राफिया नाज़ के मामले पर झूठ और अफवाह की राजनीति, जो हुआ ही नहीं उस पर बवाल हो गया

राफिया नाज़ के मामले पर झूठ और अफवाह की राजनीति, जो हुआ ही नहीं उस पर बवाल हो गया

रांची : चुनाव के वक्त राजनीति की गंदगी ऐसे मुसीबत खड़ी करती है . ताज़ा विवाद रांची की राफिया नाज का है, राफिया नाज़ योग सिखाती हैं.  कल ऐसी खबर आयी कि राफिया नाज के घर पर पत्थरबाजी हुई,  मामला ज्यादा ना बिगड़ जाये इसलिए समेत सभी आला अफसर राफिया के घर पहुंचे लेकिन  वहां सबकुछ शांत था. इस दौरान राफिया और उसके पिता ने पुलिस अफसरों को बताया कि हाल के दिनों में ऐसा कहीं कुछ नहीं हुआ. बेवजह कुछ लोगों ने मामले को सनसनीखेज बनाने का काम किया, जिसका मैसेज खराब गया. मामले की जानकारी लेने के बाद डीजीपी, आइजी और एसएसपी रात सवा नौ बजे चले गये. इसके बाद सिटी एसपी मौके पर मौजूद रहे.

इस बीच नफरत की राजनीति करने वाले देश भर में माहौल बिगाड़ चुके थे. चैनलों पर बहस भी शुरू हो गई थी. देश भर में मुसलमानों को कट्टर घोषित कर दिया गया. लेकिन रांची में माहौल कुछ और ही था. धर्मगुरु और एदारा ए शरिया के कुतुबुद्दीन ने कहा मैंने राफिया का बयान पढ़ा और सुना भी जिसमें उसने यह बताया कि जब वह योग सिखाने के लिए जाती थी, तो उससे यह कहा जाता था कि वह अपना नाम बदल ले. नाम बदलने का आशय सीधे-सीधे धर्म बदलने से है, मैं इस बात की पुरजोर निंदा करता हूं यह बात बहुत ही गलत है. हम सब

राफिया के साथ हैं और उसका समर्थन करते हैं. रांची में किसी भी धार्मिक संगठन ने उसका विरोध नहीं किया है.  जहां तक बात उसके घर पर पत्थरबाजी की है, तो मेरा यह कहना है कि यह पुलिस काम है, उसे यह पता करना चाहिए कि अगर हमला हुआ है तो किसने किया है और उसे सजा मिलनी चाहिए. साथ ही यह भी देखा जाना चाहिए कि अगर हमला नहीं हुआ है तो झूठी खबर फैलाने वालों पर भी कार्रवाई हो.

उन्होंने कहा कि सारे मुसलमान राफिया के साथ हैं और हमें उससे कोई परेशानी नहीं है. राफिया को अपनी जिंदगी जीने का पूरा है और मुस्लिम समाज को उससे कोई दिक्कत नहीं है. कुतुबुद्दीन ने जोर देकर यह बात कही कि राफिया के खिलाफ कोई फतवा जारी नहीं किया गया है, यह बिलकुल गलत बात है.

उन्होंने कहा कि राफिया की आड़ में जिस तरह से दो धर्मों के बीच नफरत की सियासत हो रही है वह बहुत ही गलत है और दुखद भी. उन्होंने कहा कि रांची में राफिया का कोई विरोध नहीं हो रहा है, यह बात दीगर है कि दिल्ली और हैदराबाद के कुछ मौलानाओं ने उसका विरोध किया है.

राफिया ने यह भी बताया था कि उसे अपने शहर में कोई दिक्कत नहीं है, सारे धर्म गुरु उसके समर्थन में हैं. कई धर्मगुरु तो उसे शेरे-ए-हिंद कहकर पुकारते हैं.

अब बताते हैं कि धर्म की आग में रोटियां सेंकने वाले हिंदू सांप्रदायिक संगठनों से वजीफा लेकर तनाव फैलाने वालों की बातें. कल एक टीवी चैनल पर लाइव शो में एक मौलाना नदीमुद्दीन नाम के एक शख्स ने राफिया के खिलाफ अपशब्द का भी प्रयोग किया. उन्होंने यहां तक कह दिया कि तुम्हारे जनाजे की नमाज कोई मुसलमान नहीं पढ़ेगा.

वही राफिया ने मौलाना से सवाल किया कि वह बतायें कि क्या इस्लाम में योग हराम है? क्या एक मुसलमान को योग नहीं करना चाहिए. उनके इस सवाल पर मौलना चुप हो गये और कहा कि योग करने की इस्लाम में मनाही नहीं है, लेकिन एक औरत मर्दों को योग की ट्रेनिंग दे, यह इस्लाम के खिलाफ है.

गौरतलब है कि राफिया नाज रांची के मारवाड़ी कॉलेज में एमकॉम की छात्रा हैं और उन्हें योग में महारत हासिल है. राफिया 20 वर्ष की हैं और जब वह चार साल की थीं तभी से योग कर रही हैं. उन्हें अबतक योग के क्षेत्र में 50 से अधिक पुरस्कार मिल चुके हैं. उन्होंने बाबा रामदेव के मंच से भी अपने योग का हुनर दिखाया है और उन्हें वाहवाही भी खूब मिली है. राफिया रांची के डोरंडा इलाके के रहमत कॉलोनी में रहती हैं और लोगों को योग सिखाती हैं.

राफिया नाज एक तेज तर्रार युवा हैं, वह आजसू पार्टी की टिकट पर दिसंबर 2016 में मारवाड़ी कॉलेज में महासचिव के तौर पर चुनी गयी थी. बाद में पार्टी ने उसे स्टूडेंट यूनियन का स्टेट सेक्रेटरी बना दिया. पिछले दिनों राफिया ने मारवाड़ी कॉलेज के पास लड़कियों के साथ होने वाली छेड़खानी के खिलाफ भी आवाज उठाई थी. राफिया रांची के एसएस डोरंडा स्कूल की छात्रा रही हैं और उन्होंने सुशांत भट्टाचार्य से योग की शिक्षा ली है.