क्या लोकतंत्र के खिलाफ हैं भारत के लोग, मोदी के समर्थन वाले सर्वे में संसद और कोर्ट पर भी एतराज़

क्या लोकतंत्र के खिलाफ हैं भारत के लोग, मोदी के समर्थन वाले सर्वे में संसद और कोर्ट पर भी एतराज़

नई दिल्ली : न तो सरकार का एक साल हुआ. न सरकार के सौ दिन हुए. न चुनाव आए हैं. न कोई बड़ा हादसा हुआ है. फिर अचानक एक सर्वे क्यों? वजह की व्याख्या बाद में करेंगे. पहले कर लेते हैं सर्वे की बात मोदी सरकार के समर्थन में यो सर्वे आया है वो कहता है कि  भारत में 85 फीसदी लोग अपनी सरकार पर विश्वास करते हैं. और तो और ये सर्वे कह रह है कि बहुसंख्यक भारतीय समाज सैन्य शासन और तानाशाही का भी समर्थन करता है यानी देश के लोग लोकतंत्र के खिलाफ है. प्यू रिसर्च नाम की इस एजेंसी के सर्वे में यह बात सामने आई है.

इस सर्वेक्षण में यह भी कहा गया है कि 48 फीसदी रूसी नागरिकों ने मजबूत नेता के शासन का समर्थन किया. 26 फीसदी लोगों ने कहा कि ऐसी व्यवस्था शासन के लिए अच्छी होगी, जिसमें मजबूत नेता संसद या अदालतों के दखल के बिना फैसले कर सके. सर्वे कह रहा है कि तानाशाही होनी चाहिए. ( आपको बताने की ज़रूरत नहीं है कि पिछले कुछ समय से पीएम मोदी लगातार अपनी आलोचना के असहनीय बताने की कोशिश करते रहे हैं. उन्होंने बार बार कहा कि उन्हें आलोचना झेलनी पड़ती है)

प्यू रिसर्च की सर्वे रिपोर्ट में कहा गया है कि अपने मजबूत लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए पहचाने जाने वाले भारत में 55 फीसदी लोग किसी न किसी तरह से तानाशाही का समर्थन करते हैं. इनमें से 27 फीसदी लोग मजबूत नेता चाहते हैं.

इस सर्वे की  रिपोर्ट के अनुसार, “भारत में अर्थव्यवस्था 2012 से 6.9 फीसदी की दर से बढ़ रही है और 85 फीसदी से अधिक भारतीयों को अपनी सरकार में विश्वास है.” (अर्थव्यवस्था के विकास की दर सर्वे से पता करने का ये नया तरीका है )

हालांकि सर्वे में शामिल 71 फीसदी लोगों ने कहा कि यह शासन के लिए उचित नहीं होगा. भारत एशिया प्रशांत क्षेत्र के उन तीन देशों में शामिल है जहां तकनीकी तंत्र का समर्थन किया गया.

शुरू में हमने सर्वे की टाइमिंग पर बात की थी. कहा जा रहा है कि सर्व