लाल किले से भी फेंकने से बाज़ नहीं आए पीएम ? नीचे पढ़िए विश्लेषण

लाल किले से भी फेंकने से बाज़ नहीं आए पीएम ? नीचे पढ़िए विश्लेषण




प्रधानमंत्री मोदी लाल किले से अपने भाषण में भी लफ्फाज़ी मक्कारी भरी बातों से बाज़ नहीं आए ? ये सवाल ज्यादा तल्ख रहा है. इसलिए एडवांस में माफी मांगता हूं. लेकिन किन बातों की वजह से मैने ये बात कही ये भी आपको बताना ज़रूरी है. एक एक करके वो बिंदु रखे जाएंगे फिर उन पर टिप्पणी होगी.

1. ” मेरी माताएं, बहनें आज बहुत बड़ी मात्रा में, परिवार में महिलाएं भी रोजगार के लिए जाती हैं. और इसलिए रात्रि को भी उनको रोजगार का अवसर मिले, फैक्टबरियों में काम करने का अवसर मिले, इसलिए Labour Laws में परिवर्तन करने का बहुत बड़ा अहम कदम उठाया है. ”
[पुराने लेबर लॉ में महिलाओं के रात में काम करने पर रोक उनकी सुरक्षा के मद्देनज़र लगाई गई थी. उद्योंगपतियों को सस्ते में और ज्यादा दिन रात कर्मचारी मिल सकें इसलिए श्रम कानून बदला गया. इससे महिलाओं को फायदा नहीं उनके शोषण के रास्ते खोले गए हैं. वैसे भी आपने महिलाओं के लिए इतना सुरक्षित वातावरण नहीं बनाया है कि वो रात में घर से निकलें और सुरक्षित रह सकें.]




2.” पीएम मोदी ने कहा कि न गाली से समस्या सुलझेगी, न गोली से समस्या सुलझेगी, सिर्फ उन्हें गले लगाकर समस्या का हल होगा. साथ ही पीएम मोदी ने कहा कि आतंकवाद से कोई समझौता नहीं होगा. सभी को मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा. उन्होंने कहा कि सुरक्षाबलों के प्रयासों से लोग अब मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं. नक्सलवाद कम हो रहा है. ”
[आप सही कहते हैं कि गोली से समस्या नहीं सुलझेगी फिर सुलझती समस्या में गोली को किसने घुसाया. किसने पैलेट गन झोंके किसने पत्थरबाज़ों को बोनट से बांधा. अपने भाषण की अगली ही लाइन में आप कहते हैं कि सुरक्षाबलों के प्रयासों से नक्सलवद कम हो रहा है, क्या सुरक्षाबल गोलियां न चलाकर बातचीत कर रहे हैं. इसी वजह से मैने मक्कारी शब्द का प्रयोग किया ]
3. “तब भारत छोड़ो का नारा था, अब भारत जोड़ो’: आजादी के वक्त को याद करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से अपील की कि वे आपसी मेल-मिलाप को बढ़ाएं. उन्होंने हर संप्रदाय, धर्म, जाति और गरीब को एक साथ लेकर देश को आगे बढ़ाने को कहा. देश की एकता को कायम रखने के लिए उन्होंने नारा दिया, ‘तब भारत छोड़ो का नारा था, अब भारत जोड़ो.मेरे प्या रे देशवासियो, कभी-कभी आस्थाक के नाम पर धैर्य के अभाव में कुछ लोग ऐसी चीजें कर बैठते हैं, जो समाज के ताने-बाने को बिखेर देती हैं. देश शांति, सद्भावना और एकता से चलता है. जातिवाद का जहर, सम्प्रिदायवाद का जहर, देश का कभी भला नहीं कर सकता है. ये तो गांधी की भूमि है, बुद्ध की भूमि है, सबको साथ ले करके चलना; ये इस देश की संस्कृ ति और परम्पररा का हिस्साा है. हमें इसको सफलता से आगे बढ़ाना है, और इसलिए आस्थाा के नाम पर हिंसा को बल नहीं दिया जा सकता है. ”
[भारत जोड़ो का नार देते हैं और आपकी पार्टी के लोग और तो और आपके सांसद और कैबिनेट के मंत्री रोज़ एक खास वर्ग को निशाने पर लेते हैं उसे उकसाते हैं. उसकी धार्मिक आस्थाओं के विपरीत काम करने को विवश करते हैं. उत्तर प्रदेश में सरकार जानबूझकर उन्हें उकसा रही है. लोगों के खानपान की आदतों के आधार पर आप उनकी हत्याएं होने दे रहे हैं. लाल किले से भारत जोड़ो और व्यवहार में तोड़ो. ये क्या है झूठ नहीं है ? मक्कारी नहीं है ?]




4. “प्यारे प्यारे देशवासियों, आज नोटबंदी के कारण बैंको के पास धन आया है. बैंक अपनी ब्याज दर कम कर रहे हैं. मुद्रा के द्वारा सामान्य मानव को बैंक से पैसा मिल रहा है. सामान्य मानव को अपने पैरों पर खड़े होने के लिये अवसर मिल रहा है. गरीब हो, मध्यवर्ग का व्यक्ति हो घर बनाना चाहता है, तो बैंक उसको मदद करने के लिये आगे आ रहे हैं, कम ब्याज की दर से आगे आ रहे हैं. ये सारा देश के अर्थतंत्र को गति देने की दिशा में काम कर रहा है.”
[प्रधानमंत्री जी आपने ब्याज़दर कम करने का फैसला इसलिए नहीं लिया कि आप आम लोगों को सस्ता लोन देना चाहते हैं. लोन तो औकात के हिसाब से मिलता है. ज्यादातर लोग देश में अपनी कमाई की क्षमता तक लोन पहले ही ले चुके है. अपका प्रेम तो कॉर्पोरेट और अडानी जैसे बड़ेउद्योंगपतियों को सस्ता लोने देने के लिए है. बैंक जनता पर अनापशनाप चार्जेज लगा रहे हैं ताकि अपने घाटे पूरे कर सकें. अरबों की कर्जमाफी हो चुकी है और ये किसानों की नहीं उद्योगपतियों की थी. आपने तो अब कर्ज का पैसा डुबोकर दीवालिया हो जाना भी आसान बना दिया है. 6 कानून बदले हैं आपने इसके लिए. इन सक्षम और देश पर राज कर रहे उद्योगपतियों को कर्ज सस्ते करने के लिए ब्याज़ से घर चलाने वाले बुजुर्गों का आपने पेट काटा है. उन्हें मोहताज बनाया है. लोग अपने पैसे बैंक से लेने के लिए भुगतान कर रह हैं. ये सच पर पर्दा डालना नहीं तो और क्या है.]

5. ” भाइयों बहनों, एक के बाद एक कदम और मुझे विश्वास है GST के बाद उसमें और बढ़ोतरी होने वाली है. और Transparency आने वाली है. अकेले Transportation हमारा ट्रक वाला एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाता था. ये GST के बाद तीस प्रतिशत उसका समय बच गया है. check-post खत्म होने के कारण हजारों करोड़ रुपयों की तो बचत हुई है. सबसे बड़ी बचत समय की हुई है. एक प्रकार से उसकी तीस प्रतिशत Efficiency बढ़ रही है. आप कल्पना कर सकते हैं हिन्दुस्तान के Transport जगत में तीस प्रतिशत Efficiency बढ़ने का मतलब क्या होता है. एक GST के कारण इतना बड़ा परिवर्तन आया है. ”
[अगर आपके इतना ही रफ्तार और चेक पोस्ट प्रगति के मार्ग में बोझ लगते हैं तो टोल प्लाज़ा क्यों लगा दिए हैं. अच्छे खासे चल रहे मार्गों पर अब टोल है. लगातार आप टोल बढ़ा रहे हैं. पहले दिल्ली से मेरठ लोग मुफ्त में जाया करते थे अब आप वहां भी आप टोल नाके लगारहे हैं. हर टोल पर ट्रक रुकता है और वहां वक्त की बरवादी होती है. ये हिसाब भी आपको पता होना चाहिए.]

6. “हम BHIM APP को अपनाएं, आर्थिक कारोबार का हिस्सा बनाएं. हम Prepaid के द्वारा भी काम करें. और मुझे खुशी है कि Digital लेनदेन बढ़ी है. पिछले साल के मुकाबले उसमें 34 प्रतिशत का इजाफा हुआ है और Prepaid भुगतान में करीब 44 प्रतिशत का. और इसलिये कम cash वाली अर्थव्यवस्था, उसको लेकर के हमें आगे बढ़ना चाहिए.”
[ आप चाहते हैं कि हमारे पैसे का हम पहले ही भुगतान कर दें. भीम एप में ट्रांसफर कर दें फिर किसी सेवा के बदले पैसे पहले से दे दें. बिजली प्रीपेड करना चाहते हैं. यानी जो धन हमारे पास रहता था उसका ब्याज़ आपके चहेते कार्पोरेट खाएंगे. क्यों प्रीपेड जाएं. आप बता सकते हैं कि देश की जनता को प्रीपेड से क्या फायदा होगा ? हमारी कमाई पर प्रीपेड की लूट क्यों ?
प्रधानमंत्री जी ये कुछ मामूली सी बातें है जिनसे आपके चरित्र का पता लग रहा है. मालूम हो रहा है कि आप दिखाते क्या हैं और खिलाते क्या हैं.]