EXCLUSIVE: क्यों शिवराज ने बीच में ही खत्म किया उपवास, क्या थी अंदर की बात?

नई दिल्ली:  मध्य प्रदेश क मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने अपना उपवास बीच में ही छोड़ दिया है. शिवराज ने जब अनशन शुरू किया था तो कहा था कि वो तबतक  नहीं उठेंगे जबतक आंदोलन समाप्त नहीं हो जाता. लेकिन वह बीच में ही मैदान छोड़कर निकल गए.  बीजेपी नेता कैलाश जोशी ने उन्हें नारियल का पानी पिलाया. इस मौके पर उन्होंने कहा कि वह किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध हैं.

लेकिन इस खबर के पीछे की एक बड़ा खबर है. खबर ये कि आखिर बीचे में ही शिवराज अपना उपवास खत्म करके क्यों चलते बने. न तो शांति हुई. न किसानों का आंदोलन वापस हुआ. न आंदोलन की तपिश कम हई. फिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि शिवराज सिंह उपवास बीच में ही छोड़कर चल दिए.  वो भी इतना आनन फानन में. उपवास को दो ही दिन तो हुए थे.

हमने इस सवाल का जवाब जानने के लिए पार्टी और सरकार के अंदरूनी सूत्रों से जानकारी टटोलने की कोशिश की . इन लोगों का मानना था कि शिवराज अगर उपवास से नहीं उठते तो हो सकता था कि उन्हें सीएम की गद्दी से ही उठना पड़ता.

इन लोगों का कहना है कि किसानों के आंदोलन के बीच आरोपों में घिरी सरकार के मुखिया का उपवास पर बैठना सबसे खतरनाक और जोखिम भरा फैसला था. उपवास के कारण शिवराज टैंट तक सिमट गए और उनकी स्थिति कैदी की हो गई. इस बीच पार्टी में सीएम की कुर्सी हथियाने की जुगाड़ में लगे लोग अचानक  सक्रिय हो गए.

दिल्ली से केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने आपना खेमा भोपाल में गाड़ दिया वो एक के बाद एक बैठक करने लगे. जाहिर बात है इन बैठकों में शिवराज मौजूद नहीं रह सकते थे. बैठकों का विषय भी किसान आंदोलन था और जब आंदोलन की बात हुई तो शिवराज के उपवास के औचित्य पर भी सवाल खड़े किए गए. कोई सीएम ये कैसे गवारा कर सकता ह कि उसके फैसले की समीक्षा कोई और करे. यानी सीएम के सिर पर कोई बैठ जाए. उनके साथ प्रभात झा और कैलाश विजयवर्गीय ने भी गोटियां सैट करनी शुरू कर दीं. दबी जुबान में पार्टी के कई नेता ये भी कह रहे हैं कि किसान आंदोलन  के पीछे कांग्रेसियों का ही नहीं इस तिकड़ी का भी योगदान है.

जाहिर बात है ऐसी कैद से तुरंत आज़ाद होना ज़रूरी था इसलिए शिवराज ने किसानों के उपवास खत्म करने के आग्रह को तुरंत मान लिया और कैलाश जोशी के हाथों नारियल का पानी बिना सांस लिए गटक गए.

बस थोड़ा इंतज़ार..

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