एक फर्जी खबर से कैसे पगला गई पूरी दुनिया, भारत से पाकिस्तान तक बवाल

एक फर्जी खबर से कैसे पगला गई पूरी दुनिया, भारत से पाकिस्तान तक बवाल




नई  दिल्ली: पहले पत्रकार ठोक बजाकर ही खबरें दिखाते थे. उन्हें दस बार इधर उधर से क्रॉस चेक करते थे उनकी सचाई की जांच करते थे लेकिन अब जमाना बदल गया है. भेड़ भी इतनी आंख बंद करके एक दूसरे के पीछे नहीं भागतीं. हाल में एक फर्जी खबर के पीछे मीडिया आंख ंबद करके भागा. पूरे मोदी समर्थक समाज ने गालियां देनी शुरू कीं और देश भर में वामपंथियों के खिलाफ गंंदगी भरा महौल बन गया. भारत ही नहीं पाकिस्तान के मीडिया का एक हिस्सा भी बौरा गया. क्या था पूरा मामला जानने के लिए पढि़ए द वायर की ये स्टोरी-

सोमवार को भाजपा सांसद और अभिनेता परेश रावल किए गए विवादित ट्वीट (जिसे अब डिलीट किया जा चुका है) के पीछे बुकर विजेता लेखक अरुंधति रॉय के श्रीनगर में दिए गए एक इंटरव्यू की फर्ज़ी ख़बर थी. अरुंधति ने ये इंटरव्यू कभी दिया ही नहीं था. ट्विटर पर परेश रावल के इस बयान की वक़ालत करने वालों की भी कमी नहीं रही, साथ ही इसके लिए परेश रावल को कड़ी आलोचना का सामना भी करना पड़ा.

इस ट्वीट में भाजपा सांसद ने लिखा था, ‘Instead of tying stone pelter on the army jeep tie Arundhati Roy!’ यानी सेना की जीप पर पत्थरबाज़ की जगह अरुंधति रॉय को बांधा जाना चाहिए.

इशारा 9 अप्रैल को हुई उस घटना की ओर था जहां एक कश्मीरी नागरिक को ‘मानव ढाल’ की तरह सेना की जीप पर बांधा गया था. रावल के इस ट्वीट ने बहुत से और लोगों को अरुंधति के ख़िलाफ़ अपने-अपने इरादे ज़ाहिर करने का मौका दे दिया. किसी का कहना था कि उन्हें पकड़ कर क़ैद कर देना चाहिए, वहीं कुछ उन पर हमला करने, जलाने और गोली मारने की सलाह भी दे रहे थे.

सीएनएन-आईबीएन टीवी चैनल पर सोमवार रात को हुई एक लाइव बहस में एंकर भूपेंद्र चौबे ने बताया कि परेश रावल का ये बयान अरुंधति के दिए एक इंटरव्यू की वजह से आया है और इसके बाद उन्होंने एक फेसबुक पेज का वो लिंक दिखाया, जिसके बाद परेश ने ट्विटर पर ज़हर उगलना शुरू किया था.

सोमवार रात को द वायर से बात करते हुए अरुंधति ने कहा, ‘ये सब बकवास है.’ उन्होंने यह भी बताया कि वे बीते समय में कश्मीर गई ही नहीं है और न ही कश्मीर पर कोई बयान दिया है. कश्मीर पर आखिरी बार उन्होंने पिछले साल एक छोटा लेख आउटलुक के लिए लिखा था.

इस फेसबुक पोस्ट का स्रोत एक दक्षिणपंथी वेबसाइट पोस्टकार्ड डॉट न्यूज़ थी, जो फेक न्यूज़ चलाने के लिए जानी जाती है. इस वेबसाइट पर इसी हेडिंग से यह ख़बर 17 मई को प्रकाशित की गई थी. स्टोरी पर बाइलाइन में ऐश्वर्या एस नाम दिया गया था.

इस ख़बर में लिखा था:

‘ये महिला जो खुद को पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता बताती है, दशकों से आतंकवादियों के साथ खड़ी है. हाल ही में एक पाकिस्तानी अख़बार टाइम्स ऑफ इस्लामाबाद को इंटरव्यू दिया है, जहां उन्होंने आतंकियों के ख़िलाफ़ भारत सरकार के कार्रवाई करने पर उसकी आलोचना की है.

उन्होंने कहा, ‘भारत कभी भी घाटी पर कब्ज़ा करने के इरादे में कामयाब नहीं हो पाएगा भले ही उसकी सेना 7 लाख से 70 लाख हो जाए. आगे यह भी कहा कि कश्मीरी दशकों से अपने भारत-विरोधी रवैये को लेकर दृढ़ हैं.’

हालांकि पोस्टकार्ड.न्यूज़ द्वारा इसका स्रोत का कोई लिंक नहीं दिया गया, पर उसी दिन ऐसा ही एक लेख हिंदुत्ववादी एक और फेक न्यूज़ वेबसाइट सत्यविजयी डॉट क पर प्रकाशित हुआ, जिस पर ‘आनंद’ नाम की बाइलाइन दी गई थी. एक तीसरी हिंदुत्ववादी फेक न्यूज़ वेबसाइट दइंडियन वाइस डॉट कॉम समान लेख अंकिता के नाम की बाइलाइन के साथ छापा.

कुछ और फेक न्यूज़ वेबसाइट जैसेद रिसर्जेंन्ट इंडिया डॉट कॉम,रिवोल्ट प्रेस डॉट कॉम वायरलदहिंदूराष्ट्र डॉट कॉम पर भी इसी तरह के लेख थे. वहीं इंटरनेटहिंदू डॉट इन नाम की वेबसाइट ने इस लेख का थोड़ा अलग वर्ज़न प्रकाशित किया, जहां उन्होंने टाइम्स ऑफ इस्लामाबाद के स्रोत का लिंक भी दिया था.

टाइम्स ऑफ इस्लामाबाद एक राष्ट्रवादी पाकिस्तानी वेबसाइट है न कि अख़बार. इस वेबसाइट में 16 मई को डेटलाइन में श्रीनगर लिखते हुए एक ख़बर प्रकाशित की गई थी, जिसका हेडिंग था ‘Even 70 lakh Indian Army cannot defeat Kashmiris: Arundhati Rai’ (70 लाख की भारतीय सेना भी कश्मीरियों को नहीं हरा सकती: अरुंधति रॉय) इस आर्टिकल में स्रोत ‘न्यूज़ डेस्क’ लिखा था, जिससे ये बताने की कोशिश की गई थी कि श्रीनगर के हालिया दौरे पर अरुंधति ने यह बयान दिया था. यहां लिखा था:

‘श्रीनगर के अपने हालिया दौरे में उन्होंने कहा कि भारत कभी भी घाटी पर कब्ज़ा करने के इरादे में कभी कामयाब नहीं हो पाएगा भले ही उसकी सेना 7 लाख से 70 लाख हो जाए. आगे यह भी कहा कि कश्मीरी सालों से अपने भारत-विरोधी रवैये को लेकर दृढ़ हैं. उन्होंने भारत सरकार का मज़ाक उड़ाते हुए यह भी कहा कि उन्हें ऐसी सरकार पर दया आती है जो लेखकों को उनके विचार अभिव्यक्त करने से रोकती है और नाइंसाफी के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वालों को जेल में डाल देती है, वहीं भ्रष्टाचारी, बलात्कारी और अपराधी खुले घूमते हैं.’

रेडियो पाकिस्तान ने भी 16 मई को एक आर्टिकल साझा किया जिसका शीर्षक था ‘अरुंधति रॉय ने अधिकृत कश्मीर में भारतीय हमले को शर्मनाक बताया.’ रेडियो पाकिस्तान और टाइम्स ऑफ इस्लामाबाद दोनों ही ने कहीं भी अरुंधति के इस बयान का स्रोत नहीं बताया. वही पाकिस्तान के जियो टीवी की वेबसाइट में अरुंधति के बयान का स्रोत ‘कश्मीर मीडिया सर्विस’ को बताया.

कश्मीर के पत्रकारों के मुताबिक कश्मीर मीडिया सर्विस कोई मीडिया संस्थान नहीं है बल्कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के आतंकी संगठन का प्रचार करता है. कश्मीर मीडिया सर्विस की वेबसाइट तो है पर उस वेबसाइट पर अरुंधति के इस इंटरव्यू या बयान से संबंधित कोई ख़बर नहीं है.

इसके बाद पाकिस्तान के एआरवाई चैनल में भी अरुंधति के बयान को दिखाया, जिसके आधार पर मयंक सिंह ने एक अमेरिकी वेबसाइट फेयर आब्जर्वर पर एक लेख लिखा, जहां उन्होंने अरुंधति के इस तरह का बयान देने पर ग़ुस्सा ज़ाहिर किया.

मयंक सिंह का यही लेख एक और वेबसाइट न्यूज़लॉन्ड्री ने भी प्रकाशित किया. सोमवार 22 मई को सीएनएन-आईबीएन चैनल पर हुई बहस में भाजपा प्रवक्ता ने अरुंधति के बयान का स्रोत बताते हुए मयंक सिंह के इसी लेख का हवाला दिया, जिसे एंकर भूपेंद्र चौबे ने भी सही बताया.

इस तरह सरहद के दोनों तरफ ग़ुस्से और उन्माद में भरी इस तरह की न्यूज़ रिपोर्टिंग के बीच सच यह है कि अरुंधति रॉय हाल ही में कश्मीर गई ही नहीं और न ही किसी इंटरव्यू में इस तरह का कोई बयान ही दिया, जिसका आरोप उन पर लगाया जा रहा है.

अरुंधति लंबे समय से भारत सरकार की जम्मू कश्मीर नीतियों की आलोचक रही हैं. 2010 में उनके बयान कि कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा नहीं है  पर विवाद खड़ा हुआ था और सरकार ने उन पर राजद्रोह का मुकदमा चलाने की भी सोची थी, हालांकि बाद में ऐसा नहीं हुआ. पिछले साल आउटलुक के लिए लिखे गए अपने लेख में उन्होंने बुरहान वानी की मौत के बाद राज्य में हो रही हिंसा को ख़त्म करने का अनुरोध करते हुए बातचीत के ज़रिये घाटी में अमन लाने की बात कही थी.

इस तरह अरुंधति के बिना कश्मीर जाए, बिना कोई इंटरव्यू या बयान देने के बावजूद उठ खड़ा हुआ यह विवाद दिखता है कि किस तरह छुपे हुए राजनीतिक एजेंडा के तहत झूठी ख़बरें बनाई और फैलाई जाती हैं.

इस तरह की फेक न्यूज़ का शिकार बनने वालों में बड़े-बड़े नाम शामिल हैं. मशहूर एंकर अरनब गोस्वामी इसी श्रेणी में शामिल हैं, जो एनडीए नेता और सांसद राजीव चंद्रशेखर के नए समाचार चैनल ‘रिपब्लिक’ के प्राइम टाइम एंकर हैं. उन्होंने अपने कार्यक्रम में अरुंधति पर हमला करते हुए उन्हें ‘one-book whiner wonder’ (एक किताब लिखने और हमेशा शिकायत करने वाली) कहा. उन्होंने कहा:

‘वे भारतीय सेना को तरह-तरह के नामों से बुलाते हैं, वे सब साथ में आते हैं, ख़ासतौर पर लुटियंस मीडिया, झूठी नकली उदारवादियों की भीड़… वे हमारी सेना को गाली देने के लिए साथ आते हैं, एक पूर्व नियोजित तरीके से मिलकर. अब एक क़िताब लिखकर मशहूर हुई हमेशा शिकायत करने वाली अरुंधति रॉय सामने आई हैं, जिन्होंने भारतीय सेना पर सवाल उठाए हैं.’

इस पूरे विवाद को जो बात दिलचस्प बनाती है वो ये कि कैसे एक ही झूठी ख़बर अलग-अलग राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए इस्तेमाल की जाती है. पाकिस्तान में अरुंधति के कथित इंटरव्यू की झूठी ख़बर को भारत सरकार की कश्मीर नीतियों की आलोचना करने के लिए प्रयोग किया गया, वहीं भारत में हिंदुत्व झुकाव वाली फेक न्यूज़ वेबसाइट इसे मनगढ़ंत बयानों के साथ राष्ट्रवादी भावना के साथ मोदी सरकार की कश्मीर नीति की आलोचना करने वालों के ख़िलाफ़ इस्तेमाल कर रही थीं.

जनता को जानना होगा कि वे क्या पढ़कर उस पर यकीन करते हैं. वहीं मीडिया को भी ज़रूरत है कि किसी ख़बर से राई का पहाड़ बनाने से पहले उसकी पुष्टि कर ली जाए.