नॉनवेज खाने से होने वाले बच्चे पर पड़ता है असर, सरकार की बुरी सोहबत से भी दूर रहने की सलाह

नॉनवेज खाने से होने वाले बच्चे पर पड़ता है असर, सरकार की बुरी सोहबत से भी दूर रहने की सलाह




नई दिल्ली: याद कीजिए जब अफगानिस्तान में तालिबान का उदय हुआ तो वहां धीरे धीरे विज्ञान के ऊपर धर्म को तरजीह दी जाने लगी. महिलाओं पर बुर्के की जबरदस्ती थी और उनके अकेले घर से बाहर निकलने पर भी रोक लगा दी गई. अब भारत में धार्मिक आधार पर सरकार चलाने वालों के चरण पड़ गए हैं. अब लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार की सीखों में धार्मिक एजेंडा जगह बनाने लगा है.

मोदी सरकार के आयुष मंत्री श्रीपद नाइक ने अब एक बुकलेट जारी की है, जिसमें सेहतमंद बच्चा पाने के लिए सेक्स से दूर रहने और अंडा न खाने की सलाह दी गई है. ये दोनों सीख अवैज्ञानिक हैं. महिलाओं को पौष्टिक भोजन से दूर रखने की कोशिश है. बुरी सोहबत से दूर रहने को भी कहा गया है.

 

गर्भवती महिलाओं को दी गई कई सलाह

‘मातृ एवं शिशु स्वाथ्य’ नाम की इस बुकलेट में सेहतमंद बच्चे पाने के लिए भी कई तरह की सलाह दी गई है. इसे आयुष मंत्रालय ने ही जारी किया है. बुकलेट में लिखा है-

सेहतमंद बच्चा पाने के लिए गर्भवती महिलाओं को काम-वासना से खुद को अलग रखना चाहिए.

गर्भावस्था के दौरान मांसाहारी खाने से दूर रहना चाहिए.

अपने आस-पास की दीवारों पर सुंदर तस्वीरें लगानी चाहिए.

गर्भावस्था के दौरान बुरी सोहबत से दूर रहना चाहिए.

बुकलेट में गर्भवती महिलाओं को ग़ुस्से, बुराई और आसक्ति से दूर रहने की भी सलाह दी गई है.

इसके अलावा इसमें महापुरुषों की जीवनी पढ़ने की भी सलाह शामिल है.

इस बुकलेट में गर्वभवती महिलाओं के लिए दी गई अधिकतर सलाह हालांकि आम जीवन में आपने भी कई बार सुनी होगी, लेकिन हर सलाह का वैज्ञानिक आधार नहीं बताया गया है. इस बुकलेट को तैयार करने में शामिल रहे ड़ॉक्टर ईश्वर आचार्य का कहना है कि बुकलेट में बताई गईं बातें केवल सुझाव मात्र हैं.

 

सेक्स से दूर रहने की सलाह नहीं – नाईक

चर्चा का विषय बनी इस बुकलेट पर आयुष मंत्री श्रीपद नाइक से पूछा गया तो उन्होंने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया, ‘’ये बुकलेट तीन साल पहले प्रकाशित की गई थी. इसमें उन योग आसनों को शामिल किया गया है. जिनसे गर्भवती महिलाओं को फायदा हो.

बुकलेट में कहीं भी सेक्स से दूर रहने की सलाह नहीं दी गई है. बुकलेट में योग और नैचुरोपैथी के बरसों की प्रैक्टिस के आधार पर कई तथ्य संकलित किए गए हैं. इसमें योग के जरिए सैंकड़ों सालों से अर्जित ज्ञान को भी शामिल किया गया है.’’