राम रहीम केस : मनमोहन ने राजनीतिक दबावों से सीबीआई को बचाए रखा, जांच अधिकारी का बयान

राम रहीम केस : मनमोहन ने राजनीतिक दबावों से सीबीआई को बचाए रखा, जांच अधिकारी का बयान




बैंगलुरु : अगर मनमोहन सिंह अड़कर खड़े न होते तो राम रहीम आज जेल में न होता. ये बयान किसी और ने नही बल्कि राम रहीम के खिलाफजांच कर रहे सीबीआई के चीफ इनवेस्टीगेटिंग ऑफिसर एम नारायणन ने दिया है, नारायणन सीबीआई के रिटायर्ड डीआईजी रहे हैं. उन्होंने ही मामले की जांच की थी. सीएनए नेटवर्क 18 ने

नारायणन से बातचीत के बाद ये खबर दी है. नारायणन का कहना है कि पंजाब और हरियाणा के कई सांसद राम रहीम को बचाने में लगे थे. लेकिन मनमोहन सिंह ने कहा जांच निष्पक्ष होनी चाहिए. नारायणन ने सीबीआई के चीफ  विजय शंकर की भी तारीफ की . उन्होने कहा कि विजय शंकर ने जांच केलिए खुली छूट दी और किसी भी दबाव के आगे झुकने नहीं दिया.




केरल के कसारागोड के रहने वाले नाराणन जिस दिन राम रहीम को 20 साल की सज़ा सुनाई गई मैसूर में थे. सज़ा पर संतोष जताते हुए उन्होंने कहा कि राम रहीम क हत्या के दो मामलों में भी ज़रूर सज़ा होगी.

एम नारायणन ने कहा कि शिकायत 2002 में हाईकोर्ट के आदेश पर दर्ज की गई थी . लेकिन इस मामले में 2007 तक मामला एक इंच भी नहीं बढ़ा. पंजाबा हरियाणा हाईकोर्ट ने इस मामले पर सख्ती दिखाई और सीबीआई को फटकारा. अदालत ने सीबीआई चीफ विजयन को बुलवाया और जवाब मांगा. इसके बाद सीबीआई चीफ ने नारायण को  साध्वियों की चिट्ठी सौंपी .  साथ ही पत्रकार राम चंद्र छत्रपति और डेरा के सेवर रंजीत सिंह की हत्या की फाइल भी दी.  विजय शंकर ने हिदायत दी कि 57 दिन में जांच पूरी हो जानी चाहिए.




नारायणन कहते हैं कि ये बेहद कठिन काम था क्योंकि सीबीआई के पास एक गुमनाम चिट्ठी के अलावा कुछ नहीं था. इस बीच में सैक्स प्रताणना के कारण 200 साध्वियां डेरा छोड़कर जा चुकी थीं. ऐसे में शिकायतकर्ता को ढूंढना आसान काम नहीं था. आखिर में सिर्फ 10 ही पीड़ित लड़किया मिल पाईं. ये सभी शादीशुदा थीं इसलिए शिकायत करने के लिए आगे आना नहीं चाहती थीं. नारायणन कहते हैं कि 57 दिन का समय मिला था और हम 56वें दिन दो पीड़ितों को चार्जशीट दाखिल करने के लिए किसी तरह मना पाए. हमने अंबाला कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की.

उन्होंने कहा कि डेरा सच्चा सौदा के किले में घुस पाना आसान काम नहीं था. सीबीआई की टीम जब जाती थी राम रहीम के गुंडे उसे धमकाते थे. खुद नारायणन को भी कई बार धमकाया गया. राम रहीम पुराने जमाने के किसी महाराजा की तरह अपने आश्रम की गुफा में खूबसूरत लड़कियों से घिरा रहता था हमें बताया गया कि वो साध्वी हैं.

हर रात करीब दस बजे मुख्य साध्वी को फोन आता था . उसे निर्देश दिए जाते थे कि एक साध्वी को वो बाबा के कमरे में भेज दे. इसके बाद वो एक साध्वी को जबरदस्ती भेज दिया जाता था. नारायणन कहते हैं कि राम रहीम किसी शातिर अपराधी की तरह बेहद सावधान रहता था और जुर्म का कोई निशान नहीं छोड़ता था. उसके पास बड़ी संख्या में कंडोम और गर्भ निरोधक थे. वो दिमागी तौर पर बीमार इनसान था.एक सिरफिरा और शैतान

रनजीत सिंह डेरा का बेहद अहम वालंटियर था अपनी बहन के साथ बाबा राम रहीम की दरिंदगी के बाद वो सिरसा छोड़कर चला गया. कुछ समय बाद पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में एक चिट्ठी गई. इस चिट्ठी के बाद डेरा चीफ ने अपने लोगों को कहा कि वो रंजीत सिंह को मार दें. ये बाद में साबित हुआ क्यों कि रंजीत सिंह की हत्या में शामिल पिस्तौल डेरा के मैनेजर की थी. वो एक वाकीटॉकी भी हत्या की जगह पर छूट गया था.  2009 में रिटायर हुए नरायणन को भरोसा है कि इस हत्या में भी राम रहीम को सज़ा होगी.