एक बार में तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, कहा- सरकार कानून बनाए

एक बार में तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, कहा- सरकार कानून बनाए

नई दिल्ली :  आखिर तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट का बहुप्रतीक्षित फैसला आ गया है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में कहा कि, केन्द्र कानून बनाए. सुप्रीम कोर्ट ने इस पर दखल देने से इनकार कर दिया. आजतक की खबर के मुताबिक एक साथ तीन तलाक गलत है और इस पर रोक लगा दी गई है. लेकिन इस्लाम के मुताबिक तीन तलाक को सुप्रीम कोर्ट ने रोकने से िनकार कर दिया. अदालत ने कहा कि केन्द्र चाहे तो इस पर कानून बना सकता है. कोर्ट ने साथ ही ये भी कहा कि एक साथ तीन तलाक असंवैधानिक है और उसकी इजाजत नहीं दी जा सकती. तीन तलाक को लेकर 11 मई से सुप्रीम कोर्ट में शुरू हुई थी. और 18 मई को सुनवाई खत्म हुई थी और कोर्ट ने अपने आदेश को सुरक्षित रखा लिया था. फैसला सुनाते समय सभी पांच जज कोर्ट में मौजूद थे. चिफ जस्टिस खेहर अदालत में मोजूद था.

तीन तलाक पर फैसले से जुड़े लाइव अपडेट्स –

– सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तीन तलाक आर्टिकल 14, 15 और 21 का उल्लंघन नहीं है. यानी तीन तलाक असंवैधानिक घोषित नहीं किया जा सकता है.

– सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक पर 6 महीने की रोक लगा दी है. कोर्ट ने केंद्र सरकार को संसद में इसको लेकर कानून बनाए. कोर्ट ने सरकार से 6 महीने में कानून बनाने को कहा है.




– कोर्ट की कार्यवाही शुरू, मुख्य न्यायधीश जे. एस. खेहर ने बोलना शुरू किया.

– सुप्रीम कोर्ट के कमरा नंबर 1 में होगी मामले की सुनवाई.

– याचिका कर्ता सायरा बानो, पर्सनल लॉ बॉर्ड के वकील कपिल सिब्बल सुप्रीम कोर्ट पहुंचे.

– इस मुद्दे पर कोर्ट में याचिका दायर करने वालीं सायरा बानो ने फैसला आने से पहले कहा कि मुझे उम्मीद है कि कोर्ट का फैसला मेरे हक में आएगा. जो भी फैसला होगा, हम उसका स्वागत करेंगे.

तीन तलाक के पक्ष में नहीं केंद्र

गौरतलब है कि 5 जजों की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की. कोर्ट में यह सुनवाई 6 दिनों तक चली थी. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए गए हलफनामे में साफ किया कि वह तीन तलाक की प्रथा को वैध नहीं मानती और इसे जारी रखने के पक्ष में नहीं है. सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने तीन तलाक को ‘दुखदायी’ प्रथा करार देते हुए न्यायालय से अनुरोध किया था कि वह इस मामले में ‘मौलिक अधिकारों के अभिभावक के रूप में कदम उठाए.’

 

वहीं मुकुल रोहतगी ने दलील थी कि अगर सऊदी अरब, ईरान, इराक, लीबिया, मिस्र और सूडान जैसे देश तीन तलाक जैसे कानून को खत्म कर चुके हैं, तो हम क्यों नहीं कर सकते. अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने पीठ से कहा था, ‘अगर अदालत तुरंत तलाक के तरीके को निरस्त कर देती है तो हम लोगों को अलग-थलग नहीं छोड़ेंगे. हम मुस्लिम समुदाय के बीच शादी और तलाक के नियमन के लिए एक कानून लाएंगे.’

 

महिला अधिकारों की लड़ाई

तीन तलाक पर केंद्र का कहना था कि यह मामला बहुसंख्यक बनाम अल्पसंख्यक का नहीं है. यह एक धर्म के भीतर महिलाओं के अधिकार की लड़ाई है. इस मामले में विधेयक लाने के लिए केंद्र को जो करना होगा वह करेगा, लेकिन सवाल ये है कि सुप्रीम कोर्ट क्या करेगा? इसके बाद चीफ जस्टिस ने कहा कि अस्पृश्यता, बाल विवाह या हिंदुत्व के भीतर चल रही अन्य सामाजिक बुराइयों को सुप्रीम कोर्ट अनदेखा नहीं कर सकता है. कोर्ट इस मामले में अपनी जिम्मेदारी से इनकार नहीं कर सकता.