टीपू सुल्तान को मोदी के मंत्री ने बताया बलात्कारी और बर्बर, जानिए अंदर की स्टोरी

टीपू सुल्तान को मोदी के मंत्री ने बताया बलात्कारी और बर्बर, जानिए अंदर की स्टोरी




नई दिल्ली : उपचुनाव से पहले एक बार फिर भारत को हिंदू मुसलमान में बांटने की कोशिशें हो रही है. ताजमहल को लेकर पहले एक विवाद खड़ा करने की कोशिश हुई . फिर अयोध्या में दिवाली मनाने की कोशिश हुई और राम की बड़ी मूर्ति लगाने की बातें भी की गईँ. लेकिन उत्तर भारत में बीजेपी जितनी सीटें ला चुकी है उससे ज्यादा लाना संभव ही नहीं है इसलिए साउथ में धार्मिक खेल शुरू हो गया है.

केरल में राजनीतिक हिंसा के बीज़ बोने के बाद अब अंग्रेज़ों से लोहा लेने वाले टीपू सुल्तान के उपर बीजेपी के एक बड़े नेता ने भद्दी टिप्पणियां की हैं. केंद्रीय कौशल विकास राज्य मंत्री अनंत कुमार हेगड़े ने न सिर्फ टीपू सुल्तान की जयंती में शामिल होने से इनकार कर दिया है बल्कि बल्कि कर्नाटक सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर टीपू सुल्तान को बर्बर, निरंकुश और मास रेपिस्ट करार दिया है.

हेगड़े ने कर्नाटक के अधिकारियों को लिखे पत्र की कॉपी ट्विटर पर शेयर करते हुए लिखा है, ‘मैंने कर्नाटक सरकार को एक ऐसे बर्बर हत्यारे, कट्टरपंथी और मास रेपिस्ट का महिमामंडन के लिए आयोजित होने वाली जयंती कार्यक्रम में मुझे नहीं बुलाने के बारे में बता दिया है.”

हेगड़े के इस ट्वीट के बाद कर्नाटक का सियासी पारा चढ़ा हुआ है. कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने हेगड़े की आलोचना करते हुए कहा है कि केंद्रीय मंत्री होने के नाते उन्हें इस तरह की टिप्पणी और पत्र नहीं लिखना चाहिए था. उन्होंने बताया कि टीपू सुल्तान जयंती कार्यक्रम में राज्य के सभी मंत्रियों, केंद्रीय मंत्रियों और अन्य गणमान्यों को पत्र भेजा जाता है, समारोह में शामिल होना या न होना उनकी मर्जी पर निर्भर करता है. सीएम सिद्धारमैया ने कहा है कि इसे राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ टीपू सुल्तान ने चार युद्ध लड़े थे.

बता दें कि सरकार ने 10 नवंबर को टीपू सुल्तान की जयंती का आयोजन किया है. कर्नाटक सरकार साल 2015 से टीपू सुल्तान की जयंती मना रही है. उस साल भी इसका जमकर विरोध हुआ था. टीपू सुल्तान 18वीं सदी में मैसूर साम्राज्य का शासक था. उसके शासनकाल पर शिक्षाविदों, इतिहासकारों और बुद्धिजीवियों के बीच मतभेद रहे हैं.

गौरतलब है कि 2015 में भी टीपू सुल्तान की जयंती मनाने का हिन्दूवादी संगठनों ने विरोध किया था. तब कर्नाटक में फैली हिंसा में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के एक स्थानीय नेता की जान चली गई थी और कई लोग घायल हुए थे. साल 2016 में भी बीजेपी और संघ समर्थित संगठनों ने टीपू सुल्तान की जयंती मनाने का राज्यव्यापी विरोध किया था. बीजेपी और संघ के लोगों ने इसे मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति करार दिया था.