बिहार में ‘डीजल’ 45 रुपये लीटर मिल रहा है डीजल

बिहार में ‘डीजल’ 45 रुपये लीटर मिल रहा है डीजल

नई दिल्ली: भारत में डीजल का दाम 45 रुपये लिटर. जी हां आपको यो भले ही सपने की बात लगे या किसी पार्टी का चुनावी घोषणा पत्र लेकिन भारत के कई हिस्सों में ये दाम हकीकत हैं.

पेट्रोल की तुलना में इस डीजल की कहीं ज्यादा खपत है. विभिन्न कंपनियों के पेट्रोल पंप पर तय रेट की तुलना में ग्रामीण इलाकों के खुदरा विक्रेता के यहां आश्चर्यजनक ढंग से बहुत कम रेट पर डीजल सहज उपलब्ध है. बिहार का बिंदुपुर नकली डीजल का बड़ा उत्पादक क्षेत्र है. बिदुपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में रोड किनारे व गांवों में 45 रुपए लीटर डीजल आसानी से मिल जाता है. वहीं भारत पेट्रोलियम कंपनी के पंप पर 60.49 और इंडियन पेट्रो पर 60.52 प्रति लीटर डीजल मिल रहा है.

दर असल ये जीजल नकली है. केरोसिन तेल की जरूरत कम होने के बाद जन वितरण विक्रेता व केरोसिन तेल डिपो वाले इसकी कालाबाजारी कर रहे हैं. सब्सिडी वाले केरोसिन तेल से अब पहले की तुलना में कहीं ज्यादा नकली डीजल बनाया जा रहा है. पूरे जिले में नकली डीजल बनाने का कारोबार फल-फूल रहा है.

खासकर वैसे ग्रामीण इलाके जहां पंप दूर हैं व पंप रेट से 15 से 20 रुपए दर कम होने के कारण नकली डीजल की खूब बिक्री हो रही है. नकली ईंधन के प्रयोग से वाहनों के साथ पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है.

पेट्रोल से नकली डीजल की ज्यादा खपत

कार, बाइक में ही ज्यादातर पेट्रोल की खपत होती है. ये कार-बाइक वाले इंजन की सलामती के लिए इंधन की गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं करते. सफर में निकले हों और अचानक पेट्रोल खत्म हो जाए, आसपास कोई पंप नहीं है तभी अगले पंप तक जाने लायक तेल रोड किनारे खुली किसी दुकान से खरीदते हैं. इसलिए पेट्रोल की तुलना में नकली डीजल की खपत कहीं ज्यादा है.

कौन है नकली ईंधन के खरीदार

छोटे व्यवसायिक वाहनों में टू सीटर टैंपों में ही पेट्रोल इंजन लगा है. इससे ज्यादा सीटों वाली विक्रम, पियाजो व अन्य कंपनियों के टेंपो डीजल से चलते हैं. इसके अलावा गांवों में खेती एवं ढुलाई के लिए ट्रैक्टरों का प्रयोग होता है. मालिक ड्राइवर रखकर गाड़ियों को चलवाते हैं. मजदूरी के अलावा अतिरिक्त कमाई हो ये टेंपों और ट्रैक्टर चालक, पंपिंग सेट रखने वाले किसान मुनाफा और बचत के लिए पंप के बजाए सस्ती डीजल गांव के दुकानों से ही खरीदते हैं.

डीजल बनाने में मुनाफा कितना

सब्सिडी वाला केरोसिन लोगों को 18.40 रुपए प्रति लीटर मिलता है. लोग तकरीबन 10 रुपए मुनाफा लेकर अपने कोटे का केरोसिन तेल बेच देते हैं. डीलर व तेल डिपो वाले उपभोक्ताओं से भी कम रेट यानि 22 से 25 रुपए लीटर पर तेल कालाबाजारी कर देते हैं. बाजार में इसकी कीमत 30 से 35 रुपए है. नकली डीजल बेचने वाले व बनाने वाले को प्रति लीटर 10 रुपए का मुनाफा हो रहा है.

इस तरह बनता है नकली डीजल

नकली डीजल बनाने की प्रक्रिया बहुत ही आसान है. लागत भी काफी कम आती है. सबसे पहले केरोसिन का कलर चेंज किया जाता है. कलर चेंज करने के लिए धंधेबाज लगभग चालीस लीटर केरोसिन में दस मिलीलीटर सल्फ्यूरिक एसिड डालते हैं. इसके बाद बंद जार को कुछ देर तक हिलाया जाता है, ताकि एसिड केरोसिन के साथ पूरी तरह से मिल जाए. इसके बाद केरोसिन का रंग सफेद हो जाता है. इसके बाद जार में करीब 250 एमएल मोटा मोबिल अथवा सरसों, राई की पेराई में निकला मोटा गाद, लाल रंग का अक्स देने के लिए दो पुड़िया घरेलू सिंदूर मिलाकर खूब हिलाया जाता है. अब नकली डीजल बनकर तैयार है. बिना लैब टेस्ट के असली-नकली का भेद कर पाना मुश्किल होगा.

बिदुपुर में 100 से ज्यादा खुदरा दुकानें

बिदुपुर में 6 पेट्रोल पंप होने के बावजूद पूरे इलाके में 100 से ज्यादा खुदरा दुकानें हैं. बिदुपुर का चकौसन, दाउदनगर, रहिमापुर, माइल, मायाराम पेठिया, पानापुर, चेचर में स्पेशली व चाय, पान गुमटियों, किराना दुकान के आगे खुले में जार रखकर पेट्रोल-डीजल की बिक्री हो रही है. इसमें अधिकांश नकली ही पेट्रोल-डीजल बेच रहे हैं.

क्या कहता है नियम

पेट्रो केमिकल्स का कारोबार करने वाली कंपनियों के मेन व सब पंप, मिनी पंप ही पेट्रोल-डीजल की बिक्री करने के लिए अधिकृत हैं. थोक तो क्या खुदरा भी पेट्रोल, डीजल की बिक्री गैर लाइसेंसधारी कोई व्यक्ति नहीं कर सकता.