पूंजीवादी सुधारों की तरफ बढ़ रही है मोदी सरकार, मूडीज ने रेटिंग बढ़ा दी

पूंजीवादी सुधारों की तरफ बढ़ रही है मोदी सरकार, मूडीज ने रेटिंग बढ़ा दी

नई दिल्ली:जानी मानी रेटिंग एजेंसी अमेरिका की मूडीज इनवेस्टर सर्विसेज ने भारत की सोवरिन रेटिंग ‘बीएए3’ से सुधारकर ‘बीएए2’ कर दी है. साथ ही नजरिया सकारत्मक से स्थिर कर दिया गया है. ध्यान रहे कि अभी तक तमाम रेटिगं एजेंसियों ने भारत की रेटिंग सुरक्षित निवेश के लिहाज से बिल्कुल ही निचले पायदान पर रखा था.

मोदी सरकार सत्ता में आने के बाद लगातार कोशिश में लगी थी कि किस तरह से रेटिंग में सुधार हो और अब उसके नतीजे सामने आए हैं. रेटिंग में सुधार 13 सालों बाद हुआ है जबकि नजरिये में पहली बार बदलाव 2015 में हुआ था जब इसे नकारात्मक से सकारात्मक किया गया जबकि अब इसे स्थिर कर दिया गया है.

कैसे बेहतर रेटिंग का खुला रास्ता?

मूडीज की राय में कई महत्वपूर्ण आर्थिक सुधार अभी भी डिजाइन के स्तर पर ही है, फिर भी वो ये मानती है कि अब तक जिन सुधारों पर अमल हुआ है है उससे सरकार को कारोबारी माहौल सुगम बनाने, उत्पादकता बढ़ाना, देसी-विदेशी निवेश बढ़ाने और विकास दर में मजबूती व स्थिरता के लक्ष्य को समय से पहले हासिल करने में मदद मदद मिलेगी. चूंकि यहां विकास की संभावनाएं काफी मजबूत है, ऐसे मे सुधारों से विभिन्न घटनाक्रम के झटकों से मजबूती से निबटने में मदद मिलेगी.

एजेंसी ने विभिन्न सुधार कार्यक्रमों में जीएसटी और नोटबंदी के साथ, मौद्रिक नीति की नयी रुपरेखा, बैंकों के फंसे कर्ज से निबटने की रणनीति, आधार और जरुरतमंदों को सीधे सरकारी योजनाओं का फायदा यानी डीबीटी का खास तौर पर जिक्र किया है. एजेंसी मानती है कि जीएसटी की वजह से राज्यो के बीच व्यापार की बाधाएं खत्म होंगी जिससे उत्पादकता को बढ़ावा मिलेगा. दूसरी ओर भूमि और श्रम के क्षएत्र में सुधार भले ही परवान नहीं चढ़ पाए हों, लेकिन इनका अफना ही महत्व है.

विकास दर

मूडीज मानती है कि ज्यादात्तर सुधारों का असर देखने में थोड़ा समय लगेगा. नोटबंदी औऱ जीएसटी सुधारों ने थोड़े समय के लिए विकास दर पर असर भी डाला है. कुछ इसी वजह से मूडीज का आंकलन है कि 31 मार्च 2018 को खत्म होन वाले वित्त वर्ष 2017-18 में विकास दर 6.7 फीसदी रह सकती है. लेकिन जैसे-जैसे नये सुधार कार्यक्रमों की शुरुआती दिक्कतें दूर होंगी, उसका असर विकास दर पर देखने को मिलेगा.

छोटे औऱ मझौले उद्योगों के लिए सरकारी मदद और निर्यातकों के लिए जीएसटी के तहत मिलने वाली सुविधाएं भी इसमें मदद करेगी. इन्ही सब की बदौलत 2018-19 में विकास दर 7.5 फीसदी रह सकती है. आगे इसमें और भी तेजी की उम्मीद है. एजेंसी की राय में भारत की विकास संभावनाएं ‘बीएए2’ रेटिंग वाले कई देशें से बेहतर है.

 

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा.