पद्मिनी : दंगे कराने के लिए किले की दीवार पर केतन को मार कर लटका दिया? आजतक की पड़ताल

पद्मिनी : दंगे कराने के लिए किले की दीवार पर केतन को मार कर लटका दिया? आजतक की पड़ताल

नई दिल्ली :  राजनीति इतनी गंदी और घिनौनी हो जाएगी कोई सोच भी नहीं सकता था. अब तक वोटों के लिए दंगे तो करवाए जाते थे. लोगों की जानें भी उनमें जाती थीं. दंगे करवाने के लिए जानवरों की लाशें इस्तेमाल की जाती थीं लेकिन पहलीबार राजनीति और गिर गई. गुजरात चुनाव से पहले शुरू हुई पद्मावती की राजनीति में इस बार आदमी की लाश का इस्तेमाल हुआ है. अपराधी सोच के किसी घटिया शख्स ने जयपुर के नाहरगढ़ किले की दीवार पर शुक्रवार सुबह 40 वर्षीय चेतन कुमार सैनी को मारकर लटका दिया.

शुरुआत में किले की दीवार पर कोयले से लिखी बातों को दिखाकर मीडिया ने यही खबर बताई कि चेतन ने आत्महत्या की है, लेकिन जिस जगह लाश मिली वहां किले की चट्टानों-पत्थरों पर कुछ ऐसी भड़काऊ बातें लिखी हुई हैं. जो इस ओर इशारा करती हैं कि ये सुसाइड नहीं बल्कि मर्डर था.

आजतक की पड़ताल के मुताबिक मामला कुछ और नजर आ रहा है. किले की चट्टानों पर लिखी बातें फिल्म के नहीं, बल्कि फिल्म का विरोध कर रहे लोगों के खिलाफ थीं.

मीडिया ने भी उस बात को हाईलाइट किया जिसमें किले की एक चट्टान पर लिखा पाया गया कि, “हम सिर्फ पुतले नहीं लटकाते पद्मावती”. इस लिखावट से पहले यह संदेश गया कि चेतन ने सुसाइड की है.

लेकिन किले की चट्टान पर लिखी ये बात अधूरी थी. इसके अलावा 10 और भी चट्टानों पर इसी तरह की बातें लिखी पाई गईं.

एक चट्टान पर पद्मावती फिल्म का विरोध पर रहे लोगों पर तंज कसते हुए लिखा है कि, “पद्मावती का विरोध करने वालो, हम किले से सिर्फ पुतले नहीं लटकाते” ये साफ-साफ उन लोगों पर तंज था जो फिल्म के विरोध में पुतले जला रहे हैं, खासकर श्री राजपूत करणी सेना.

“दो जगहों पर चेतन तांत्रिक लिखा हुआ है. एक जगह पर तांत्रिक तो एक जगह पर चेतन तांत्रिक मारा गया”. साफ है कि जिन्होंने चेतन को मारकर लटकाया, वो नहीं चाहते थे कि ये मामला सुसाइड का लगे.

पर रुकिए. अगली चट्टान पर लिखी इबारत इस बात को साफ कर देती थी कि मामला सांप्रदायिकता के लिए जान ले लेने का लगता है. इस चट्टान पर इस हत्या को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की गई है. जिसमें लिखी बातों से ऐसा लगे कि ये बातें किसी मुसलमान ने लिखी हैं.

चट्टान पर हिंदी में कोयले से लिखा है कि, “हर काफिर का यही हाल होगा. जो काफिर को मारेगा, अल्लाह को प्यारा होगा.” “हम पुतले नहीं लटकाते/अल्लाह के बंदे.”

 

इसके अलावा चट्टानों पर तीन ऐसे मैसेज लिखे हैं जिनमें काफिर शब्द आता है. दो में अल्लाह लिखा हुआ है लेकिन इनमें अल्लाह की जगह अल्ला लिखा गया है याना ह अक्षर गायब है. ये गलती कोई मुसलमान नहीं कर सकता. सारे मैसेज पर पढ़कर यही नतीजा निकलता है कि ये आत्महत्या का नहीं बल्कि हत्या का मामला है, हत्या के पीछे भी एक सोची समझी साजिश थी ताकि मुद्दे को हिंदू बनाम मुसलमान बनाया जा सके और फसाद कराया जा सके.

ये भारत के इतिहास का सबसे घिनौना मामला है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर भी सरकार ढुलमुल रवैया अपनाती है तो फिर जनता को ही कुछ करना पड़ेगा.

 

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