बुरा नहीं है किम जोंग का कोरिया, भारत के लिए सीखने को है बहुत कुछ

नई दिल्ली : जब से उत्तरी कोरिया के राष्ट्रपति किम जोंग ने अमेरिका से सीधे टक्कर लेनी शुरू की है तब से उनके बारे में पूरी दुनिया में पश्चिमी मीडिया तरह तरह की बातें प्रचारित कर रहा है. जो छपि उत्तर कोरिया की बनाई जा रही है उससे लगता है कि किम जोंग एक तानाशाह है जो जिसे चाहता है उसकी हत्या करवा देता है. ये छवि ठीक उस तरह की हैजो इससे पहले सद्दमाम हुसैन की बनाई गई थी. लेकिन ऐसा नहीं है कोरिया वहां के नागरिकों के लिए स्वर्ग से कम नहीं है.

इस देश में वो सब है जिसे भारत में आने में पता नहीं कितनी सदियां लगेंगी. जहां भारत में शिक्षा की जिम्मेदारी रेयान इंटरनेशनल जैसे स्कूलों के हवाले है जो लोगों की गाढ़ी कमाई का बड़ा हिस्सा छीन लेते हैं . वहीं कोरिया की तस्वीर कुछ अलग है. कोरिया में शिक्षा पाना हर बच्चे का अधिकार है. वहां शिक्षा का अधिकार ही नहीं कर्तव्य है. हर बच्चे को शिक्षा देने कोरिया में अनिवार्य है. जिस घर के बच्चे शिक्षा नहीं लेते उस इलाके के अधिकारियों को जवाब देना पड़ता है. 1 साल प्री नर्सनी और 10 साल की शिक्षा सरकार अपनी जिम्मेदारी मानतीहै. इसके बाद भी आप पढ़ना चाहते हैं तो सरकार वजीफा देती है. कल्पना कीजिये कोई भी तानाशाह कभी अपने नागरिकों को शिक्षित होने देना चाहेगा.


लोकतंत्र
भारत मे मताधिकार 18 साल की उम्र में मिलता है लेकिन कोरिया में 17 साल की उम्र में आप सिर्फ वोट ही नहीं दे सकते बल्कि चुनाव भी लड़ सकते हैं. उत्तर कोरिया का समाजवादी संविधान कहता है ‘एक सभी के लिए और सभी एक के लिए’ . यहां आप किसी भी विचार के हों, किसी भी धर्म के हों. किसी भी नस्ल के हों या किसी भी लिंग के हों चुनाव लड़ने का पूरा अधिकार है. भारत में इकट्ठा होकर प्रदर्शन करना सरकार से अनुमति के बगैर ही संभव है लेकिन कोरिया में ये मौलिक अधिकारों का हिस्सा है कि आप साहित्यिक राजनीतिक गतिविधियों में हिस्सा ले सकते हैं, एक जगह इकट्ठा हो सकते हैं और प्रदर्शन कर सकते हैं. ये आपका अधिकार है. कोरिया अकेला देश है जहां काम करने और आराम करने का अधिकार लोगों को मिला हुआ है.


सेहत
स्वास्थ्य कोरिया के नागरिकों के मौलिक अधिकारों में शामिल है. यहां आपको इलाज करान के लिए खर्च नहीं करना पड़ता. भारत में अगर एक व्यक्ति किसी गंभीर बीमारी का शिकार हो जाता है तो उसे लाखों रुपये की ज़रूरत होती है. कोरिया में ये सब मुफ्त मिलता है. महिलाओं और बच्चों को सरकार ने विशेष अधिकार दे रखे हैं. और तो और प्रेम और विवाह संस्था को भी सरकार पूरी स्वतंत्रता देती है. लिंग भेद कोरिया में बिल्कुल नहीं है. जो अधिकार महिलाओं के हैं वही पुरुषों के.

धर्म की आज़ादी

कोरिया में धर्म का पालन करने की पूरी आज़ादी है. यहां बाकायदा धार्मिक संगठन हैं. कोरियन फेडरेशन ऑफ बुद्धिस्ट और कोरियन फेडरेशन ऑफ क्रिचश्चियन नागरिकों बाकायदा धार्मिक आज़ादी की आवाज़ उठाने वाले दो संगठन हैं.
तो जब भी आप पश्चिमी मीडिया से आई खबरें पढ़ें और आपको किम जोंग की छवि ड्रेकुला जैसी लगे तो ये लेख याद कर लीजिएगा. सद्दाम को जिन आरोपों में मार दिया और जिन आरोपों में इराक को बरबाद कर दिया गया वो बाद में झूठे निकले. अब अमेरिका के निशाने पर उत्तरी कोरिया है. अमेरिका पहले आपकी छवि बिगाडता है फिर आपको मार देता है. लीबिया में गद्दाफी की छवि भी ऐसी ही बनाई गई बाद में मार दिया गया.

 

बस थोड़ा इंतज़ार..

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