आरबीआई की एडवाइजरी, नकली 10 रुपये के सिक्के वो नहीं जो आप समझते हैं

नई दिल्ली: 5 और 10 रुपए के नकली सिक्के बनाने वाले मास्टर माइंड उपकार लूथरा को स्पेशल सेल ने गुरुवार को गिरफ्तार किया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उसने 1998 से अब तक करीब 50 करोड़ रुपए के नकली सिक्के भारत की अर्थव्यवस्था में उड़ेल दिए हैं.  जब भी नकली सिक्कों से जुड़ी कोई खबर आती है लोग सिक्कों को अपने हिसाब से ही असली या नकली कहना शुरू कर देते हैं.इससे बड़ी पेरशानी होती है. इस कन्फ्यूजन को दूर करने के लिए आरबीआई ने ये एडवाइजरी दी है.

देश में दस रुपये के विभिन्न प्रकार के सिक्कों पर जनता के बीच भ्रम की स्थिति को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक ने स्पष्ट किया है कि कोई भी सिक्का अमान्य नहीं है और सभी सिक्के चलन में हैं. ये समय समय पर जारी किये गये अलग अलग डिजाइनों के सिक्के हैं.

सबसे ज्यादा विवाद उस सिक्के पर है जिसके बीच में ‘10’ लिखा है और इसे नकली कहा जा रहा है. लेकिन आरबीआई की ओर से एक ईमेल में जानकारी दी गयी है कि यह सिक्का 26 मार्च 2009 को जारी किया गया था. आरबीआई के मुताबिक 10 रुपये की तरफ 15 लकीरों वाला सिक्का भी असली है और 10 लकीरों वाला भी. रुपये के निशान के साथ जिस में 10 रुपये लिखा है वो भी असली है और जिसमें रुपये का निशान नहीं है वो भी असली है.

 

बैंक का कहना है कि शेरावाली की फोटो वाला सिक्का, संसद की तस्वीर वाला सिक्का, बीच में संख्या में ‘10’ लिखा हुआ सिक्का, होमी भाभा की तस्वीर वाला सिक्का, महात्मा गांधी की तस्वीर वाला सिक्का बिना रुपये के निशान के 10 रुपये वाला सिक्का. समेत अन्य सभी सिक्के मान्य हैं. केन्द्रीय बैंक के अनुसार इन सिक्कों को विभिन्न विशेष मौकों पर जारी किया गया है.

 

उल्लेखनीय है कि दस रुपये के सिक्कों के लेनदेन को लेकर लोगों के बीच अक्सर विवाद खड़ा हो जाता है. ज्यादातर लोगों का कहना है कि दस पत्ती वाला वही सिक्का मान्य है जिसमें 10 का अंक नीचे की तरफ लिखा है और दूसरी तरफ शेर का अशोक स्तंभ अंकित है. केन्द्रीय बैंक के एक अधिकारी ने इस संबंध में स्पष्ट किया गया कि दस रूपये के सभी सिक्के वैध हैं.

 

कॉरपोरेट मामलों के वकील शुजा ज़मीर ने कहा, ‘‘भारत की वैध मुद्रा को लेने से इनकार करने पर राजद्रोह का मामला बनता है और जो ऐसा करता है उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 124 :1: के तहत मामला दर्ज हो सकता है क्योंकि मुद्रा पर भारत सरकार वचन देती है. इसको लेने से इनकार करना राजद्रोह है.’’ राष्ट्रीय राजधानी सहित देश के कई हिस्सों में दस रूपये के सिक्को को लेकर भ्रम की स्थिति है और कई दुकानदार और लोग इन सिक्कों को लेने से कतरा रहे हैं.

आरबीआई ने कहा है कि केंद्रीय बैंक ने वक्त वक्त पर आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक थीम पर सिक्के जारी किए हैं और सिक्कों में 2011 में रुपये का चिह्न शामिल करने के बाद बदलाव आया. सिक्के लंबे समय तक सही रहते हैं इसलिए यह मुमकिन है कि बाजार में अलग अलग डिजाइन और छवि के सिक्के हों, जिनमें बिना ‘रुपये’ के चिह्न वाले सिक्के भी शामिल हैं. हालांकि आरबीआई ने किसी का भी लीगल टेंडर वापस नहीं लिया है और सारे सिक्के वैध हैं.

बस थोड़ा इंतज़ार..

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