आधार के चक्कर में देश को डुबा देंगे क्या मोदी जी? ये रिपोर्ट पढ़िए

आधार के चक्कर में देश को डुबा देंगे क्या मोदी जी? ये रिपोर्ट पढ़िए

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट की लगातार चेतावनियों और फटकार के बावजूद सरकार आधार लागू करने पर उतारू है. सरकार बार बार आधार को अनिवार्य करने पर जोर दे रही है और तरह तरह की स्कीमें लाकर देश के नागरिकों से जबरदस्ती कर रहे हैं कि वो आधार कार्ड बनवाएं. वो उसे जगह जगह अनिवार्य भी कर रहे हैं. अब एक और रिपोर्ट आई है जिसने आधार पर सवाल उठाए हैं. इस रिपोर्ट के मुताबिक देश के साढ़े तेरह करोड़ लोगों का आधार डेटा लीक होने के कगार पर है.
बेंगलुरु की सेंटर फॉर इंटरनेट ऐंड सोसायटी (CIS) की एक रिपोर्ट ने आधार कार्ड योजना की सेफ्टी पर एक बार फिर सवाल खड़े किए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 13.5 करोड़ आधार कार्ड का डेटा लीक होने की आशंका है. रिपोर्ट के अनुसार, कई सरकारी विभागों ने करोड़ों लोगों की आधार डिटेल सार्वजनिक कर दी, जिसे कोई भी देख सकता है. यह रिपोर्ट चार डेटा बेस की स्टडी के बाद तैयार की गई है.

हालांकि रिपोर्ट में इस बात की जानकारी नहीं दी गई कि डेटा लीक के पीछे क्या कारण है और इसे जानबूझकर लीक किया गया या गलती से हो गया.
रिपोर्ट के अनुसार पहले जहां से आधार कार्ड का डेटा लीक हुआ, उसमें दो डेटा बेस रूरल डिवेलपमेंट मिनिस्ट्री से जुड़े हैं. इनमें नैशनल सोशल असिस्टेंट प्रोग्राम का डैशबोर्ड और नैशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी ऐक्ट का पोर्टल शामिल है. दो डेटा बेस आंध्र प्रदेश से जुड़े हैं. इनमें एक स्टेट का नरेगा पोर्टल और चंद्राना बीमा नामक सरकारी स्कीम का डैशबोर्ड है.
इन पर लाखों लोगों की आधार डीटेल दी गई है, जिसे कोई भी देख सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि चार पोर्टल्स से लीक हुए आधार नंबर 13 से 13.5 करोड़ के बीच हो सकते हैं. इसमें अकाउंट नंबर्स 10 करोड़ के आसपास हो सकते हैं. नैशनल सोशल असिस्टेंट प्रोग्राम के पोर्टल पर आधार कार्ड से जुड़े हुए 94.32 लाख से ज्यादा बैंक अकाउंट और 14.98 लाख डाकघर खातों की जानकारी है.
गौरतलब है कि पिछले दिनों क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी की आधार डिटेल एक कॉमन सर्विस सेंटर ने लीक कर दी थी. इस पर उनकी पत्नी साक्षी ने ट्वीट के जरिए सरकार से शिकायत की थी. इसके बाद सरकार ने डेटा लीक करने वाली कंपनी सीएससी को 10 साल के लिए सस्पेंड कर दिया.
CIS पहले भी कह चुकी है कि आधार इसलिए अनसेफ है क्योंकि यह बायॉमीट्रिक डेटा पर आधारित है. तकनीकी स्तर पर इसमें काफी खामियां हैं, जिनकी वजह से आधार का डेटा पूरी तरह से सुरक्षित रखना काफी मुश्किल है. देश में अभी तक 115 करोड़ से ज्यादा लोगों का आधार बन चुका है. यूआईडीएआई सिस्टम में आधार बनवाने वाले सभी नागरिकों का डेटा सेंट्रल रिपॉजिटरी में स्टोर होता है. इतनी बड़ी संख्या में एक जगह डेटा सुरक्षित रखना अपने आप में चुनौती है.

इस बारे में हालांकि यूआईडीएआई कई बार कह चुका है कि आधार में सिक्यॉरिटी लेवल पर किसी तरह की खामियां नहीं हैं. किसी भी तरह का डेटा लीक नहीं किया जा सकता. जून से इसका सिक्यॉरिटी लेवल बढ़ाया जा रहा है. अभी दो लेयर का सिक्यॉरिटी सिस्टम है, इसे जून से तीन लेयर का किया जा रहा है.