बीजेपी में झगड़े के बीच हार्दिक का नितिन पटेल को ऑफर, 10 विधायक लाओ सरकार गिराओ

बीजेपी में झगड़े के बीच हार्दिक का नितिन पटेल को ऑफर, 10 विधायक लाओ सरकार गिराओ

नई दिल्ली :  गुजरात का चुनाव निपट गया लेकिन पाटीदार नेता हार्दिक पटेल बम पर बम फोड़ रहे हैं. अब जो बयान हार्दिक ने दिया है वो बीजेपी के कांग्रेस मुक्त भारत के अभियान को उल्टी दिशा में चला देगा. हार्दिक ने ऑफर दिया है कि नाराज़ उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल 10 विधायक लेकर बीजेपी से अलग हो जाएं तो वो उन्हें पद और सम्मान दिला देंगे. अभी गुजरात में बीजेपी की 99 सीट हैं  और 182 सीटों वाली विधानसभा में दस विधायक कम होने का मतलब है बीजेपी का अल्पमत में आ जाना. हालांकि ये इतना आसान नहीं होगा क्योंकि दल बदल विरोधी कानून आड़े आ जाएगा लेकिन संभावनाएं अनंत हैं.

दर असल मुख्यमंत्री विजय रूपाणी और उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल के बीच अनबन की खबरों के बाद पाटीदार नेता हार्दिक पटेल ने नितिन पटेल को अपने साथ शामिल होने का न्योता दिया है. हार्दिक ने कहा है कि अगर बीजेपी में नितिन पटेल का सम्मान नहीं हो रहा है, तो वे कांग्रेस ज्वाइन कर सकते हैं.

सूत्र बताते हैं कि सरकार में अनबन की एक और खबर है. वडोदरा से विधायक और पूर्व मंत्री राजेंद्र त्रिवेदी ने भी विरोध का झंडा बुलंद कर रखा है. उन्होंने मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के सामने वडोदरा से एक भी विधायक को कैबिनेट में शामिल नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई. उन्होंने 10 विधायकों के साथ पार्टी छोड़ने की धमकी भी दी है.

पाटीदार नेता ने कहा है कि वे नितिन पटेल के लिए कांग्रेस पार्टी से बात करेंगे ताकि उन्हें सही जगह मिले और उनके साख पर कोई सवाल ना उठे. हार्दिक ने बताया, ‘अगर नितिन भाई 10 विधायकों के संग बीजेपी छोड़ने को तैयार हो जाते हैं, तो हम कांग्रेस में उन्हें उपयुक्त पद देने की बात करेंगे. हार्दिक ने ये बातें बोटाड में पाटीदार अनामत आंदोलन समिति की बैठक से पहले कहीं. इस बैठक समिति की कार्यप्रणाली और भविष्य के कार्यों पर चर्चा की गई.

विभागों के बंटवारे पर अनबन

बता दें कि गुजरात में सरकार बनने के महज तीन दिन बाद ही मुख्यमंत्री विजय रूपाणी और उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल के बीच अनबन की खबर आने लगी. साथ ही वहां के विधायक भी अपनी नाराजगी जताने लगे हैं. लगातार छठी बार गुजरात में सरकार बनाने वाली भारतीय जनता पार्टी की इस सरकार में शीर्ष दो नेताओं के बीच अनबन का सबसे अहम कारण विभागों के बंटवारे को लेकर माना जा रहा है.

उपमुख्यमंत्री पटेल विभागों के वितरण से खुश नहीं हैं. वह गृह और शहरी विकास मंत्रालय चाहते थे, जो उन्हें नहीं मिला. साथ ही उनको 2 अहम विभाग राजस्व और वित्त विभाग भी नहीं दिए गए. विभागों के वितरण के मामले में माना जा रहा है कि सबसे ज्यादा घाटा पटेल को ही हुआ है. पटेल को सड़क एवं भवन, हेल्थ एवं फैमिली, नर्मदा, कल्पसार, चिकित्सा और शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी मिली है.