चीफ जस्टिस के घर क्या करने गए थे मोदी के प्रधान सचिव? आखिर पक क्या रहा है

चीफ जस्टिस के घर क्या करने गए थे मोदी के प्रधान सचिव? आखिर पक क्या रहा है

सुप्रीम कोर्ट में जजों की बगावत का मामला मामूली नहीं है. इससे जुड़े कई पहलू इशारा कर रहे हैं कि इस मामले में कहीं न कहीं कुछ राजनैतिक पेंच भी है. चीफ जस्टिस दीपक मिश्र के साथ मोदी सरकार के संपर्क भी दिखाई दे रहे हैं. ये तब हो रहा है जब सरकार कल इसे सुप्रीम कोर्ट का अंदरूनी मामला कहकर हस्तक्षेप से इनकार कर चुकी है.

आजतक ने खबर दिखाई है कि मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा को शनिवार सुबह CJI  गए थे. वो बाहर कार में ही बैठे रहे और उनका एक सहायक CJI के कैंप ऑफिस गया और मिनटों में ही वापस आ गया, इसके बाद नृपेंद्र मिश्रा की कार वहां से रवाना हो गई. नृपेंद्र मिश्रा ने बताया कि ऑफिस जाते समय वे CJI आवास के गेट पर नए साल का ग्रीटिंग कार्ड देने के लिए रुके थे.

अचरज की बात ये है कि ऐसा कौनसा ग्रीटिंग था जो भारत के चीफ जस्टिस को सड़क पर बैठे बैठे पहुंचा दिया गया. उधऱ जस्टिस चेलमेश्वर के शनिवार को चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा से शनिवार को मुलाकात न करने की खबर है. जस्टिस चेलमेश्वर के ऑफिस के सूत्रों के मुताबिक शुक्रवार को जस्टिस चेलमेश्वर के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले बाकी के तीन जज दिल्ली से बाहर हैं, ऐसे में जस्टिस चेलमेश्वर सीजेआई से नहीं मिले.

उधर अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल लगातार कल से चीफ जस्टिस के संपर्क में हैं. अटॉर्नी जनरल कुछ और नहीं बल्कि भारत सरकार के सबसे बड़े वकील हैं. सुप्रीम कोर्ट के अंदरूनी मामलों में अटॉर्नी जनरल की सक्रियता भी ये बताने के लिए काफी है कि इस सरकारी वकील का संपर्क और संबंध कामकाजी रिश्तों से कुछ आगे जाकर भूमिका निभा रहा है.

इस बीच मामला खिंचता दिख रहा है क्योंकि आधार या बहाना जो भी कहें बागी जज चीफ जस्टिस से मिल ही नहीं रहे हैं. उधर बार एसोसिएशन ने आज शाम छह बजे बैठक बुलाई है. सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने कहा है कि देशवासियों में भ्रम जुडिशियरी के लिए ठीक नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों द्वारा बगावती तेवर अपनाए जाने और के बाद चीफ जस्टिस (सीजेआई) दीपक मिश्रा ने भी इस मामले में अपना पक्ष रखा, सूत्रों के अनुसार उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में सब जज बराबर हैं और स्वतंत्र माने जाते हैं. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में सभी केसों का सही बंटवारा होता है.

बता दें कि सवाल उठाने वाले सुप्रीम के चार जज, जस्टिस चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ ने इन्हीं दो बातों को प्रमुख रूप से अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठाया था.

आपको बता दें कि शुक्रवार सुबह देश में पहली बार न्यायपालिका में असाधारण स्थिति देखी गई. सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जजों ने मीडिया को संबोधित किया. चीफ जस्टिस के बाद दूसरे सबसे सीनियर जज जस्टिस चेलमेश्वर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कभी-कभी होता है कि देश में सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था भी बदलती है.

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का प्रशासन ठीक तरीके से काम नहीं कर रहा है, अगर ऐसा चलता रहा तो लोकतांत्रिक परिस्थिति ठीक नहीं रहेगी. उन्होंने कहा कि हमने इस मुद्दे पर चीफ जस्टिस से बात की, लेकिन उन्होंने हमारी बात नहीं सुनी.

 

चारों जजों ने कहा कि अगर हमने देश के सामने ये बातें नहीं रखी और हम नहीं बोले तो लोकतंत्र खत्म हो जाएगा. हमने चीफ जस्टिस से अनियमितताओं पर बात की. उन्होंने बताया कि चार महीने पहले हम सभी चार जजों ने चीफ जस्टिस को एक पत्र लिखा था, जो कि प्रशासन के बारे में थे, हमने कुछ मुद्दे उठाए थे. चीफ जस्टिस पर देश को फैसला करना चाहिए, हम बस देश का कर्ज अदा कर रहे हैं.

जजों ने कहा कि हम नहीं चाहते कि हम पर कोई आरोप लगाए. यह पहली बार है कि सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की हो. वहीं इस मामले में अटॉर्नी जनरल के.के वेणुगोपाल ने कहा कि शनिवार को सुप्रीम कोर्ट के जजों के बीच सारी तकरार खत्म हो जाएगी और सारे मामले सुलझा लिए जाएंगे.