसे अंग्रेज़ बनाम भारतीय पेशवा की शक्ल देने की कोशिश की. आरोप है कि उन्होंने वहां दलितों की गाड़ियों पर भगवा झंडे लगा दिए और भी दूसरी भड़काऊ कार्रवाइयां कीं. इससे वहां मौजूद लाखों दलित भड़क गए.

शरद पवार का सीधा हमला

एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने दक्षिणपंथी संगठनों की जिम्मेदार बताया है और आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है. पवार ने कहा कि भीमा-कोरेगांव की लड़ाई की 200वीं सालगिरह मनाई जा रही थी. हर साल यह दिन बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता रहा है. लेकिन इस बार कुछ दक्षिणपंथी संगठनों ने यहां की फिजा को बिगाड़ दिया.

कुछ बाहरी लोगों ने वधु गांव के लोगों भड़काया और यहां हिंसा फैल गई. आज तक भीमा-कोरेगांव के इतिहास में ऐसा नहीं हुआ. प्रशासन ने भी पर्याप्त तैयारियां नहीं की थी. उन्हें यह मालूम था कि 200वीं सालगिरह होने पर यहां हजारों लोग आयेंगे, लेकिन कोई तैयारी नहीं की गई. पवार ने शांति और सद्भाव रखने की अपील लोगों से की है.

वहीं, कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भीमा-कोरेगांव में हिंसा साजिश के तहत फैलाई गई. मुंबई कांग्रेस के डॉ. राजू वाघमारे ने कहा कि पहले से दलितों पर हमले करने की प्लानिंग थी. आरएसएस के कुछ लोग यहां हिंसा भड़काने के लिए लंबे समय से तैयार कर रहे थे.