हामिद अंसारी पर वायरल हो रहे हैं फर्जी मैसेज, इस पोस्ट में मिलेगा हर जवाब

हामिद अंसारी पर वायरल हो रहे हैं फर्जी मैसेज, इस पोस्ट में मिलेगा हर जवाब




नई दिल्ली : एक शब्द है खौरियाना. कुछ अंधभक्त और अल्पज्ञानी उपराष्ट्रपित हामिद अंसारी के बयान के बाद बाकायदा खौरियाए हुए हैं. उन पर फिर से झूठ की तोपें दागी जा रही है. हम आपको कुछ पुराने झूठ बता रहे हैं ताकि अगली बार आपके सामने ऐसा झूठ वाट्सएप या फेसबुक पर आए तो आप उल्लू न बनें.

सोशल मीडिया पर कहा गया कि उपराष्ट्रपति पद से हटते ही उन्हें मुसलमानों की याद आ गई. लेकिन ऐसा नहीं है वो अपने पूरे कार्यकाल में बाकायदा मुसलमानों और दलितों पर अत्याचार के मामलों पर मुखर रहे.




अखलाक कांड पर बयान

ग्रेटर नोएडा के दादरी में बीफ के शक में अखलाक नाम के बुजुर्ग की कट्टरपंथी हिंदुओं ने पीटपीट कर जान ले ली थी. हर तरफ इस दुर्दांत वारदात की आलोचना की गई. बतौर उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने भी इस घटना पर अफसोस जताया. अक्टूबर 2016 में उन्होंने कहा-  ”देश के हर नागरिक को जीने का हक है और सभी की जिम्मेदारी है कि अपने पड़ोसियों की रक्षा करें. सरकार भी अधिकारों की सुरक्षा करे.”




मोदी सरकार को नसीहत

सितंबर 2015 में तत्कालीन उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने सीधे तौर पर मोदी सरकार को टारगेट किया. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को मुस्लिमों के साथ हो रहे भेदभाव को दूर करना चाहिए. इसी दौरान उन्होंने कहा कि सरकार का ‘सबका साथ सबका विकास’ नारा काबिल-ए तारीफ है. मगर इस देश के मुसलमानों को हमेशा सवालिया निशानों से देखने से बाज आना चाहिए.

जेएनयू मामले पर सख्त बयान

हामिद अंसारी ने इसी साल पंजाब यूनिवर्सिटी में कहा था कि विश्वविद्यालयों की आजादी के सामने आज चुनौती खड़ी हो गई है. उन्होंने कहा कि हाल के समय में संकीर्ण सोच का दायरा फैल रहा है. उन्होंने कहा था कि संविधान में असहमति और विरोध का जताने का अधिकार इसीलिए दिया गया है कि समाज में विचारों की आजादी बनी रहे. जेएनयू विवाद पर ये उनका बेहद साफ और मजबूत बयान था.

किसी को नहीं छोड़ा

सिर्फ मोदी सरकार के दौरान ही नहीं पहले भी हामिद अंसारी मुसलमानों को लेकर बयान देते रहे हैं. दिसंबर 2009 में उन्होंने पटना में कहा था कि आजकल मुसलमानों की बढ़ती आबादी को लेकर उनकी नई छवि बन रही है. इस दौरान उन्होंने मुस्लिमों को शिक्षा की दिशा में आगे बढ़ने और महिलाओं के उत्थान की वकालत की थी.

योग दिवस पर झूठा विवाद

21 जून 2015 को पहला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया. पीएम मोदी ने राजपथ पर हजारों लोगों के साथ योग किया. तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी योग किया. मगर उपराष्ट्रपति होते हुए हामिद अंसारी योग दिवस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए. बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव ने इस पर हामिद अंसारी की आलोचना भी की. हालांकि, उन्होंने बाद में उन्होंने माफी मांगकर अपना ट्वीट डिलीट कर दिया क्योंकि उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी की तबीयत खराब की जानकारी न होने के कारण वो सोशल मीडिय के सुर में सुर मिला बैठे थे.बाद में उन्होंने अपना ट्वीट डिलीट कर लिया था. लेकिन लोग अभी भी इसे उनके खिलाफ हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं. और आधी जानकारी सोशल मीडिया पर डाली जा रही है.




26 जनवरी की परेड में सलामी पर झूठा प्रचार

इसके अलावा 2015 में हामिद अंसारी द्वारा गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान राष्ट्रगान बजने के समय राष्ट्र ध्वज को सलामी नहीं देने पर भी काफी विवाद हुआ था. कट्टरपंथियों ने हामिद अंसारी को खूब ट्रोल किया गया था. हालांकि, बाद में उपराष्ट्रपति के ओएसडी ने स्पष्टीकरण दिया , ”गणतंत्र दिवस परेड के दौरान भारत के राष्ट्रपति सर्वोच्च कमांडर के नाते सलामी लेते हैं.

पहली तस्वीर मं मोदी सरामी दे रहे हैं जबकि दूसरी तस्वीर में अटल जी नहीं दे रहे. अंदाजा लगाना आसान है कि ये प्रोटेकोल का मामला था जिसमें प्रोटोकोल मोदी ने तोड़ा , अंसारी साहब ने नहीं

प्रोटोकॉल के मुताबिक उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को सावधान की मुद्रा में खड़ा होने की जरूरत होती है. उन्हैं सैल्यूट की मुद्रा में खड़ा नहीं होना होता लेकिन प्रधान मंत्री मोदी नये नये थे उन्हें लगा कि सलामी की मुद्रा में खड़े होना है तो वो अजीब सी हालत में खड़े रहे” इस मामले में गलती मोदी  की लेकिन निशान पर हामिद अंसारी आए. अब नये बयान आने के बाद ये तस्वीर फिर से शेयर की जा रही है.