जब इंदिरा गांधी ने चीन को दी थी शिकस्त, भारत मां की वीरता से रक्षा की

जब इंदिरा गांधी ने चीन को दी थी शिकस्त, भारत मां की वीरता से रक्षा की




नई दिल्ली : राजनीति बड़ी अहसान फरामोश होती है. बड़ी जल्दी बुजुर्गों को योगदान को भी भुला देती है. आज जब चीन के साथ तनाव का समय है तो याद करने की ज़रूरत है इंदिरा गांधी की बहादुरी की. इंदिरा गांधी ने चीन को करारा जवाब दिया था और 1967 में उसके हलक में हाथ डालकर सिक्किम निकाल लिया था.

आज जब राजनीतिक कारणों से विरासत को भुलाने की बात हो रही है तो आपको बताते हैं कि तब क्या हुआ थ. 1967 में सिक्किम भारत का हिस्सा नहीं था . यहां के राजा तशी नामग्याल थे और उन्होंने स्वतंत्र राष्ट्र रहने का फैसला किया था. ताशी की मौत 1963 में कैंसर से हो गई. इसके बाद सिक्किम का ताज चोग्याल पाल्दन थोंडुप नामग्याल के सिर पर रखा गया

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1964 में पंडित नेहरू के निधन के बाद इंदिरा गांधी ने 1966 में सत्ता संभाली . अचानक चीन ने सिक्किम पर अपना हक जताना शुरू कर दिया.चीन ने दावा किया कि सिक्किम तिब्बत का हिस्सा था इसलिए वो चीन में रहेगा. लेकिन इंदिरा गांधी ने सख्ती दिखाते हुए सिक्किम में बीएस दास को सिक्किम का मुख्य प्रशासक नियुक्त किया. उन्होंने चोंग्याल से सिक्किम हो अपने नियंत्रण में ले लिया.

बाद में सिक्किम के प्रधानमंत्री दोर्जी ने कहा कि सिक्किम को भारत में मिला लिया जाए. उनकी अपील पर संसद ने सिक्किम में जनमत संग्रह कराया , सिक्किम के लोगों ने भारत के साथ जाना तय किया. कहने को को तो ये जनमत संग्रह था लेकिन इसके पीछे लौह महिला इंदिरा गांधी की सूझबूछ भरी रणनीति थी, राज शाही से लोकतंत्र लाना, प्रधानमंत्री का चुनाव करना और उस प्रधानमंत्री के ज़रिए जनमत संग्रह कराकर चीन को ठेंगा दिखा देना.

इस बीच 1967 में बाकायदा चीन ने सैनिक शक्ति से सिक्किम पर कब्जा जमाना चाहा. भारती सेना नेनाथू ला और चो ला फ्रंट पर ये युद्ध लड़ा. चीन को ऐसा करारा जवाब मिला था कि चीनी भाग खड़े हुये थे. इस युद्ध में 88 भारतीय सैनिक बलिदान हुये थे और 400 चीनी सैनिक मारे गए थे.

इस युद्ध में पूर्वी कमान को वही सेम मानेकशा संभाल रहे थे,जिन्होंने बाद में इंदिरा जी के नेतृत्व में बांग्लादेश बनवाया था. इस युद्ध के हीरो रहे थे राजपुताना रेजिमेंट के मेजर जोशी,कर्नल राय सिंह,मेजर हरभजन सिंह. उधर गोरखा रेजिमेंट के कृष्ण बहादुर,देवीप्रसाद और अन्य सैनिकों ने तो कमाल ही कर दिया था.

जब गोलियां खत्म हो गयी थी,तो इन गुरखों ने कई चीनियों को अपनी खुकरी से ही काट डाला था ! कई गोलिया शरीर में लिए हुए मेजर जोशी ने चार चीनी ऑफिसर को मौत के घाट उतारा ! वैसे तो कई और हीरो भी है पर ये कुछ वो नाम है जिन्हें वीर चक्र मिला और इनकी वीरगाथा इतिहास बनी !!

इतना ही नहीं भारत ने चीन पर हमेशा अपना पलड़ा भारी रखा जी 7 उपग्रह 2013 ने लांच किया. रुकमणि नाम के इस उपग्रह के ज़रिए ही चीन की हर गतिविधि पर नजर रहती है. हाल में चीनी पोत जब हिंद महासागर में दिखा तो रुकमणि ने पकड़ लिया.
बहरहाल भारत का इतिहास वीरता से भरा है और चीन को गलत फहमी में नहीं रहना चाहिए.