कपिल मिश्रा की कांय-कांय से केजरीवाल को नुकसान कम फायदा ज्यादा

कपिल मिश्रा की कांय-कांय से केजरीवाल को नुकसान कम फायदा ज्यादा




नई दिल्ली: कभी आम आदमी पार्टी  की तरफ से खास भौंकम भौकाई करने वाले और केजरीवाल के सबसे नज़दीक चमचों में से एक कपिल मिश्रा के निशाने पर अब खुद केजरीवाल हैं. भले ही केजरीवाल ने खुद को हाथी मानकर चुपचाप चलते रहने और कपिल मिश्रा की आवाज़ों की तरफ ध्यान न देने का फैसला किया हो लेकिन इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ रहा. बल्कि आम आदमी पार्टी को फायदा ही फायदा हो रहा है. मजेदार बात ये है कि मीडिया भी कपिल की तरफ ध्यान खीचकर केजरीवाल का फायाद करने में लगा है.

गौर करें तो ऐसा लग रहा है कि कपिल का अभियान और अनशन केजरीवाल के खिलाफ नहीं उनके पक्ष में ही काम कर रहा है. हो सकता है कि आप फिलहाल इस बात पर यकीन न करें लेकिन नीचे दि गए पांच तर्क पढ़ने के बाद जरूर आपकी राय बदल जाएगी.

पंजाब-एमसीडी में हार की बदनामी से पीछा छूटा

अभी कुछ ही दिन हुए आम आदमी पार्टी पंजाब और गोवा विधानसभा के साथ-साथ एमसीडी चुनावों में बुरी तरह हारी है. आप अपनी हार पर गंभीरता से मंथन करने की शुरुआत कर ही रही थी कि कपिल मिश्रा के बागी तेवरों ने मीडिया की सुर्खियों में जगह बना ली और हार की बदनामी पीछे और पीछे छूटती चली गई. अब चर्चा हो रही है तो केवल केजरीवाल पर लगे आरोपों की और कपिल मिश्रा की ‘मौकापरस्ती’ की. मौकापरस्ती इसलिए क्योंकि लोगों का कहना है कि कपिल मिश्रा को ये सब तभी क्यों याद आया जब उन्हें मंत्री पद से हटा दिया गया.

पार्टी में टूट टली

काफी लंबे समय से ऐसा लग रहा था कि भारतीय राजनीति की तस्वीर बदलने के लिए अवतरित हुई आम आदमी पार्टी बहुत ही कम समय में टूटने वाली पार्टी बन जाएगी लेकिन ‘कपिल बवंडर’ ने इसके बिखर रहे तिनकों को एक साथ ला दिया. पार्टी में कई नेता केजरीवाल की तानाशाही के आरोप लगा चुके हैं. देशभक्त कवि के रूप में अपनी पहचान बना चुके कुमार विश्वास भी अलग-अलग होते-होते रुके तो कहीं न कहीं उसमें कपिल फैक्टर भी काम कर रहा था.

जल संकट पर बच गए

दिल्ली इन दिनों सूरज की भीषण तपिश झेल कर निकली है. पिछले दो दिनों से बदली ने थोड़ी राहत दी है लेकिन ऐसा नहीं है कि अब ऐसा ही रहने वाला है. ये राहत फौरी है क्योंकि सूरज फिर वही प्रचंड गर्मी लेकर आएगा. गर्मी के मौसम में दिल्ली में जल संकट की बात न हो ऐसा शायद ही किसी साल हुआ हो. इस साल भी पानी की समस्या है. पानी पर राजनीति भी है. लेकिन, इसके चर्चे अखबारों में अंदर के पन्ने पर हैं तो टीवी पर बमुश्किल जगह बना पा रहे हैं. वजह फिर वही कपिल मिश्रा. रोजाना कपिल कुछ नया ले आते हैं और मीडिया कवरेज उन तक सीमित हो कर रह जाता है.

मेट्रो किराया बढ़ा लेकिन चर्चा नहीं

कहा जाता है कि दिल्ली मेट्रो देश की राजधानी की लाइफलाइन है. पिछले हफ्ते बुधवार (10 मई) से मेट्रो का किराया बढ़ गया कहीं कोई आपत्ति नहीं हुई. मेट्रो सवारियों के मुताबिक उनका किराया लगभग 60 से 70 प्रतिशत तक बढ़ चुका है. जरा उम्मीद कीजिए कि अगर दिल्ली में कपिल मिश्रा का एपिसोड न चल रहा होता तो क्या मेट्रो किराए पर इस बेतहाशा वृद्धि पर ऐसी शांति होती.

विरोधी भी आए साथ

सबसे खास बात जो कपिल मिश्रा के आरोपों के बाद केजरीवाल के पक्ष में हुई कि उनके विरोधी भी उन्हें डिफेंड करते नजर आए. कभी केजरीवाल के साथ काम करने वाले और अब अलग हो अपनी पार्टी (स्वराज इंडिया) बना चुके योगेंद्र यादव ने कहा कि केजरीवाल करप्शन नहीं कर सकते. वहीं दूसरी ओर काफी समय से अरविंद से नाराज कुमार विश्वास ने भी पब्लिक डोमेन में और सोशल मीडिया पर कहा कि अरविंद भ्रष्टाचार करेगा ये मैं सोच भी नहीं सकता.

इस मामले पर इंटरनेट जोक: पहले कपिल का मतलब कॉमेडी वाला कपिल था , अब कपिल मिश्रा हो गया.