वो फौजी विद्याबालन की छातियों की तरफ लगातार घूरे जा रहा था, इसके बाद …

नई दिल्ली: जब से ट्विटर पर मीटू कैंपेन आया है लगातार सेलेब्रिटीज की निजी जिंदगी की बातें सामने आने लगी है. सब अपने जीवन में कभी न कभी हुई कोई बदसलूकी का जिक्र किया है. इसी कैंपेन में सबसे विद्याबालन ने एक फौजी के साथ के अपने अनुभव को साझा किया है. विद्या ने एक इंटरव्यू में कहा कि जब मैं कॉलेज में थी, एक आर्मी जवान वीटी स्टेशन पर खड़ा था और मेरी तरफ देखे जा रहा था. वह लगातार मेरे ब्रेस्ट को घूर रहा था और फिर उसने मेरी तरफ देखकर आंख मारी. गुस्से के मारे मेरे तन-बदन में आग लग गई, मैं उसके पास दनदनाती हुई गई और उससे जाकर कहा, ‘आप मेरी तरफ ऐसे क्या घूर रहे हैं? आपने मुझे देखकर आंख क्यों मारी ? आप हमारे देश के जवान हैं. देश की सुरक्षा का जिम्मा आपका है और आप मुझे आंख मार रहे हैं. ये क्या छिछोरापन है?’ मेरे साथ मेरी सहेली भी थी और वह लगातार मेरा हाथ खींचकर मुझे वहां से ले जाने की कोशिश कर रही थी, मगर मैं चुप नहीं रही. मेरी फटकार पर आर्मी जवान बहुत ही शर्मिंदा हो गया.

सेक्सुअल हैरासमेंट की परिभाषा बहुत ही वृहद है. यह कुछ भी हो सकता है. हाथ लगाना, अश्लील बातें करना या मॉलेस्ट करना ही यौन शोषण नहीं होता, कई बार लोग आंखों ही आंखों में आपका बलात्कार कर देते हैं. यौन शोषण हमेशा से होता रहा है. अंतर यह है कि आज लोग इस मुद्दे पर बात कर रहे हैं. पहले इन बातों को दबा दिया जाता था. आज यह अच्छी बात है कि हर लड़की सोचती है कि वह अकेली नहीं है. आज वह खुद को दोषी मानने के बजाय दोषी का पर्दाफाश करती हैं. मैं जिन दिनों लोकल ट्रेन से सफर किया करती थी, तब मुझे चेंबूर से वीटी जाना होता था और कॉलेज के उन दिनों में अक्सर मुझे कोई पिंच कर देता, कोई चिकोटी काट देता.

मुझे बहुत गुस्सा आता और मैं चिल्ला कर हाथ उठा देती थी. मुझे लगता है ऐसे मामलों में चुप नहीं रहना चाहिए. वैसे आज इंडस्ट्री में मुझे 12 साल हो गए हैं और मुझसे यहां ऐसी-वैसी हरकत करने की किसी की हिम्मत नहीं होती, मगर जब मैं कॉलेज में थी तो मैं भी छेड़खानी का शिकार हुई. मैं आपको एक वाकया बताती हूं.

ये सोच बहुत गलत है. असल में ग्रहणियां और दूसरे लोग उनको कमतर इसलिए भी मानते हैं कि उनकी नजर में घर के काम की कोई कीमत नहीं होती. उस काम के लिए उन्हें पैसे नहीं मिलते. मैं जब चौथी क्लास में थी तो मेरी क्लास टीचर रॉड्रिक्स ने हमें एक दिन बताया कि आपकी मां जितना काम घर पर करती हैं, उसी की वजह से आप स्कूल आ पाते हो और उसी के कारण आपके पापा काम पर जाकर पैसे कमा पाते हैं. आपको अपनी मां का हमेशा धन्यवाद अदा करना चाहिए.

उनके समझाने के बाद मैं उसके बाद हमेशा अपनी मां को थैंक्स कहने लगी थी. मम्मी को मेरा थैंक्स कहना बहुत अजीब लगता था, मगर उसके सही मायने में इसके अर्थ मुझे बड़े होने के बाद समझ में आए. जैसे-जैसे मैं बड़ी होती गई, मेरी समझ में आया कि घर को संवारने में एक होममेकर का कितना बड़ा हाथ होता है. कई बार औरतें आकर मुझसे कहती हैं कि हम तो कुछ नहीं करते, बस हाउसवाइफ हैं तो मैं उन्हें उनके अस्तित्व का अहसास कराती हूं. अब जैसे मैं अपने घर का कोई घरेलू काम नहीं करती, मगर इसके बावजूद सब कुछ मैनेज करती हूं. औरतों को हमेशा दोहरी जिम्मेदारी संभालनी पड़ती है.

बस थोड़ा इंतज़ार..

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