2019 में मोदी के लिए बड़ा खतरा, टूट रहा है तिलिस्म

नई दिल्ली : कल्पना कीजिए उस शहंशाह की जिसके पास एक एक करके हर मोर्चे से हार की खबर आ रही हो. बीजेपी का हाल ऐसा ही है. गुरदासपुर चुनाव में बीजेपी की हार सातवीं है. जबसे जीएसटी आया है तब से पार्टी लगातार हार रही है. लेकिन उम्मीदें कायम हैं. अमेरिका दौरे पर गए अरुण जेटली ने कहा, “गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजे आने दीजिए. पता चल जाएगा कि जनता किसके साथ है.

इससे पहले जेटली के बारे में बाकी बातें लिखें पहले आपको बताते हैं बीजेपी की लगातार हार का इतिहास. पार्टी ने दिल्ली विश्वविद्यालय में लगातार जीत रही एबीवीपी को शिकस्त मिली और वो ज़मीन सूंघती नज़र आई. इसके बाद हैदराबाद यूनिवर्सिटी में पार्टी को हार का मुंह देखना पड़े. हरियाणा के सबसे साक्षर शहर गुड़गांव के नगर निगम चुनाव में भी पार्टी को करारी शिकस्त मिली. पार्टी के सिर्फ 13 उम्मीदवार जीत सके. यहां बिना सिंबल के लड़ी कांग्रेस बाज़ी मार ले गई.

राजस्थान के नकह निकायों को चुनाव में पार्टी को बहुत बड़ा झटका लगा. दिल्ली में बीजेपी की आधी सरकार है, हरियाणा में बीजेपी की सरकार है, राजस्थान में भी बीजेपी का बोलबाला है. केरल में भी सरकार को करारी शिकस्त मिली. केरल की वेंगरा सीट पर भी पार्टी को दुनियाभर की हिंसात्मक राजनीति करने के बाद हार ही मिली.

सबसे ज्यादा झटका देने वाली खबर इलाहाबाद विश्वविद्यालय से आई है. ये बीजेपी का गढ रहा है. हाल ही में सीएम योगी की सरकार भी बनी है लेकिन वहां पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा. एक को छोडकर सभी पदों पर एबीवीपी हार गई. समाजवादी पार्टी के यहां अच्छी जीत मिली.

गुरदासपुर में तो हालात सबसे खराब हुए. पार्टी 1 लाख 93 हजार वोटों से हारी पिछली बार ये सीट बीजेपी ने 1 लाख 36 हज़ार वोटों से जीती थी. यानी पार्टी के 3 लाख 30 हज़ार के करीब वोटर उसका साथ छोड़ गए.

उधर वित्त मंत्री अरुण जेटली जबरदस्त कॉन्फिडेंट है. कह रहे हैंनोटबंदी के बाद हुए यूपी विधानसभा चुनाव में जो हुआ हम सबने देखा.” गुजरात के नतीजे भी साबित कर देंगे कि सब ठीक है.  लेकिन पार्टी भले ही पब्लिक में अपना आत्मविश्वास जाहिर करने की कोशिश कर रही हो लेकिन वो घबराई हुई है. टेलीकॉम घोटाले के कारण कांग्रेस ने जिन सुखराम को बाहर निकाला था. बीजेपी ने उन्हें गले लगा लिया है. सुखराम के बेटे को टिकट भी दे दिया गया है. मतलब ये कि सुखराम के समर्थन के सहारे ही सही हिमाचल में पार्टी का समर्थन बढ़े. न खाऊंगा न खाने दूंगा के नारे वाली सरकार की बेचारगी का ये जीता जागता है.

सिर्फ चुनावी शिकस्तों का सिलसिला होता तो पार्टी संतोष कर लेती . लेकिन संघ परिवार के अंदरूनी सर्वे भी बता रहे हैं. कि 2019 में मोदी की समस्याएं बढ़ सकती है. हाल में कोलकाता के एक नामी अखबार ने इस सर्वे की रिपोर्ट का खुलासा भी किया था.

लोग कहते हैं कि जब हालात खराब होते हैं तो अपने मुंह मोड़ने लगते हैं. तीन साल तक चुप रहने के बाद अगर यशवंत सिन्हा के बोल उग्र होकर फूट रहे हैं तो वो कहीं न कहीं ज़रूर जानते हैं कि डरने की बात नहीं.  अरुण शौरी के आरोप भी कहते हैं कि संघ की तरफ से मोदी पर आरोप लगाने पर कोई एतराज नहीं आने वाला.

ऐसा नहीं है कि नतीजों को लेकर सरकार की घबराहट बाहर न आ रही हो. वित्तमंत्री अरुण जेटली देश की अर्थव्यवस्था पर सफाई देते नज़र आए. उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था में 3 सालों से नरमी देखी जा रही है, लेकिन इस दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था तरक्की पर रही.










बस थोड़ा इंतज़ार..

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