गर्दन काटने पर फतवा देना माफ, लेकिन फोटो शेयर करने पर गिरफ्तारी, इनका कानून अंधा नहीं है

गर्दन काटने पर फतवा देना माफ, लेकिन फोटो शेयर करने पर गिरफ्तारी, इनका कानून अंधा नहीं है

नई दिल्ली: इस देश में कई कानून हैं. नेताओं और गुंडों के लिए अलग आम और भोले भाले लोगों के लिए अलग. एक कानून में वही गुनाह माफ है और दूसरे कानून में उसी गुनाह पर सख्त और त्वरित सज़ा. हाल ही में एक 19 साल के गरीब बच्चे को गिरफ्तार किय गया है जिसने वाट्सएप पर मोदी की फोटोशॉप की गई तस्वीर शेयर की थी. ये बच्चा बेहद गरीब परिवार का है और उसने स्मार्ट फोन घरवालों से ज़िद करके खरीदा था. 19 साल के बच्चे ने जिद में 6 दिन तक खाना नहीं खाया और माता पिता को हार मानकर स्मार्टफोन दिलाना पड़ा. इसी स्मार्टफोन से बच्चे को जेल जाना पड़ा.

खबर में आगे बढ़ने से पहले बता दें. कि नेशनल टीवी पर कुछ लोगों ने फिल्म निर्माता संजय लीला भंसाली की गर्दन काटने के लिए इनाम का एलान किया लेकिन पुलिस ने कुछ नहीं किया. फिल्म हीरोइन की नाक काटने पर इनाम रखा गया लेकिन पुलिस चुप रही. और तो और खुद बीजेपी के नेता ने गर्दन काटने के इनाम को सही ठहरा दिया लेकिन पुलिस फिर भी कुछ नहीं बोली.

अब फिर बच्चे की कहानी पर आतेहैं इस बच्चे के पिता के पास इतने पैसे नहीं है कि वो उसकी जमानत करा सके. सहारनपुर के खेरा मेवात के रहने वाले इस बच्चे के घर से जेल की दूरी 270 किलोमीटर है. पिता के पास जमानत तो दूर बेटे से मिलने जाने के लिए भी पैसे नहीं होते. सहारनपुर का बच्चा हिसार की जेल में बंद है. सहारन पुर के इस बच्चे ने जो वाट्सएप फोटो शेयर की थी वो फतेहाबाद के बीजेपी के एक कार्यकर्ता के हाथ लग गई. बस फिर क्या था. हरियाणा पुलिस आकाओं को खुश करने में लग गई और 18 नवंबर को शाकिब नाम के इस बच्चे को टोहाना से गिरफ्तार कर लिया गया. इस पार्टी ने खुद कितनी फोटोशॉप और दूसरी आपत्तिजनक तस्वीरें शेयर की हैं किसी से छिपा नहीं है.

टोहाना पुलिस की टीम ने शाकिब को उत्तराखंड के शाहपुर-कल्याणपुर गांव से गिरफ्तार किया था. यहां वह टेलर का काम करता था. ज़िंदगी की शुरुआत कर रहा था.  अब शाकिब को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में रखा गया है. नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक शाकिब की 45 साल की मां जूली खान ने कहा कि ‘छह दिन तक एक रोटी भी नहीं खाई थी उसने टचफोन खरीदने की जिद में’. शाकिब के गांव खेरा मेवात के 44 साल के महमूद हसन ने बताया कि गांव की आबादी करीब 8,000 की है. ज्यादातर लोग पढ़े लिखे नहीं हैं.

गांव में बहुत ही कम लोगों के पास स्मार्टफोन हैं. इसका कारण है कि ज्यादातर लोगों की कमाई 100 से 200 रुपए रोजाना की है. इतनी कम कमाई में कैसे स्मार्टफोन चला सकते हैं. शाकिब की मां जूली ने बताया कि 4 महीने पहले उसने फोन की मांग की थी, शाकिब के पिता सलीम (47) एक महीने में 6,000 से 8,000 रुपए कमाते हैं. शाकिब 7,500 रुपए के फोन की मांग कर रहा था. शाकिब तीसरी क्लास तक पढ़ा हुआ है और वह अपने पांच भाई-बहनों में चौथे नंबर का है.

जेल में बेटे से मिलने आए शाकिब के पिता ने कहा कि हमने लोन लेकर फोन खरीदा था. वो बच्चा है, उसको क्या पता फोन पर क्या नहीं करना है. शाकिब के पिता ने कहा कि वह जब जेल में उससे मिलने पहुंचे तो वह बहुत रोया. वह सिर्फ एक बच्चा है. मैं घबरा रहा हूं. हरियाणा मेरे लिए नया है. मैं नहीं जानता कि मैं उसे कैसे जमानत पर जेल से बाहर निकालूंगा.