स्मृति ईरानी को गुजरात का सीएम बनाने की तैयारी, लेकिन रास्ते में है एक अड़चन

स्मृति ईरानी को गुजरात का सीएम बनाने की तैयारी, लेकिन रास्ते में है एक अड़चन

नई दिल्ली : हो सकता है नयी सरकार में गुजरात में नया शख्स सीएम बने. पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि विजय रूपाणी कोई करिश्माई छाप नहीं छोड़ सके न ही उन्होंने ऐसी कोई उपलब्धियां हासिल कीं जिनके बूते पार्टी वोट मांग सके. पार्टी नेतृत्व का मानना है कि विजय रूपानी की भूमिका काफी ढीले प्रशासक की रही. अगर मोदी का जादू न होता तो ये सीट हासिल करना भी मुश्किल होता.

पार्टी का मानना है कि विजय रुपाणी की रबर स्टांप सीएम की इमेज के कारण पार्टी को नुकसान हुआ. वरना पार्टी सवा सौ से ज्यादा सीट जीतने की हालत में होती. लोगों का मानना है कि इस बार गुजरात में ऐसा सीएम बनाया जाए जिसका काम दिखाई दे. विधानसभा मे भी इस बार विपक्ष बेहद मजबूत हालत में है. अल्पेश ठाकुर और जिग्नेश मेवाणी जहां सदन में होंगे वहीं कांग्रेस भी मजबूत संख्या के साथ सदन में होगी इतना ही नहीं राज्य में पाटीदार आंदोलन भी अब ज्यादा दम से खड़ा होने की चर्चा है. ऐसे में बीजेपी को तेज़ तर्रार सीएम की ज़रूरत हैं.

ऐसे में सबसे ज्यादा फिट नाम अगर कोई है तो वो स्मृति इरानी हैं. सूत्रों के मुताबिक इरानी की लीडरशिप क्वालिटी के चलते बीजेपी के लिए वह सीएम पद की सबसे पहली पसंद हैं. लेकिन उनके बाहरी उम्मीदवार होने को लेकर थोड़ा हिचकिचाहच है. यही वजह है कि इरानी ने भी इस खबर से इनकार करते हुए कहा है कि वह सीएम पद की उम्मीदवार नहीं हैं.

इसके अलावा केन्द्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग राज्य मंत्री और मनसुख एल मंदाविया भी इस पद के लिए बीजेपी की दूसरी पसंद हैं. मंदाविया सौराष्ट्र के पाटीदार समुदाय से आते हैं और वह ऐसे नेता हैं जो किसानों के काफी करीब हैं. इनके अलावा गुजरात सीएम पद के लिए बीजेपी की तीसरी पसंद कर्नाटक के वर्तमान गवर्नर और गुजरात विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष वजूभाई वाला हैं. गुजरात कैबिनेट में वाला पहले भी वित्त, श्रम और रोजगार जैसे विभागों को संभाल चुके हैं.

बीजेपी आलाकमान को ऐसे में एक सख्त प्रशासक की जरूरत महसूस होने लगी है. दरअसल, बीजेपी नेतृत्व को गुजरात की कमान किसी मंझे नेता के हाथ में देने की जरूरत महसूस हो रही है. जैन बिरादरी के विजय रुपाणी अपने कार्यकाल के दौरान दलित, ओबीसी और पाटीदार आंदोलन को संभालने में नाकाम साबित हुए हैं. फिर जैन बिरादरी की आबादी राज्य में बेहद कम है. ऐसे में राज्य बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष और पाटीदार समुदाय के पुरुषोत्तम रुपाला को कमान दिए जाने की चर्चा ज्यादा है.

केंद्रीय मंत्रिमंडल में गुजरात से मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का तुरुप का इक्का माना जाता  है. पाटीदार आंदोलन में पुरुषोत्तम रूपाला सरकार की तरफ से सीधी टक्कर दे रहे थे. रुपाला कडवा पाटीदार समुदाय से आते हैं तथा गुजरात के कददावर नेता माने जाते हैं. हालांकि पार्टी सूत्रों का कहना है कि हो सकता है कि यह फैसला बाद में लिया जाए, क्योंकि इसके लिए अब नेतृत्व के पास बहुत समय है. मगर यह निश्चित है कि अगर विजय रुपाणी की दोबारा ताजपोशी हुई भी तो कार्यकाल बेहद छोटा होगा.