जानिए कितनी पुरानी है तुलसी पूजन दिवस की परंपरा, कहां से हुई शुरुआत

जानिए कितनी पुरानी है तुलसी पूजन दिवस की परंपरा, कहां से हुई शुरुआत

नई दिल्ली :  आज क्रिसमस पर आपको कई संदेश मिले होंगे जिनमें तुलसी पूजन दिवस की शुभकामनाएं दी गईं. कई लोगों ने क्रिसमस को विदेशी बताकर हिंदू धर्म को बचाने का उपाय बताया तुलसी पूजन दिवस को . लेकिन अंध भक्त इसे ही कहते हैं. जिस तुलसी पूजन को मनाने की ये अपील की जा रही थी वो किसी और ने नही हत्या और बलात्कार के आरोप में जेल में बंद आसाराम बापू ने ईजाद किया था.

दरअसल तुलसी पूजन दिवस की शुरुआत साल 2014 में धर्मगुरू आसाराम ने की थी. आसाराम की संस्था की वेबसाइट आश्रम डॉट ओआरजी पर बताया गया है, “25 दिसम्बर से 1 जनवरी के दौरान शराब आदि नशीले पदार्थों का सेवन, आत्महत्या जैसी घटनाएँ, युवाधन की तबाही एवं अवांछनीय कृत्य खूब होते हैं.

इसलिए प्राणिमात्र का मंगल एवं भला चाहने और करने वाले पूज्य बापूजी ने वर्ष 2014 में आह्वान किया था कि 25 दिसंबर से एक जनवरी तक तुलसी-पूजन, जप-माला पूजन, गौ-पूजन, हवन, गौ-गीता-गंगा जागृति यात्रा, सत्संग आदि कार्यक्रम आयोजित हों.”

भारत के संस्कृति मंत्री महेश चंद्र शर्मा ने ट्वीट किया, “तुलसी के महत्व का वर्णन हमारे शास्त्रों में भी है और विज्ञान में भी. स्कंद पुराण में कहा गया है कि जिस घर में तुलसी का बगीचा होता है एवं पूजन होता है उसमें यमदूत प्रवेश नहीं करते.”

केंद्रीय राज्य मंत्री गिरीराज सिंह ने फ़ेसबुक पर लिखा, “आप सभी को तुलसी पूजा की बधाई. तुलसी का पौधा एक अभियान के तहत हर घर में लगाएँ.”

तुलसी पूजन दिवस सोमवार को ट्विटर के ट्रेंड्स में भी शामिल रहा और कट्टर हिेंदुत्व की बात करने वाले कई लोगों ने इस बारे में फ़ेसबुक पर भी पोस्ट किए हैं.

एक महिला ने ट्विटर पर लिखा-“मैं हिंदू हूं ईसाई नहीं जो में क्रिसमस मनाऊं..ये देश सैंटा का नहीं है ये देश संतों का है, ऋषि मुनियों का है. यहां कोई सैंटा नहीं आएगा, यहां तो विवेकानंद, दयानंद, दधीचि, शंकराचार्य आएंगे. यहां कोई जीसस नहीं आएगा बल्कि यहां राम, कृष्ण, माँ भवानी आएंगी.”

हाल के दिनों में भारत में क्रिसमस पर्व का विरोध बढ़ा है. उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में एक हिंदूवादी समूह ने पत्र जारी कर स्कूलों को क्रिसमस न मनाने की धमकी दी है.