रेमंड्स के मालिक इस रईस को अपने बेटे ने कर दिया मोहताज

रेमंड्स के मालिक इस रईस को अपने बेटे ने कर दिया मोहताज

मुंबई : कल तक जिस विजयपत सिंघानिया के नाम से देश के बड़े बड़े रईस इज्जत से सज़दा करते थे. जो सिंघानिया सेठ मुंबई की शान था आज उसके पास रहने के लिए घर तक नहीं है. रेमंड्स जैसे ब्रांड को बुलंदियों पर पहुंचाने वाले 78 साल के विजयपत सिंघानिया इन दिनों एक एक पाई के मोहताज़ हैं. कभी होटलों में लाखों रुपये की टिप दे देने वाले सिघानिया आज पाई-पाई को मोहताज हैं. आरोप है कि सिंघानिया सेठ को इस हाल में पहुंचाने वाला कोई और नहीं उसका बेटा गौतम सिंघानिया है.




सबसे अमीर परिवारों में शुमार सिंघानिया परिवार के मुखिया के वकील ने यह आरोप बांबे हाई कोर्ट में बेटे गौतम पर लगाया है. आपको बता दें कि रेमंड का आज भी करीब तीन हजार करोड़ रुपये का कारोबार है. आपको बता दें कि सिंघानिया के पास अभी भले ही ठीक ठाक कार न हो लेकिन कभी वो निजी विमान उड़ाया करते थे. पद्मभूषण से अलंकृत विजयपत सिंघानिया 1998 में ब्रिटेन से भारत तक अकेल माइक्रोलाइट विमान उड़ाकर लाए- 1994 में 24 दिन में 34 हजार किमी की उड़ान पूरी की.-एयरफोर्स ने कमोडोर की मानद उपाधि से नवाजा.




अदालत में वकील के जरिये विजयपत सिंघानिया ने आरोप लगाया है कि उनका बेटा गौतम रेमंड लिमिटेड को अपनी व्यक्तिगत जागीर की तरह चला रहा है. विजयपत इन दिनों दक्षिण मुंबई स्थित ग्रांड पराडी सोसाइटी में किराए के रो हाउस में रह रहे हैं. पिछले दिनों उन्होंने बांबे हाई कोर्ट में याचिका दायर कर मालाबार हिल स्थित पुनर्विकसित 36 मंजिला जेके हाउस में डुप्लेक्स का कब्जा मांगा है. इसके बाद बुधवार को सिंघानिया के वकील ने कोर्ट को बताया कि विजयपत किस तरह पैसों की तंगी से गुजर रहे हैं.

एक हजार करोड़ की संपत्ति कर दी बेटे के नाम

बांबे हाई कोर्ट में सिंघानिया के वकील दिनयार मेडन ने बताया है कि सिंघानिया ने सारी संपत्ति अपने बेटे के नाम कर दी. सिंघानिया ने कंपनी में अपने सारे शेयर अपने बेटे के हिस्से में दे दिए थे. इन शेयरों की कीमत 1000 करोड़ रुपये के करीब थी. अब गौतम ने उन्हें बेसहारा छोड़ दिया है. यहां तक कि उनकी गाड़ी और ड्राइवर भी छीन लिए हैं. सिंघानिया इतने ज़िंदादिल इनसान हैं कि उन्होंने 67 साल की उम्र में सबसे अधिक ऊंचाई पर हॉट एयर बैलून उड़ाकर सबको चौंका दिया था. वो दिसंबर 2005 से दिसंबर 2006 तक मुंबई के मानद मेयर (शेरिफ) रहे.