मोदी जी! कैशलैस की ज़िद कहीं देश को न डुबो दे, खतरे में देश के एटीएम, हैकर्स की दया से ही बचे हुए हैं 66 फीसदी बैंक

नई दिल्ली: देश के 1 लाख तीस हज़ार से ज्यादा एटीएम कभी भी हैक हो सकते हैं. इतना ही नहीं. 66 फीसदी बैंक भी साइबर हमले का सबसे इजी टारगेट हैं. ये खतरनाक आंकड़ा है खात तौर पर तब जब सरकार कैशलेस भुगतान के रास्ते पर देश को ले जाने पर उतारू है. कल्पना कीजिए रैंसमवेयर की जगह कल अगर कोई विदेशी शक्ति भारत पर साइबर अटैक करे तो क्या होगा. हालात ये हैं कि हमले से निपटने की तैयारी तो दूर बैंकों के सॉफ्टवेयर तक अपडेट नहीं हैं. सरकार ने दुनिया भर में हुए रैंसमवेयर हमले के मद्देनजर बैंकों के साइबर सुरक्षा तंत्र की समीक्षा का निर्णय लिया है.

पुराने सॉफ्टवेयर का प्रयोग
वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक 66 फीसदी बैंक पुराने सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रहे हैं, ज्यादातर विंडोज-एक्सपी का प्रयोग करते हैं. यह काफी पुराना ऑपरेटिंग सिस्टम है . यहां तक कि विंडोज भी इसके लिए सपोर्ट देना अब बंद कर चुका है. ऐसे सॉफ्टवेयर से साइबर हमले का जोखिम बढ़ जाता है. सूत्रों के मुताबिक डेबिट कार्ड डाटा चोरी होने के बाद सरकार ने बैंकों को चेतावनी भी जारी की थी, लेकिन इस मामले में बैंकों का लापरवाह रवैया जस का तस है.

पुराने सॉफ्टवेयर के चलते बैंक डाटा, ऑनलाइन लेनदेन और एटीएम पर हैकर्स के लिए साइबर हमला करना आसान हो जाता है. माना जा रहा है कि देश में 2 लाख से अधिक एटीएम हैं जिनमें से 1.30 लाख से ज्यादा पर साइबर हमले का खतरा है.

अपडेशन के लिए समीक्षा
सरकार ने साइबर हमले पर बैंकों, वित्तीय संस्थानों समेत अन्य को हाई-अलर्ट किया है. सूत्रों की मानें तो इस दौरान वित्त मंत्रालय और आरबीआई ने बैंकों द्वारा उपयोग में लाए जा रहे साइबर सुरक्षा तंत्र, सॉफ्टवेयर अपडेशन और एंटी-वायरस समेत अन्य तकनीकी पहलुओं की समीक्षा करने का निर्णय लिया है. इसमें सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सीईआरटी-इन की सहायता ली जाएगी. गत सोमवार को आरबीआई ने बैंकों को सीआरटी-इन द्वारा जारी किए गए निर्देशों का पालन करने को कहा था. इस दौरान देश में बड़ी तादाद में कई बैंकों के एटीएम के सिस्टम डाउन रहे जिसका कोई कारण स्पष्ट नहीं किया गया. हालांकि आरबीआई ने इससे जरूर इनकार किया कि उसकी ओर से एटीएम बंद करने के निर्देश दिए गए हैं.

बैंक करते हैं मनमानी
एसबीआई के पूर्व मुख्य प्रबंधक सुनील पंत की मानें तो देश का बैंकिंग तंत्र साइबर हमले के लिहाज से मजबूत नहीं है. देश में करीब 65 फीसदी एटीएम विंडोज एक्सपी पर चल रहे हैं जिनके अपडेट नहीं किया जा सका है. कुछ माह पहले डाटा चोरी इसका ताजा उदाहरण है कि बैंक इस मामले में सक्षम नहीं है. उन्होंने कहा कि आरबीआई ने साइबर सुरक्षा पर बैंकों को निर्देश दिए हैं, लेकिन उन पर अमल नहीं किया जा रहा है.

साइबर विशेषज्ञों की राय
साइबर विशेषज्ञ रामानुज के मुताबिक देश भर में बैंक पुराने सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रहे हैं. जबकि माइक्रोसॉफ्ट साइबर हमले के मद्देनजर स्पष्ट कर चुका है कि विंडोज-8, विंडोज-एक्सपी और विंडोज-2003 का प्रयोग करने वाले उपभोक्ताओं को रैनसमवेयर हमले से सतर्क रहने की जरूरत है. साइबर विशेषज्ञ पवन दुग्गल के मुताबिक देश का साइबर सुरक्षा तंत्र बेहद कमजोर है. इसमें बैंकों और वित्तीय संस्थानों का प्रतिशत सर्वाधिक है. अगर अमेरिका, इंग्लैंड की तर्ज पर हमारा सारा तंत्र डिजिटल होता तो हमारे लिए उबरना मुश्किल हो जाता.

बस थोड़ा इंतज़ार..

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