किम जोंग ने फिर टैस्ट की मिसाइल , ट्रंप को दी टेंशन, किया ट्वीट

प्योंगयांग : ट्रंप की फुंफकार और तरह तरह की चेतावनियों के बावजूद किम जोंग रुकने को तैयार नहीं हैं. जोंग के देश नॉर्थ कोरिया ने एक और बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया है. दक्षिण कोरिया और जापान ने भी इन परीक्षणों की पुष्टि की है. दक्षिण कोरिया की सेना ने बताया कि प्योंगयांग ने एक ‘अज्ञात बलिस्टिक मिसाइल’ छोड़ा और वह मिसाइल जापान के पास समुद्र में जाकर गिरा. इस साल की शुरुआत से लेकर अब तक उत्तर कोरिया 11 मिसाइल परीक्षण कर चुका है. इस ताजा मिसाइल परीक्षण से ठीक पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरिया के मिसाइल व परमाणु हथियार कार्यक्रम पर जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ चर्चा की थी.

दूसरी तरफ संयुक्त राष्ट्र (UN) में चीन के राजदूत ने कहा कि अगर उत्तर कोरिया के साथ कायम तनाव को कम करने का रास्ता नहीं खोजा गया, तो इसके परिणाम बेहद गंभीर और विनाशकारी हो सकते हैं. चीन का कहना है कि अगर जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं तलाशा गया, तो स्थिति काबू से बाहर चली जाएगी. ट्रंप द्वारा उत्तर कोरिया मसले पर शी चिनफिंग से बात किए जाने के एक दिन बाद राजदूत ल्यू जेई ने यह बयान दिया.

जेई ने कहा, ‘फिलहाल पश्चिमी देशों और उत्तर कोरिया के बीच बहुत ज्यादा तनाव है. हम चाहते हैं कि स्थितियां बेहतर हों.’ एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘अगर यह तनाव बढ़ता जाता है, तो देर-सवेर हालात काबू से बाहर चले जाएंगे और इसके नतीजे बेहद भयावह साबित होंगे.’ मालूम हो कि चीन उत्तर कोरिया का सहयोगी है. चीन का कहना है कि प्योंगयांग के साथ बातचीत कर इस समस्या का समाधान तलाशने की कोशिश की जानी चाहिए. उधर, अमेरिका चाहता है कि चीन उत्तर कोरिया पर दबाव बनाकर उसे अपना परमाणु कार्यक्रम रोकने के लिए तैयार करे. चीन इसके लिए तैयार नहीं है. हाल ही में ट्रंप ने ऐलान किया था कि उत्तर कोरिया को रोकने की चीन की कोशिशें नाकाम साबित हुई हैं.

इससे पहले चीन ने यह प्रस्ताव रखा था कि अगर अमेरिका और दक्षिण कोरिया अपना सैन्य अभ्यास रद्द कर देते हैं, तो इसके बदले प्योंगयांग अपनी सैन्य योजनाओं को रोक सकता है. अमेरिका का कहना है कि उत्तर कोरिया जबतक अपने परमाणु व मिसाइल परीक्षणों को नहीं रोकता, तब तक उससे किसी भी तरह की बातचीत नहीं की जा सकती है. संकेतों से मालूम होता है कि उत्तर कोरिया के मुद्दे को लेकर चीन और अमेरिका में अनबन हो गई है. पिछले हफ्ते अमेरिका के ट्रेज़री विभाग ने चीन के एक बैंक पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी. इस बैंक पर उत्तर कोरिया के साथ लेनदेन करने का आरोप है. इसके अलावा भी अमेरिका ने चीन की कुछ कंपनियों और लोगों को प्योंगयांग के साथ डीलिंग करने के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया है.

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