आंकड़ों में रोज़गार बढ़ाने की तैयारी में मोदी सरकार, अबतक लगी है विफलता हाथ

नई दिल्ली: आंकड़ों के खेल में माहिर मोदी सरकार अब रोजगार के आंकड़े दुरुस्त करने की कोशिश में जुट गई है. अब लक्ष्य है कि ज़मीन पर न सही लेकिन आंकड़ों में रोज़गार ज़रूर पैदा हो जाए. पीएम मोदी ने सभी मंत्रालयों को निर्देश दिया है कि कैबिनेट को भेजे जाने वाले सभी प्रस्तावों में यह जानकारी जरूर दी जाए कि उन प्रस्तावों पर अमल करने से रोजगार के कितने मौके बनेंगे.

जाहिर बात है मंत्रालय अजीब अजीब आंक़ड़े देंगे जो सरकार के काम आएंगे. जैसे हम कार बनाएंगे . उसकी टैक्सी बनेगी. टैक्सी को चौबीस घंटे में तीन ड्राइवर चलाएंगे, कार का मैकेनिक होगा.

कार साफ करने वाला होगा. कार में पेट्रोल डालने वाला होगा. ये लोग अपनी कमाई से सामान खरीदेंगे सामान से दुकानदार को रोज़गार मिलेगा उसके नौकरों को रोज़गार मिलेगा. दुकानदार से डिस्ट्रीब्यूटर के नौकरों को और फिर सामान बिकेगा तो फैक्ट्रियों में ही बनेगा.

वहां मज़दूरों को काम मिलेगा. यानी हो गया 1 कार सो 100 रोज़गारों का निर्माण. आपको याहे यकीन न हो लेकिन रोज़गार श्रजन के आंकड़े ऐसे ही तैयार किए जाते हैं.

रोजगार सृजन को लेकर प्रधानमंत्री सक्रिय

दरअसल 2014 में लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान मोदी ने युवाओं को 1 करोड़ रोजगार के अवसर देने का वादा किया था. हालांकि, बीते तीन सालों में रोजगार देने के मामले में मोदी सरकार का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है. वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक बिजनेस अखबार को बताया कि जिस भी प्रस्ताव के साथ कुछ खर्च जुड़ा होगा, उससे देश में रोजगार निर्माण होना ही चाहिए और ऐसे प्रस्ताव के साथ जॉब्स एस्टिमेट दिया जाना चाहिए. सीतारमण ने बताया, ‘जब भी कोई प्रस्ताव चर्चा के लिए आता है तो प्रधानमंत्री कैबिनेट बैठक में पूछते हैं कि रोजगार के कितने मौके बनेंगे?’

बेरोजगारी दूर करने का ये है ऐक्शन प्लान

आर्थिक वृद्धि के साथ रोजगार के मौके बनने की रफ्तार बढ़ाने के लिए नीति आयोग ने तीन साल का एक ऐक्शन प्लान पेश किया है, जिसमें विभिन्न सेक्टरों में रोजगार सृजित करने की बात की गई है. सीआईआई के अनुसार, वित्त वर्ष 2012 से 2016 के बीच भारत में रोजगार के 1.46 करोड़ मौके बने थे. यानी हर साल 36.5 लाख अवसर. कामकाजी उम्र वाले लोगों की संख्या में 8.41 करोड़ का इजाफा हुआ, लेकिन वास्तिक श्रम बल में बढ़ोतरी केवल 2.01 करोड़ रही। कामकाजी उम्र वाली आबादी का 24 प्रतिशत हिस्सा श्रम बल में जुड़ा, जबकि 76 प्रतिशत हिस्सा इससे बाहर रहा.

हर महीने 15 लाख लोगों की जॉब मार्केट में एंट्री

क्रिसिल की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 15 लाख से ज्यादा लोग हर महीने देश के जॉब मार्केट में रोजगार तलाशने आते हैं. वहीं, मानव श्रम पर निर्भरता घटाने वाले ऑटोमेशन की वजह से स्थिति गंभीर होती जा रही है. सरकार ज्यादा रोजगार पैदा करना चाहती है ताकि आमदनी बढ़े और लाखों लोग गरीबी के जाल से बाहर निकलें. सरकार अपनी मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी की भी समीक्षा भी कर रही है ताकि उसे रोजगार निर्माण के उद्देश्य के मुताबिक बदला जा सके.

इकनॉमिक सर्वे 2017 में कहा गया है कि आबादी में युवाओं की अधिक संख्या से ग्रोथ में होने वाली बढ़ोतरी अगले पांच वर्षों में उच्चतम स्तर पर पहुंच जाएगी क्योंकि तब तक कामकाजी उम्र वाले लोगों की संख्या में ठहराव आ चुका होगा. ऐसे में कौशल और उद्यमिता को बढ़ावा देना जरूरी हो गया है.

बस थोड़ा इंतज़ार..

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