अपने खुलासों को बहादुरी नहीं मानती जय शाह पर रिपोर्ट लिखने वाली रोहिणी सिंह, फेसबुक पर ये लिखा

अपने खुलासों को बहादुरी नहीं मानती जय शाह पर रिपोर्ट लिखने वाली रोहिणी सिंह, फेसबुक पर ये लिखा




नई दिल्ली : अंग्रेजी न्यूज पोर्टल ‘द वायर’ (The Wire) में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्री्य अध्यिक्ष अमित शाह के बेटे जय शाह के खिलाफ छपे जिस आर्टिकल को लेकर बवाल मचा हुआ है, वह चर्चित पत्रकार रोहिणी सिंह ने लिखा है. रोहिणी वही पत्रकार हैं, जिन्होंने कांग्रेस अध्यहक्ष सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा की कंपनी और डीएलएफ रियल एस्टेट के बीच साठगांठ का खुलासा किया था. इतना ही नहीं कांग्रेस के तत्कालीन मुख्यमंत्री हुड्डा से डीएलएफ को मिलने वाले फायदे का खुलासा भी उन्होंीने ही किया था. उस समय भी उनके आर्टिकल को लेकर बहुत हंगामा हुआ था.

अब रोहिणी सिंह ने इस आर्टिकल में खुलासा किया है कि अमित शाह के बेटे की कंपनी टेंपल इंटरप्राइजेज का टर्नओवर एक ही साल में 16 लाख गुना बढ़ गया . जो कंपनी 2014-15 तक महज 50 हजार की थी वही 2015 16 में 80.5 करोड़ की हो गई. इस बार फिर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने आ गए हैं. गौरतलब है कि रोहिणी सिंह ने इकनॉमिक टाइम्स के साथ भी पत्रकारिता का सफर किया है. यूपी चुनावों पर उनकी कई स्टोरीज को लेकर चर्चाएं भी हुईं, तो उन पर उस वक्त भी कई आरोप लगाए गए थे.

इस बारे में रोहिणी सिंह ने सोशल नेटवर्किंग साइट ‘फेसबुक’ पर लिखा है, ‘इस बारे में ऐसा कोई नोट नहीं लिखना चाहती हूं कि अन्यर पत्रकारों को क्या करना चाहिए. मैं सिर्फ अपने बारे में बात कर सकती हूं. मेरी प्राथमिकता सच्चाोई सामने लाने की है. वर्ष 2011 में मैंने जब रॉबर्ट वाड्रा व डीएलएफ के बीच साठगांठ के बारे में लिखा था तो मुझे याद नहीं कि इस तरह की बातें हुई थीं, जो अब हो रही हैं.’

उन्होंेने लिखा है, ‘पत्रकारों को उनके पथ से डिगाने के लिए शक्तिशाली लोगों द्वारा प्राय: धमकी और शोषण का इस्तेामाल किया जाता रहा है. एक बार किसी प्रसिद्ध व्यवक्ति ने कहा भी था कि न्यूषज वह है जिसे दबाने की कोशिश की जाती है, बाकी सब तो ऐडवर्टाइजिंग है. मैं दूसरों के बारे में तो नहीं जानती लेकिन मैं इन चीजों से अपना ध्या न नहीं हटाना चाहती हूं. मैं ये स्टोकरी सिर्फ इसलिए नहीं कर रही हूं कि यह बहादुरी है बल्कि मैं इसलिए करती हूं क्यों्कि यही पत्रकारिता है.

गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब इस पोर्टल के खिलाफ इस तरह मानहानि का मामला दर्ज कराया गया है. इससे पहले ‘रिपब्लिक टीवी’ (Republic TV) में निवेशक और सांसद राजीव चंद्रशेखर ने मार्च 2017 में ‘द वायर’ के खिलाफ मानहानि के दो मामले दर्ज कराए थे. ये मामले वेबसाइट द्वारा प्रकाशित आर्टिकल को लेकर दर्ज कराए गए थे.

वहीं, ‘जी टीवी’ (ZEE TV) के मालिक सुभाष चंद्रा ने एक आर्टिकल प्रकाशित करने पर जुलाई 2017 में ‘द वायर’ के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था. इस मामले में मिजोरम के मुख्य् न्या(यिक मजिस्ट्रेरट द्वारा पोर्टल के एडिटर्स के खिलाफ सम्म न भी जारी किया गया था.

द वायर कोई सामान्य मीडिया हाऊस नहीं है . दरअसल लंबे समय से स्वतंत्र विचारों वाले पत्रकार घुटन महसूस कर रहे थे. मीडिया हाऊस विज्ञापनों पर निर्भर रहते हैं. ऐसी हालत में वो खुलकर बात नहीं कर पाते. उन पर दबाव होते हैं. ऐसे में द वायर ने इंटरनेट का सहारा लिया और ऐसी संस्था बताई जहां खबर छापने में डर न हो. यहां खबर अगर मजबूत है और सबूत पक्के हैं तो आप वायर के संस्थापक सिद्धार्थ वर्दराजन के पिता के खिलाफ भी खबर प्रकाशित कर सकते हैं.