18 भाषाओं में गाना गाते थे मोहम्मद रफी, लता ने कर दिया था जीना मुश्किल

18 भाषाओं में गाना गाते थे मोहम्मद रफी, लता ने कर दिया था जीना मुश्किल

नई दिल्ली : आज हिंदी सिनेमा के सुरों के बेताज बादशाह मोहम्मनद रफी का जन्मदिन है. आज भी रफी साहब के गाने काफी लोकप्रिय हैं. एक ऐसा फनकार जिसे आज भी लोग उनके गानों के माध्यम से याद करते हैं. सर्च इंजन गूगल ने भी रफी साहब पर डूडल बनाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी है.
हिंदी के अलावा असामी, कोंकणी, भोजपुरी, ओड़िया, पंजाबी, बंगाली, मराठी, सिंधी, कन्नड़, गुजराती, तेलुगू, माघी, मैथिली, उर्दू, के साथ साथ इंग्लिश, फारसी, अरबी और डच भाषाओं में भी मोहम्मद रफी ने गीत गाए हैं.

लता मंगेशकर उन लोगों में से थीं जिन्होंने अपनी तुनक मिजाजी के कारण रफी को एक बक्त दाने दाने का मोहताज बना दिया. लता के बगैर किसी म्यूजिक डायरेक्टर का गुजारा नहीं होता था. लता इसका फायदा उठाया करती थीं कभी कभी उनका गुस्सा इतना पर्सनल है जाता था. ऐसा ही कुछ हुआ जब मोहम्मद रफी से नाराज होने के कारण दोनों ने तीन साल तक साथ काम नहीं किया. इस बीच मोहम्मद रफी के लिए गुजारा मुश्किल हो गया. उन्होंने गायन के अलावा भी कई काम किए जिनका जिक्र अलग अलग जगह मिलता है.

दरअसल हुआ यूं कि एक बार लताजी ने मांग उठाई कि जब फिल्म सुपरहिट हो जाती है, तो फिल्मों के अलावा भी कई तरह से म्यूजिशियंस गानों से पैसा कमाते हैं, ऐसे में रॉयलिटी में गायकों का हिस्सा भी बनता है. उनको लगता था कि मोहम्मद रफी भी उनकी बात का सपोर्ट करेंगे ही. बस यहीं बात बिगड़ गई क्योंकि रफी ने कह दिया कि जब गायक फिल्मों के फ्लॉप होने पर घाटा शेयर नहीं करते तो सुपरहिट होने पर ज्यादा पैसे कैसे मांग लें, एक बार गाने की फीस लेने के बाद दोबारा मांगना मुझे ठीक नहीं लगता. दोनों के रिश्तों में दरार आ गई जो तस्वीर तेरी दिल में… गाने की रिकॉर्डिंग के दौरान एक स्टांजा पर मतभेद के चलते गहरा गई.इसके बाद दोनों ने साथ में गाना बंद कर दिया. हालांकि लोगों ने तब लताजी को सपोर्ट किया था, क्योंकि लताजी ने बाकी गायकों के मन की बात कह दी थी.

इधर दोनों के बीच फिर एक विवाद आया जब रफी ने गिनीज बुक को लैटर लिखकर सबसे ज्यादा गाने के लता के रिकॉर्ड पर सवाल उठाए. उन्होंने दावा किया कि लता से ज्यादा गाने तो मैंने गाए हैं. गिनीज ने बाद में ये रिकॉर्ड कैटगरी ही डिलीट कर दी.

हालांकि संगीतकार जयकिशन ने दोनों को समझाया और दोनों साथ काम करने को राजी हो गए. कहानी में मोड़ पचास साल बाद तब आया जब लताजी ने एक इंटरव्यू में कहा कि रफी ने लिखित में भी खेद जताया था, तब वो साथ काम करने को राजी हुई थीं. इससे रफी के बेटे शाहिद रफी भड़क गए और एक 2012 में एक फ्रेस कॉन्फ्रेंस बुला डाली और उन्होंने लता मंगेशकर को खुला चैलेंज कर दिया और कहा कि मेरे फादर ने अगर कोई ऐसा लैटर लिखा है तो लताजी मुझे दिखाएं, उनसे मैं माफी मांग लूंगा.

लेकिन लता ने विवाद भड़कता देखकर शांत रहना ही बेहतर समझा. वैसे भी रफी से उनके रिश्ते पहले ही सुधर चुके थे, इसलिए वो रफी की गैरमौजूदगी में उनके बच्चों के साथ विवाद नहीं करना चाहती थीं. ऐसे बात आई गई हो गई.