हालात बदले तो सरकार का सुर भी बदला, बढ़ गई मोदी की विनम्रता, अर्थव्यवस्था और GST पर अकड़ कम हुई

हालात बदले तो सरकार का सुर भी बदला, बढ़ गई मोदी की विनम्रता, अर्थव्यवस्था और GST पर अकड़ कम हुई

नई दिल्ली : मोदी सरकार ने देश में अपने खिलाफ बन रहे माहौल को भांप लिया है और अब पार्टी सीधे रक्षात्मक हो गई है. कल पार्टी ने दिल पर पत्थर रखकर पेट्रोल के दाम पर अपनी गलती मानी और दाम दो रुपये लिटर कम किए जबकि हफ्ते भर पहले तक वित्त मंत्री अरुण जेटली का रवैया बेहद अडियल और रूखा था. उन्होंने कहा था कि पेट्रोल के दाम किसी भी हालत में कम नहीं होंगे. लेकिन संघ के सर्वे का असर सरकार पर हुआ ( नॉकिंग न्यूज़ ने बताया था कि संघ के सर्वे में मोदी की हालत खराब बताई गई है.)

दूसरी गलती मोदी सरकार जल्द ही जीएसटी के मामले पर स्वीकार करने की तैयारी में है. माना जा रहा है कि जीएसटी पर सरकार अपना बड़ा तीसरा यू टर्न लेगी. नोटबंदी और कैश लेस इकोनॉमी पर सरकार पहले ही यूटर्न ले चुकी है. उसने कैश लेस लेनदेन पर ज्यादा फीस लगाई ताकि लोग कैश की तरफ बढ़ें.

आज जीएसटी पर मोदी ने साफ कहा कि जीएसटी में जरूरत के मुताबिक बदलाव किए जाएंगे. जीएसटी काउंसिल इस पर विचार कर रहा है. GST से व्यापारियों को होने वाली परेशानियों को दूर करने के लिए सरकार कदम उठाएगी. व्यापारियों को डरने की जरूरत नहीं है. पिछले रिकॉर्ड नहीं खंगाले जाएंगे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को द इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया (ICSI) के गोल्डन जुबली ईयर समारोह का उद्घाटन किया. वह भारी संख्या में मौजूद कंपनी सेक्रेटरी (CS) को भी संबोधित कर रहे हैं.

मोदी की एक एक बात में निराशा दिखाई दी PM मोदी ने कहा कि हम लकीर के फकीर नहीं हैं, न ही हम दावा करते हैं कि सारा ज्ञान हमारे पास ही है. इससे पहले किसी भी विपरीत बयान पर सरकार का रुख बेहद आक्रामक रहा करता था.

बेहद उदारता दिखाते हुए मोदी ने कहा कि जरूरत पड़ी, तो जीएसटी में बदलाव संभव है. जीएसटी काउंसिल इस पर विचार कर रही है.

लगातार मंदी झेल रही अर्थ व्यवस्था की बेचैनी मोदी के हर बयान में दिखाई दी. मोदी ने कहा कि उन्होंने कहा कि हाल के तीन महीनों में ट्रैक्टर की खरीददारी में 34 फीसदी का इजाफा हुआ है. कार और वाहनों की विक्री में इजाफा हुआ है. जून 2017 के बाद consumption में भी वृद्धि हुई है. हवाई यात्रा करने वालों की संख्या में भी वृद्धि हुई है. इन छोटे इंडीकेटर्स का जिक्र अगर प्रधानमंत्री करे तो समझ लेना चाहिए कि उसे अर्थव्यवस्था को बेहतर बताने के लिए उदाहरण नहीं मिल रहे हैं.

पीएम मोदी ने कहा कि बदलती हुई देश की इस अर्थव्यवस्था में अब ईमानदारी को प्रीमियम मिलेगा, ईमानदारों के हितों की सुरक्षा की जाएगी. मैं आश्वस्त करना चाहता हूं कि सरकार द्वारा लिए गए कदम देश को आने वाले वर्षों में विकास की एक नई league में रखने वाले हैं. हमने सुधार से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं और ये प्रक्रिया लगातार जारी रहेगी. देश की आर्थिक स्थिरता को भी बनाए रखा जाएगा. निवेश बढ़ाने और आर्थिक विकास को गति देने के लिए हम हर आवश्यक कदम उठाते रहेंगे.

मोदी ने माना कि इस वर्ष अप्रैल-जून की तिमाही में GDP ग्रोथ में कमी दर्ज की गई। लेकिन ये बात भी उतनी ही सही है कि सरकार इस ट्रेंड को रिवर्स करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं. मेरे जैसे अर्थशास्त्र के कम जानकार को अब भी ये समझ नहीं आता कि उस समय बड़े-बड़े अर्थशास्त्रियों के रहते ऐसा कैसे हो गया था. मोदी ने कहा कि इसे ऐसा Dangerous ग्रुप माना गया था, जिसकी खुद की अर्थव्यवस्था तो एक समस्या थी ही, बल्कि ये वैश्विक अर्थव्यवस्था की रिकवरी में भी बाधा बन रहे थे.

मोदी ने कहा कि मैं ना कोई अर्थशास्त्री हूं और ना ही कभी मैंने ऐसा दावा किया है, लेकिन आज जब अर्थव्यवस्था पर इतनी चर्चा हो रही है, तो मैं आपको फ्लैसबैक में भी लेकर जाना जाता हूं. ( ये वही मोदी हैं जिन्होंने अकेले नोटबंदी जैसा कदम सिर्फ 4 आदमियों को विश्वास में लेकर उठाया था)