अमेरिका के हाथों देश को लुटवा रहे हैं नेता, लगातार घाटे में है भारत

अमेरिका के हाथों देश को लुटवा रहे हैं नेता, लगातार घाटे में है भारत




नई दिल्ली: क्या आप जानते हैं कि भारत के हुक्मरान अमेरिका के कदमों में देश को डाले हुए है. अमेरिका भारत से मोटी रकम ऐंठ रहा है और जनता में ये छवि बना दी गई है कि भारत अमेरिका की मदद से ही जिंदा है. ट्रंप के साथ बयान बाज़ी में जब आंकड़े सामने आने शुरू हुए तो ये पोल खुली.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पेरिस जलवायु समझौते से अपने देश के हटने की वजह बताते हुए भारत और चीन पर कई आरोप लगाये. डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि भारत जलवायु समझौते पर हस्ताक्षर कर अरबों डॉलर की कमाई कर रहा है.

अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, ट्रंप का दावा कि भारत पेरिस जलवायु समझौते में शामिल होने के एवज में अरबों डॉलर की मदद ले रहा , गलत है. और ऐसे झूठ डोनाल्ड ट्रम्प अक्सर बोलते रहते हैं. बता दें कि 2015 में भारत को मिलने वाली कुल विदेशी रकम 3.1 अरब डॉलर थी.

इस रकम में अमेरिका का योगदान महज 100 मिलियन डॉलर था. 2018 में ये रकम घटकर मात्र 34 मिलियन डॉलर रह गयी है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका से भारत को मिलने वाली मदद की रकम बेहद कम है.

भारत का मानना है कि अमेरिका से मिलनी वाली विदेशी मदद अब लगभग बंद सी हो गई है. जबकि भारत सिर्फ 100 मिलियन डॉलर का कैलिफोर्नियां बादाम ही हर साल अमेरिका से आयात करता है. इसके अलावा भारत हर साल अरबों डॉलर के हथियार भी अमेरिका से खरीदता है.

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि इस जलवायु समझौते के तहत 2020 तक भारत अपने कोयला उत्पादन को दोगुना कर सकेगा और चीन कई कोयला आधारित ऊर्जा घर खोल सकेगा लेकिन अमेरिका नहीं.

इतना ही नहीं भारत में अमेरिकी कंपनियों को सरकारों ने खुली छूट दी हुई है वो मोटा मुनाफा कमा रही हैं और देशी कंपनियां बंद हो रही हैं.

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अगर पेरिस समझौता लागू हो गया तो 2025 तक अमेरिका को 27 लाख नौकरियां गंवानी पड़ेगी. हालांकि कई अमेरिकी विशेषज्ञ भी ट्रम के इस दावे पर संदेह जता रहे हैं.