2019 में डूब सकती है बीजेपी, शाह को आरएसएस ने दी जानकारी

2019 में डूब सकती है बीजेपी, शाह को आरएसएस ने दी जानकारी

नई दिल्ली : 2019 के चुनाव में बीजेपी की लुटिया डूब सकती है. आरएसएस ने इसके लिए अमित शाह को सख्त चेतावनी दी है. संघ ने साफ साफ वो मुद्दे गिनाए हैं जिनपर सरकार लापरवाही करती रही है. संघ ने कहा है कि बीजेपी के पास ये आखिरी मौका है अगर अब भी कोई बड़ा कदम नहीं उठाती तो उसे कोई नहीं बचा सकता.
टेलीग्राफ की खबर के मुताबिक संघ ने दो मुद्दों का हवाला देकर भय जताया है. संघ का कहना है कि बढ़ती बेरोजगारी और किसानों की समस्याएं अगले आम चुनाव में बीजेपी के लिए भारी पड़ सकती हैं. टेलीग्राफ की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय मंजदूर संघ से जुड़े आरएसएस के एक नेता ने कहा कि वे लोग किसानों द्वारा सामना की जाने वाली समस्याएं और नौकरी के मौकों की कमी को लेकर बीजेपी को बार बार चेतावनी दे रहे थे.
संघ नेता ने कहा, ‘अगर सरकार हमारी बात पर ध्यान देती तो बीजेपी का गुजरात में इस तरह का प्रदर्शन नहीं होता.’ बता दें कि बीजेपी ने गुजरात में भले ही सरकार बना ली हो लेकिन आम मजदूर और किसान ने उसका साथ नहीं दिया. गांवों में बीजेपी ओंधे मुंह गिरी. अब हालात ये हैं कि वहां के नतीजों से ना तो पार्टी संतुष्ट है और ना ही संघ. आरएसएस ने गुजरात से मिले अपने फीडबैक को पिछले शुक्रवार (28 दिसंबर) को बीजेपी के साथ साझा किया है. इस बैठक में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह भी मौजूद थे. संघ का मानना है कि नौकरी की कमी झेल रहा युवा सरकार से दुखी हो रहा है और ये मोहभंग होने वाली जैसी हालत है.
ये पहला मौका नहीं है जब संघ ने 2019 को लेकर बीजेपी को आगाह किया हो. इससे पहले संघ के अंदरूनी सर्वे में भी पार्टी के लिए खतरा साफतौर पर सामने आया था.
आरएसएस की आर्थिक शाखा स्वदेशी जागरण मंच के एक नेता ने कहा कि गलत आर्थिक नीतियां किसानों और युवाओं की मुश्किलों का सबब बनती जा रही है. स्वदेशी जागरण मंच ने इस बावत सरकार को कुछ सुझाव दिये हैं. इस नेता के मुताबिक अगर वक्त पर कदम नहीं उठाये गये तो हालात नियंत्रण से बाहर जा सकते हैं.
हालांकि स्वदेशी जागरण मंच ने इस जीएसटी में किये गये बदलावों पर संतोष जताया है, और इसे सकारात्मक कदम कहा है. सूत्रों के मुताबिक आरएसएस ने संघ को भरोसा दिया है उनके सुझावों पर अमल किया जाएगा और किसानों और नौकरी के मुद्दे पर सरकार लोगों को निराश नहीं होने देगी.