राजीव गांधी की हत्यारी का था महात्मा गांधी से भी रिश्ता, आत्मकथा में प्रियंका से मुलाकात का भी जिक्र …

राजीव गांधी की हत्यारी का था महात्मा गांधी से भी रिश्ता, आत्मकथा में प्रियंका से मुलाकात का भी जिक्र …




पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या करने की दोषी नलिनी श्रीहरण अपनी आत्मकथा को लेकर फिर सुर्खियों में है. 25 साल से भी ज्यादा समय में जेल में बंद नलिनी, दुनिया में सबसे लंबे वक्त तक सजा काटने वाली महिला कैदी है. जेल में बिताए इस समय के दौरान नलिनी ने तमिल भाषा में 500 पन्नों की एक किताब लिखी है जिसे 24 नवंबर को रिलीज किया जाएगा. नलिनी ने अपनी आत्मकथा में प्रियंका गांधी से हुई उसकी मुलाकात के बारे में भी बताया है.

21 अप्रैल, 1991 को एलटीटीई के लिए काम करने वाले श्रीहरण (मुरुगन) से शादी करने वाली नलिनी, दो महीने की गर्भवती थी जब उसे राजीव गांधी की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया था. तमिलनाडु के वेल्लोर में स्पेशल महिला जेल में बंद नलिनी छह अन्य दोषियों के साथ उम्र कैद की सजा काट रही है.

अपनी आत्मकथा में, नलिनी ने अपने बचपन, मुरुगन से अफेयर, जिन हालात में वह राजीव गांधी की हत्या की गवाह बनी, पांच दिन तक भागने की कोशिश, गिरफ्तारी, कस्टडी के दौरान मिली प्रताड़ना, जेल में उसके बच्चे का जन्म, सजा के ऐलान और जेल की जिंदगी के बारे में सब कुछ विस्तार से लिखा है. किताब में सबसे दिलचस्प हिस्सा उसकी प्रियंका गांधी के साथ 19 मार्च, 2008 को हुई 90 मिनट की मुलाकात है. इस मुलाकात के बारे में दुनिया को टाइम्स ऑफ इंडिया में 15 अप्रैल, 2008 को छपी एक रिपोर्ट के जरिए पता चला था.

भारत देस के विरुध तमिल अतकवधि षड्यंत्र कर रहे है तमिल नाडु मे कासमीर अतकवाडियो से जधहा कतरणक लोग ए तमिल अतकवधि लोग है भारत देस के विरुध हिन्दू धरम के विरुध गलिया देते और भारत से अलग तमिल देस बनाने का सड़ियंत्र ओरहा है

कम ही लोग जानते हैं कि महात्मा गांधी ने नलिनी की मां का नाम पद्मावती रखा था, जो कि चेन्नै के एक अस्पताल में नर्स थीं. श्रीहरण उनकी जिंदगी में तब आया, जब उसे रहने के लिए किराए के एक मकान की तलाश थी. इसके बाद एंट्री हुई सिवरासन की जो कि श्रीहरण की तरह श्रीलंका का ही रहने वाला था. कुछ दिनों में सिवरासन, धानू को भी ले आया जिसने बाद में मानव बम की भूमिका निभाई.

अपनी इस बात पर कायम रहते हुए कि उसे और उसके पति को राजीव गांधी की हत्या के प्लान में बारे में कुछ नहीं पता था, नलिनी ने प्रियंका गांधी को बताया कि हालात ने उसे कैदी बना दिया. प्रियंका पूछती रहीं कि उनके पिता जो कि एक ‘अच्छे इंसान’ थे, उन्हें क्यों मार डाला गया? प्रियंका यह जानना चाहती थीं कि हत्या के पीछे कौन लोग थे, पर चूंकि नलिनी खुद एलटीटीई की सदस्य नहीं थी इसलिए इस बारे में ज्यादा कुछ नहीं बता पाई.

चेन्नै में जन्मी नलिनी ने अंग्रेजी साहित्य की पढ़ाई की थी और श्रीहरण के उसकी जिंदगी में आने से पहले एक प्राइवेट कंपनी में काम करती थी.नलिनी कहती है कि उसे नहीं पता कि प्रियंका के यहां आने का असली मकसद क्या था. उसके मुताबिक हो सकता है कि यह भारत की कूटनीति का हिस्सा हो जिसके तहत श्रीलंका को चीन से दूर रखने की कोशिश की गई हो. उसने कहा कि टाइम्स ऑफ इंडिया में रिपोर्ट छपने के अगले ही दिन तत्कालीन श्रीलंकाई राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के भाई बासिल राजपक्षे भारत आए और दिल्ली में तीन दिन तक रुककर भारत के साथ संबंधों को मजबूती देने की कोशिश की.

नलिनी की आत्मकथा में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की हिरासत में बिताए 50 दिनों का भी जिक्र है. साथ ही जेल में उसकी बेटी के जन्म की कहानी भी जिसे कमजोर दिल वाले शायद ही पढ़ पाएं. निर्वस्त्र करना, सीने पर मारना, दूसरों के सामने पति से प्यार करने को कहा जाना, पुलिस से गैंग रेप की धमकी…इन तमाम अनुभवों को नलिनी ने अपनी आत्मकथा में समेटा है. नलिनी के मुताबिक उसे हर संभव थर्ड डिग्री टॉर्चर से गुजरना पड़ा, वह भी गर्भवती होने के दौरान.

किताब में नलिनी ने बताया है कि अपराध स्वीकार करने के बयान पर साइन लेने के लिए पुलिस उसे एक महिला डॉक्टर के पास अबॉर्शन के लिए ले गई. नलिनी ने कहा कि वह आज भी उस डॉक्टर को देवी की तरह मानती है क्योंकि उन्होंने अबॉर्शन करने से न सिर्फ मना किया बल्कि पुलिस अधिकारियों को फटकार भी लगाई.

नलिनी की बेटी अरिथ्रा जो अब लंदन में डॉक्टर है, जेल में भूख से तड़पती थी. जेल में रहने के दौरान कई जेल अधिकारियों ने उसे पैसे दिए और बच्ची के लिए छोटी-मोटी मदद भी की. अरिथ्रा को पहले कोयंबटूर और फिर श्रीलंका भेज दिया गया जहां से वह अपने रिश्तेदारों के साथ गैरकानूनी तरीके से यूरोप चली गई. भारत ने तो उसे स्टूडेंट वीजा देने से भी इनकार कर दिया था, जबकि ब्रिटिश सरकार ने उसे शरण दी, सहारा दिया और पढ़ाई के लिए पूरी मदद दी जिससे कि वह डॉक्टर बन पाई.

नलिनी के मुताबिक जयललिता की एआईएडीएमके के सत्ता में रहने के दौरान जेल में उसकी जिंदगी कुछ बेहतर रही. अपनी आत्मकथा में उसने कई बार इस बात का जिक्र किया है कि डीएमके के शासनकाल में उसे जेल में काफी तकलीफों से गुजरना पड़ा.

नलिनी ने अपनी बेटी को लिखे एक पत्र लिखकर कहा है कि उसकी आखिरी इच्छा यह है कि वह अपने माता-पिता के साथ एक दिन बिताए. COURTSEY-NAVBHARATTIMES