क्या कुमार विश्वास आदमी पार्टी तोड़ने पर उतारू हैं? बिना उकसावे के क्यों कर रहे हैं हमले

क्या कुमार विश्वास आदमी पार्टी तोड़ने पर उतारू हैं? बिना उकसावे के क्यों कर रहे हैं हमले




क्या कुमार विश्वास पार्टी तोड़ने के बहाने खोज रह हैं ? क्या कुमार विश्वास केजरीवाल को कमज़ोर करने के खेल का हिस्सा बन गए हैं ? क्या आम आदमी पार्टी को खत्म करने के खेल में कुमार विश्वास का इस्तेमाल हो रहा है ? क्या दिल्ली में बीजेपी की राज्य सरकार बनाने का वैंकेया नायडु का सपना सच होने जा रहा है ? ये वो सवाल हैं जो आम आदमी पार्टी के अंदर के घटना क्रम और कुमार विश्वास के रूठने से बारबार उठ रहे हैं.
दर असल सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि लगातार हमले एक तरफ से ही हो रहे हैं. सबसे पहले हमले की शुरुआत कुमार विस्वास ने ऐन चुनाव से पहले एक वीडियो जारी किया. वीडियो में अरविंद केजरीवाल पर आरोप लगाया गया कि वो करप्शन पर नरम पड़ रहे हैं. इस वीडियो का केजरीवाल ने स्वागत किया उन्होंने वीडियो री ट्वीट भी किया. कुमार की तारीफ भी की.

जब ये वार खाली गया तो कुमार विश्वास ने दूसरा हमला चुनाव में हार के बाद किया. उन्होंने एक न्यूज़ चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि केजरीवाल को ईवीएम में खराबी का मसला नहीं उठाना चाहिए था. उन्होंने कहा कि हम करप्शन के लिए आए थे और केजरीवाल को करप्शन पर ही चुनाव लड़ना चाहिए था. कुमार ने इसके अलावा भी कई बातें कहीं.
कुमार विश्वास ने कहा कि पार्टी के अंदर कई गलत फैसले लिये गये थे, कई फैसले बंद कमरों में भी लिये गये. कुमार विश्वास ने कहा कि हार के बाद ईवीएम को निशाना बनाना गलत था, यह एक मुद्दा हो सकता है लेकिन हार का मुख्य कारण यह था कि हम लोगों और अपने कार्यकर्ताओं से कट गये थे.

कुमार विश्वास ने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक के मुद्दे पर पीएम मोदी पर निशाना साधना पार्टी का गलत निर्णय था, वह देश के प्रधानमंत्री हैं इस तरह उनपर निशाना साधना ठीक नहीं था.
दिल्ली एमसीडी चुनावों पर विश्वास बोले कि गोपाल राय को दिल्ली का इनचार्ज बनाया गया था, लेकिन उनके साथ चुनाव के मुद्दे पर कोई बातचीत नहीं की गई थी. बस पीएसी के दौरान कुछ निर्देश दिये गये थे. विश्वास ने कहा कि पार्टी में बदलाव की जरूरत है, पार्टी अपनी गलती के कारण ही एमसीडी चुनाव हारी है.
कुमार विश्वास ने कहा कि यह हमारी छठी हार है, जिसका बड़ा कारण है कि हम लोग अपने ही कार्यकर्ताओं से कट गये हैं, इस तरह ईवीएम को हार का कारण बताना गलत है. हम इसलिये हारे क्योंकि लोगों ने हमें वोट नहीं दिया है. हार पर बहाने ढूंढने की बजाय हमें इस हार की समीक्षा करनी चाहिए.
पार्टी नेतृत्व में बदलाव के सवाल पर कुमार विश्वास ने कहा कि इस बारे में हम पार्टी मीटिंग में फैसला करेंगे. उन्होंने कहा कि संजय सिंह, दुर्गेश पाठक का इस्तीफा देना बहुत देरी से लिया गया एक्शन था. विश्वास ने कहा कि हम लोग जंतर-मंतर पर कांग्रेस, मोदी या ईवीएम के खिलाफ लड़ाई लड़ने के कारण नहीं बैठे थे.

कुमार विश्वास ने मशहूर शायर राहत इंदौरी के ट्वीट को भी रिट्वीट किया. ट्वीट में लिखा था कि मैं ना जानता हूं कि दुश्मन भी कम नहीं हैं, हमारी तरह हथेली पे जान थोड़ी है.
इतने हमलों के बाद भी पार्टी की तरफ से कोई जवाब नहीं आया लेकिन अमातुल्ला चुप न रह सके. उन्होंने कहा कि कुमार विश्वास बीजेपी के लिए काम कर रहे हैं. वो पार्टी को तोड़ना चाहते है. इतना कहना था कि बवाल मच गया. मंत्री कपिल मिश्रा ने भी फ्रंट खोल दिया.
मामले पर पार्टी की राजनीतिक मामलों की कमेटी की बैठक बुलाई गई. बैठक में फैसला होना था. लेकिन कुमार विश्वास गए ही नहीं. अमानतुल्ला खां गए केजरीवाल से झाड़ पड़ी तो उन्होंने इस्तीफा दे दिया. अमानतुल्ला के से नाराज़ विश्वास फिर रूठ गए.
कुमार को मनाने के लिए फिर पीएसी बुलाई गई.लेकिन वो नहीं आए. इस बीच रूठने मनाने का दौर चलता रहा. केजरीवाल ने कुमार विस्वास को मनाने के लिए ट्वीट भी किया. उन्हें भाई भी लिखा लेकिन बात नहीं बनी.
इसके बाद कुमार विश्वास फिर टीवी पर आए और कहा कि अमानतुल्ला के कंधे पर रखकर बंदूक चलाई जा रही है. उन्होंने कहा कि कुमार अमानतुल्ला के खिलाफ एक्शन नहीं लिया जा रहा. कुमार ने कहा कि अमानतुल्ला ने केजरीवाल के खिलाफ बोला होता तो मैं एक मिनट भी नहीं रुकता और एक्शन ले लेता.

इसके बाद मनीष सिसोदिया आए उन्होंने कहा कि ये केजरीवाल की और मेरी पार्टी नही है ये लाखो कार्यकर्ताओं की पार्टी है, सिसोदिया ने कहा कि कुमार पीएसी में नहीं आ रहे लेकिन मीडिया मे बयानबाज़ी करने में लगे हैं. उन्होंने कहा कि इस बयानबाज़ी से कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट रहा है. किन लोगो को इस बयानबाजी से किसका फायदा हो रहा वो सब जानते है. कुमार का बयान देखकर दुख हुआ, वो इस लडाई को पर्सनल बना रहे है. उन्होंने कहा कि कुमार विश्वास को किसी ने माफी मांगने के लिए नहीं कहा. पार्टी मेरी, अरविन्द या कुमार की नहीं है बल्कि देश विदेश में बैठे लाखों कार्यकर्ताओं की है.

वो PAC में नहीं आए, टीवी पर बयानबाजी करते हैं जिससे कार्यकर्ता का मनोबल टूटता है. बयानबाजी से किस पार्टी को फायदा हो रहा है ये भी कार्यकर्ता समझ रहे हैं. मैं खुद कुमार से मिलने गया था, संजय सिंह भी गए थे. अरविन्द केजरीवाल ने तीन तीन घंटे बात की है उनसे लेकिन कुमार हैं कि मान ही नहीं रहे. बहरहाल कुमार अब अगला कदम क्या उठाएंगे वो रात को बताएंगे लेकिन उन्होंने इतना कहा है कि वो पार्टी में न तो पद लेंगे न पार्टी में जायेंगे.