नोटबंदी की सालगिरह पर हो सकता है ये एलान, नोटबंदी को सही ठहराने की नयी कोशिश

नई दिल्ली: नोटबंदी को सही ठहराने की राजनीतिक कोशिश में मोदी सरकार और भी सख्त कदम उठा सकती है. हो सकता है नोटबंदी को सही साबित करने के लिए सरकार एक और सख्त कदम उठा ले. सरकारी गलियारों में खबर है कि इस बारे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 8 नवंबर को रोडमैप पेश कर सकते हैं. इस बारे में हाई लेवल पर मीटिंगों का दौर जारी है.

10 नवंबर को पहले ही सभी केंद्रीय मंत्रियों की मीटिंग बुलाई गई है जिसमें करप्शन के खिलाफ अगली जंग के बारे में डिटेल प्लान पेश किया जाएगा. मालूम हो कि विपक्ष की आलोचना को दरिकनार करते हुए पीएम मोदी की अगुआई में केंद्र सरकार ने नोटबंदी के एक साल पूरा होने पर 8 नवंबर को ‘ऐंटी ब्लैक मनी डे’ मनाने का फैसला लिया है. विपक्ष ने इस दिन पूरे देश में विरोध दिवस बनाने का ऐलान किया.

सूत्रों के अनुसार पीएम मोदी ने नोटबंदी के बाद अपना अगला टारगेट बेनामी संपत्ति को बनाया है और इसके खिलाफ बड़े पैमाने पर पूरे देश में अभियान चलाया जाएगा. दरअसल नोटबंदी के एक साल बाद सरकार करप्शन के खिलाफ जंग को जारी रखने का मजबूत संकेत देना चाहती है. सूत्रों के अनुसार प्रस्तावित अभियान में अगर मालिकाना हक के कानूनी सबूत नहीं मिले तो बेनामी संपत्तियों को सरकार अपने कब्जे में ले सकती है.

इन बेनामी संपत्तियों को भी गरीबों के लिए किसी योजना से जोड़ा जाएगा जैसे ब्लैक मनी के लिए दोबारा लाई डिस्कलोजर स्कीम के तहत राशि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना में डाली गई थी. सरकार को उम्मीद है कि बेनामी संपत्ति के खिलाफ प्रस्तावित अभियान में कई बड़े सफेदपोश नेताओं पर गाज भी गिर सकती है.

मोदी सरकार 2019 के आम चुनाव तक इस मुद्दे को जिंदा रखना चाहती है और करप्शन के मुद्दे पर ही वह चुनाव लड़ने की रणनीति बना चुकी है. सरकार का मानना है कि एक साल बाद जब नोटबंदी के बाद हालात सुधर चुके हैं तो दूसरा अभियान शुरू होने से इसका सकारात्मक संदेश खासकर गरीबों के बीच जा सकता है कि काला धन रखने वाले अमीरों के खिलाफ सख्त अभियान जारी है. इसके अलावा करप्शन को रोकने के लिए बने इस लंबित बिल या पहल पर पीएम नरेन्द्र मोदी ठोस और निर्णायक कदम उठा सकते हैं.

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