चुनाव आयोग के EVM चैलेन्ज का नतीज़ा ज़ीरो, हमेशा संदेह से देखे जाएंगे चुनाव, सवाल वहीं के वहीं

चुनाव आयोग के EVM चैलेन्ज का नतीज़ा ज़ीरो, हमेशा संदेह से देखे जाएंगे चुनाव, सवाल वहीं के वहीं

नई दिल्ली : चुनाव आयोग ने शनिवार को बहुचर्चित ईवीएम चैलेंज का आयोजन किया जिसमें केवल सीपीएम और एनसीपी ही पहुंची। ईवीएम हैकिंग चैलेंज में किसी भी पार्टी ने हिस्सा नहीं लिया लेकिन मशीन के तमाम सुरक्षा इंतजामों के विस्तृत जानकारी ली। इसके साथ ही चुनाव आयोग इस बात को लेकर निश्चिंत हो गया कि उसन अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली. याद कीजिए कांग्रेस ने कहा था कि शक दूर किया जाना चाहिए. राहुल गांधी के अलावा अखिलेश यादव ने भी कहा था कि शक दूर हो. केजरीवाल ने कहा था कि हैकिंग होती है. मायावती ने भी गड़बड़ी की बात कही. क्या संदेह दूर हो गया? क्या चुनाव नतीजों पर अब कोई संदेह नहीं करेगा? असल चुनाव आयोग का इरादा यूपी चुनाव में लगे आरोपों से झुठलाने भर का रहा. लेकिन इस चैलेन्ज से हासिल क्या हुआ? क्या उन सवालों के जवाब मिल गए जो लगातार लग रहे थे? क्या वो सारे वीडियो वो सारी प्रक्रियाएं और वो सारे डेमॉन्स्ट्रेशन बेकार हो गए? क्या सारी बाते झूठी हो गईं?

इससे पहले कि आप कोई नतीजा निकालें हम आपको बताना चाहते हैं कि चुनाव आयोग के ईवीएम चैलेन्ज से किन सवालों का जवाब मिलना था और कितने जवाब अनुत्तरित रह गए. ये सवाल KnockingNews ने 29 अप्रेल को उठाए थे . इन सवालों का जवाब जबतक नहीं मिलता हर चुनाव के नतीजों पर संदेह के बादल छाए रेहंगे, इस संदेह को दूर करना चुनाव आयोग की ज़िम्मेदारी थी.

हम सवाल जवाबों में इन सभी मुद्दों तो पिरोने की कोशिश कर रहे हैं.
1. ईवीएम में हेरा फेरी क्या संभव है ?
जवाब- जी हां संभव है. आप इसे कई तरह से साबित किया गया है. खुद बीजेपी इसपर सुप्रीम कोर्ट से केस जीत चुकी है. इसके बाद वीवीपैट व्यवस्था लागू करने का आदेश दिया गया था.
2. अबतक वीवीपैट लागू क्यों नहीं हुई?
जवाब – चुनाव आयोग ने अपने आधिकारिक जवाब में अदालत से कहा है कि वीवी पैट को केन्द्र सरकार लटका रही है. कई बार फंड मांगा गया लेकिन मोदी सरकार ने नहीं दिया.
3. हमारी ईवीएम नेटवर्क से नहीं जुड़ती इसलिए हैकिंग नहीं हो सकती ?
जवाब – सही है हमारी ईवीएम नेटवर्क से नहीं जुड़ती. जब 2009 में चुनाव आयोग ने चुनौती दी थी तो ठीक एक साल बाद अमेरिका के मिशीगन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने बाकायदा मशीन को हैक करके दिखाया. उन्होंने बताया कि मशीन के मूल सर्किट को छूने की ज़रूरत नहीं होती. मशीन की हूबहू स्क्रीन बना ली जाती है और उसपर ब्लूटूथ या एसएमएस के ज़रिए मनचाहा डाटा डिस्प्ले किया जा सकता है.

4. कड़ी सुरक्षा में रखी ईवीएम का डिस्प्ले बदलना आसान नहीं है ये मज़ाक ही होगा कि कोई इतना बड़ा काम कर दे?
जवाब- कई जगहों पर नकली ईवीएम पकड़ी जा चुकी हैं. खुद प्रधानमंत्री मोदी के गृह राज्य गुजरात में 25 अक्टूबर को एक फर्जी ईवीएम मशीन मिली. चुनाव आयोग ने कहा कि ये ईवीएम मशीन ( इस लिंक इंडिया टुडे की रिपोर्ट पढ़ सकते हैं.) जब नकली ईवीएम मशीन मिल सकती है तो हेराफेरी क्यों नहीं हो सकती.
5. ईवीएम मशीन की चिप में डाटा से छेड़छाड़ संभव नहीं फिर हेरोफेरी कैसे?
जवाब- आजतक चुनाव आयोग ने ईवीएम के सॉफ्टवेयर में किसी भी तरह की छेड़छाड़ की जांच नहीं कराई है. सुप्रीम कोर्ट में मामला जाने के बावजूद कभी इसका ऑडिट नहीं किया गया. आज भी चुनाव आयोग के पास अपनी चुनाव प्रक्रिया को छोडकर कोई ऐसा आधार नहीं है जिसके बलपर वो ईवीएम को सही साबित कर सके. वो अपनी प्रक्रिया की दुहाई देता है जिसके तोड़ पहले ही सामने आ चुके हैं.
6. ईवीएम की खराबी हो हेराफेरी कहा जा रहा है, खराब तो कोई भी मशीन हो सकती है?
जवाब- ईवीएम खराब होगी तो बंद पड़ जाएगी. खुद चुनाव आयोग कहता है कि ये कैल्क्युलेटर से ज्यादा कुछ नहीं. अगर कैल्क्युलेटर खराब होता है तो ऐसा तो नहीं करता कि वो दो से दो का गुणां करने पर भी 4 दिखाए और 5 से गुणा करने पर भी 4 दिखाए. अगर ऐसा है तो ईवीएम मशीन किसी एक ही पार्टी को वोट क्यों देती है. ऐसी की मशीनें सामने आ चुकी हैं. आसाम में ऐसी मशीन मिली. भिंड में ऐसी मशीन मिली, धौलपुर में ऐसी मशीन मिली.

6. अब तो वीवीपैट आ रहा है अब क्या फिक्र ?
वीवीपैट में दो खामियां है.
1. उपर बताई गई मिशिगन यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट के मुताबिक ईवीएम का सिर्फ डिस्प्ले हैक किया जाता है. यानी जब आप वोट डालेंगे तो पर्ची भी वहीं निकलेगी जिसे आपने वोट डाला. बत्ती भी वही जलेगी लेकिन काउंटिंग के समय स्क्रीन पर वह दिखेगा जो हैकर दिखाना चाहेगा.
2. वीवीपैट को लेकर कानून बेहद डरावना है. आपने वीवीपैट में गड़बड़ी की शिकायत की. अगर आपकी शिकायत किसी भी वजह से गलत साबित हुई तो आपको 6 महीने की सज़ा होगी. सरकारी प्रक्रिया में ये आम हे कि शिकायत के बाद पूरा सिस्टम छिपाने में लग जाता है. अगर अफसर हेराफेरी को सही साबित करने में कामयाब हो गए,जिसकी संभावना से कोई भी इनकार नहीं कर सकता तो शिकायतकर्ता सीधे जेल जाएगा. जाहिर बात है ऐसे में कोई शिकायत नहीं करेगा.
आम आदमी पार्टी के नये आरोपों और विधानसभा में हैकिंगे के प्रदर्शन से एक चीज़ और सामने आई वो ये कि ईवीएम का बोर्ड बदलकर आराम से पूरी हैकिंग हो सकती है. इसको लेकर भी चुनाव आयोग कुछ साबित नहीं कर सका.

ये सवाल भी है जिनका जवाब चुनाव आयोग के चैलेन्ज से नहीं मिला.
1. क्या ईवीएम में गड़बड़ी संभव है?
उत्तर- जी बिल्कुल संभव है. इवीएम मशीन सॉफ्टवेयर से चलती है और आप सॉफ्टवेयर की गतिविधियों को देख नहीं सकते. किसी भी सॉफ्टवेयर में बदलाव संभव है. उसके लिए स्क्रू ड्राइवर की ज़रूरत नहीं होती. सॉफ्टवेयर एक वायरस की तरह मशीन में डाला जा सकता है और उन्हें हैक किय जा सकता है. 13 सितंबर 2006 में डाइवोल्ड इलैक्ट्रानिक वोटिंग मशीन को कैसे हैक किया जा सकताहै इसका बाकायदा प्रदर्शन किया गया. प्रिंस्टन के कंप्यूटर साइंस के प्रोफेसर Edward Felten ने एक मालवेयर लगाकर बताया कि बिना मशीन को छुए या उसके पास गए मशीन के मेमोरी कार्ड पर वोटों की संख्या को बदला जा सकता था. ये मॉलवेयर एक ऐसा वायरस अपने आप तैयार कर लेता था जो अपने आप एक मशीन से दूसरी मशीन तक चला जाता था.

2. किस तरह की गडबड़ी संभव है?
उत्तर- a- किसी मशीन में दिया जाने वाला हर पांचवा, छठा या दसवां (जो भी वोट आप प्रोग्राम करें) अपने आप आपकी चहेती पार्टी के खाते में जा सकता है. मतदाता वही बटन दबाएगा बत्ती भी मतदाता के पसंद किए गए चुनाव चिन्ह के सामने जलेगी लेकिन वोट वहीं जाएगा जहां कि सॉफ्टवेयर डालेगा.
b- ईवीएम में वोट उतने ही रजिस्टर रहें लेकिन ईवीएम से डाटा ट्रांसफर कर ते समय गणना वाले कंप्यूटर में बदल जाए और वो हैकर की मर्जी के आंकडे दिखा दे.
1. क्या ईवीएम में गड़बड़ी पहले भी हो चुकी है?
उत्तर- जी हां 2005 में Black Box Voting नाम की संस्था ने पूरी ये साबित करने दिखाया कि किस तरह ईवीएम को हैक किया जा सकता है.लियोन काउंटी के में उन्होने एक मॉक चुनाव आयोजित किया और बाकायदा गड़बड़ी करके दिखाई. ये जानकारी तफ्सील से विकीपीडिया पर ली जा सकती है.
13 सितंबर 2006 में डाइवोल्ड इलैक्ट्रानिक वोटिंग मशीन को कैसे हैक किया जा सकताहै इसका बाकायदा प्रदर्शन किया गया.प्रिंस्टन के कंप्यूटर साइंस के प्रोफेसर Edward Felten ने एक मालवेयर लगाकर बताया कि बिना मशीन को छुए या उसके पास गए मशीन के मेमोरी कार्ड पर वोटों की संख्या को बदला जा सकता था. ये

मॉलवेयर एक ऐसा वायरस अपने आप तैयार कर लेता था जो अपने आप एक मशीन से दूसरी मशीन तक चला जाता था.
4. क्या गड़बड़ी होने पर जांच संभव है?
जी नहीं. वोटिंग मशीन की इस बात के लिए पिछले 10 साल से ज्यादा आलोचना होती रही है क्योंकि इसमें पड़ने वाले वोटों का ऑडिट नहीं किया जा सकता. मतलब एक बार डाटा चला गया फिर आप कुछ नहीं कर सकते
5. मशीन का गुप्त ज्ञान
ईवीएम में अंदर क्या है इसका पता लगाया ही नहीं जा सकता. एक्सपर्ट लगातार मांग करते रहे हैं कि ईवीएम का सॉफ्टवेयर सबको उपलब्ध होना चाहिए ताकि वो जांच कर सकें कि कहीं गड़बड़ तो नहीं है.

दर असल चुनाव आयोग को इन सभी सवालों के सिलसिलेवार तार्किक खंडन करने चाहिए थे. जिनका उत्तर नहीं मिल सकता था उसका हैकाथॉन ही रास्ता था लेकिन आयोग भागता रहा. उसने एक फॉर्मेलिटी की और पल्ला झाड़ लिया लेकिन सवाल जहां थे वहां रह गए.