नेता को सरकारी डॉक्टर से इलाज क्यों नहीं कराना चाहिए? इतना हंगामा क्यों है भाई?

नेता को सरकारी डॉक्टर से इलाज क्यों नहीं कराना चाहिए? इतना हंगामा क्यों है भाई?

पटना : बिहार में अब इस बात पर विवाद हो गया है कि पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को देखने सरकारी डॉक्टर उनके घर क्यों गए ? इस खबर पर उनके विरोधी खास तौर पर बीजेपी सबसे ज्यादा जोश में है. सोशल मीडिया पर एक के बाद एक तड़ाक तड़ाक ट्वीट चिपकाए जा रहे हैं.

सबसे रोचक इस मामले में लालू यादव का पक्ष है. लेकिन ट्वीट और ट्रोल के इस दौर में इनकी सुनने वाला कोई नहीं है. लालू यादव दिल्ल के सवास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव के पिता भी है.  तेज प्रताप लालू के पिता होने के साथ साथ आइजीआइएमएस के चेयरमैन है . IGIMS यानी इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान के नियमों के मुताबिक चेयरमैन और इनके परिवार के सदस्यो को देखने संस्थान के डॉक्टर उनके घर जाते हैं.

लालू के समर्थन में यही तर्क है. तेज प्रताप उसी पते पर रहते हैं जिस पर तेज प्रताप अब तेज प्रताप के पिता को देखने डॉक्टर जा रहे हैं तो इसमें एतराज कैसा ?

विवाद तब शुरू हुआ जब इसी महीने अस्पताल के तीन डॉक्टरों और दो मेल नर्सों की ड्यूटी उनके तेज प्रताप के आवास 10, सर्कुलर रोड पर आठ दिनों के लिए लगा दी गयी. इससे संबंधित पत्र भी डॉक्टरों को जारी हुए, उन्हें 31 मई, 2017 को वहां ड्यूटी लगायी गयी और 8 जून को तेजप्रताप जब पूजा-पाठ के लिए वृंदावन गए तब जाकर इन डॉक्टरों को एक और विभागीय खत के जरिए आईजीआईएमएस वापस बुलाया गया.

आइजीआइएमएस के चिकित्सा अधीक्षक डॉ पीके सिन्हा ने का कहना है कि डॉक्टरों की ड्यूटी लालू प्रसाद जी के आवास पर नहीं, बल्कि आइजीआइएमएस के बोर्ड ऑफ गवर्नेंस के चेयरमैन तेज प्रताप यादव के घर की गयी थी. वे हमारे बोर्ड ऑफ गवर्नेंस के चेयरमैन भी हैं और अगर उनके आवास पर किसी को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो, तो हम डॉक्टरों की टीम भेज देते हैं.

यह पूछे जाने पर कि क्या ऐसा करना नियम सम्मत है, तो उन्होंने कहा कि आइजीआइएमएस एक ऑटोनोमस बॉडी है और हम बिहार सरकार के नियम से नहीं चलते, यह फैसला हमलोग परिस्थितियों के हिसाब से लेते हैं.

बीजेपी समर्थक इसे सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग बता रहे हैं. उधर लालू समर्थकों का कहना है कि कथित रूप से साहेब के लिए जब गुजरात की पुलिस किसी लड़की की जासूसी करने में लगी रहती है तब पैसे की बरबादी नहीं होती. जब प्रधानमंत्री यौन शक्ति बढ़ाने के लिए मशरूर 28000 रुपये किलो का हिमाचल का मशरूम खाते हैं तो बरबादी नहीं होती.

लालू समर्थक कहते हैं कि कि ट्वीट करने वालों में ज्यादातर वो लोग है जो नेताओं के सरकारी डॉक्टरों से इलाज कराने को लेकर उपदेश देत रहे हैं. अब ये मसला बना रहे हैं कि लालू यादव के इलाज के लिए सरकारी डॉक्टर उनके घर क्यों गए. फिलहाल विवाद जारी है