लालबत्ती हटाने के पीछे हैं ये सिक्योरिटी रिपोर्ट, VIP कल्चर तो एक बहाना है ?

नई दिल्ली: वीआईपी वाहनों से लाल बत्ती हटाने का फैसला वीआईपी कल्चर को खत्म करने की दिशा में उठाया हुआ कदम नहीं है बल्कि ये फैसला वीआईपी सिक्योरिटी के कारण लिया गया. सूत्रों के मुताबिक इस फैसले के पीछे 1015 की एक रिपोर्ट है जिसमें लाल बत्ती को वीआईपी सुरक्षा के हिसाब से खतरनाक बताया गया था. ये रिपोर्ट अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा की भारत यात्रा से 6 महीने पहले फाइल की गई थी. इस बेहद गोपनीय रिपोर्ट में कहा गया था लाल बत्ती के कारण वीआईपी की कार को पहचानना आसन हो जाता है.

रिपोर्ट में कहा गया था कि सिर्फ लाल बत्ती के कारण ही कई बार एक जैसी कई गाड़ियां काफिले में डालनी पड़ती है. खुफिया सूत्रों के मुताबिक सालाना सुरक्षा सुझाव रिपोर्ट थी जिसपर कार्रवाई करते हुए वीआईपी गाड़ियों की सभी पहचानें हटाने का फैसला किया गया. फैसले में राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश, उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश, राज्यों के मुख्यमंत्री व मंत्री तथा सभी सरकारी अफसरों के वाहन शामिल हैं. अब केवल एंबुलेंस, फायर सर्विस जैसी आपात सेवाओं तथा पुलिस व सेना के अधिकारियों के वाहनों पर नीली बत्ती लगेगी. यह फैसला एक मई से लागू होगा.

बुधवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा, ‘इस ऐतिहासिक निर्णय में कैबिनेट ने आपात सेवाओं को छोड़ सभी वाहनों से बीकन बत्तियां हटाने का निश्चय किया है. इसके लिए संबंधित नियमों में संशोधन होगा.’ बहरहाल केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का कहना है कि इस फैसले की अधिसूचना जनता से राय के बाद जारी की जाएगी.

सुरक्षा के साथ वीआईपी कल्चर को लेकर सुप्रीम कोर्ट का 2014 का फैसला भी इस सरकारी कदम के पीछे की वजह है. कोर्ट ने 2014 में पुन: लाल बत्ती को स्टेट्स सिंबल बताते हुए कहा था कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों तथा एंबुलेंस, फायर सर्विस, पुलिस तथा सेना को छोड़ किसी को भी लाल बत्ती लगाने की जरूरत नहीं. 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को विशिष्ट व्यक्तियों की सूची में कटौती को कहा था. जेटली के मुताबिक फैसले के तहत 1998 की मोटर वाहन नियमावली के नियम 108(1-तृतीय) तथा 108(2) में संशोधन किया जाएगा. नियम 108(1-तृतीय) के तहत केंद्र व राज्य सरकारों को वाहनों में लाल बत्ती लगाने योग्य विशिष्ट व्यक्तियों की सूची जारी करने का अधिकार है. जबकि 108(2) के तहत राज्यों को नीली बत्ती लगाने योग्य अधिकारियों की सूची जारी करने का अधिकार दिया.

फैसले के बाद केंद्रीय मंत्रियों ने फैसले के तुरंत बाद अपनी गाडि़यों से लाल बत्ती हटाना शुरू कर दिया. नितिन गडकरी ने सबसे पहले अपनी कार की लाल बत्ती हटाई. इसके बाद गिरिराज सिंह ने बाकायदा पोज देकर अपनी कार की बत्ती हटाई. उमा भारती को भी बत्ती हटाते देखा गया. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, पंजाब और गुजरात समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने अपनी कारों से लाल बत्ती हटाने का एलान किया.

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